परिचय अल्प वित्त निर्धन व्यक्तियों की आय और बचत में वृद्धि कर, उनके जीवनयापन में सुधार करने और वित्तीय दुर्बलताओं में कमी करने का एक साधन बना हुआ है। अल्प वित्त के अधीन आय अर्जक गतिविधियों के लिए सहायता दिए जाने पर बल देते हुए, बैंक अल्प वित्त संस्थानों को लगातार वितीय सहायता दे रहा है। इसके अलावा, बैंक ने उन भागीदारी वित्तीय संस्थाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के क्षेत्र में कदम रखा है, जो पात्र अत्यंत लघु और लघु उद्यमों को 50,000 रूपये से 10,00,000 (उपेक्षित मध्यवर्त्ती उद्यम) तक के ऋण उपलब्ध कराती हैं। अल्प वित्त क्षेत्र अद्यतन अल्प वित्त क्षेत्र में फिर से बहाली आ है और उसने महत्वपूर्ण संवृद्धि दर्ज की है। भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक दोनों पूरी शक्ति से सार्वभौमिक वित्तीय समावेश के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। वित्तवर्ष 2015 में प्रधानमंत्री धन योजना का आरंभ हुआ जिसे भारत सरकार ने एक अभियान के रूप में कार्यान्वित किया और इससे सार्वभौमिक वित्तीय समावेश को अत्यंत बल मिला है। भारतीय रिजर्व बैंक भी समुचित रूप में अतिसक्रिय कदम उठा रहा है। इसने दो संस्थाओं को नए बैकिंग लाइसेंस प्रदान किये हैं और लघु वित्त बैंकों तथा भुगतान बैंकों के लिए आवेदन आमंत्रित किये हैं, जिनसे वित्तीय समावेश के प्रयासों को गहन बनाने में मदद मिलेगी। भा. रि. बैंक ने स्व-विनियामक संगठन की कार्यप्रणाली भी स्थापित की है और व्यवसाय प्रतिनिधि मॉडल के लिए अनुमति प्रदान की है। इन सभी अतिसक्रिय प्रयासों से अल्प वित्त क्षेत्र को बल मिलेगा और वित्तीय समावेश के कार्यक्षेत्र में अल्प वित्त संस्थाएं अधिक प्रासंगिक और सुसंगत बन सकेगी। इस क्षेत्र के बढ़ते विश्वास और गति के साथ ही, बैंक ने भी अल्प वित्त व्यवसाय के लिए संवृद्धि कार्यनीति का दृष्टिकोण अपनाया है। इसे वित्तवर्ष 2016 के दौरान जारी रखने का प्रस्ताव है। केंद्र बिंदु आस्ति गुणवत्ता के सम्बन्ध में, केंद्रबिंदु जिसे मूल्यांकन निगरानी और ऋण-जोखिम प्रबंध के माध्यम से जोखिम प्रंबध करना है। बैंक का मुख्यतः उन अल्पवित्त संस्थाओं और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों पर ध्यान केन्द्रित करता है, जिनका संसाधन संग्रह, पूंजीगत स्थिति और सुदृढ़ प्रणालियों नए विनियामक दिशानिर्देशों के अनुपालन उत्तरदायी ऋण परम्पराओं तथा वित्तीय एवं परिचालगत सन्दर्भों में दीर्घकालिक संपोषणीयता सम्बन्धी पिछला कामकाज अच्छा रहा हो। उत्पाद रुपरेखा सिडबी अल्प ऋण कोष अल्प वित्त के अंतर्गत आगे अल्प वित्त उधार जाने के लिए संस्थाओं को और सेवाप्रदाताओं को गौण ऋण, दीर्घावधि ऋण, सावधि ऋण देना जारी रखेगा। अल्प वित्त के क्षेत्र में उछाल को देखते हुए बैंक ने अल्प वित् संस्थाओं को दीर्घ अवधि के ऋण देने की योजना फिर से शुरू की है। विभिन्न उत्पादों के पात्रता मानदंडों, आदि का विवरण संलग्नक II में दिया गया है। भागीदार वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से उपेक्षित उद्यमों को वित्तीय सहायता दिए जाने सम्बन्धी बैंक की गतिविधियों का निधीयन एडीबी और केएफडब्ल्यू कर रहे हैं और साथ ही यह कार्य सिडबी की निधियों से भी किया जा रहा है। इस उत्पाद वर्ग के अंतर्गत, भागीदार वित्तीय संस्थाओं को सहायता दी जाएगी, ताकि वे उपेक्षित मध्यवर्त्ती उद्यम वर्ग को ऋण दे सकें। चूँकि भा.रि बैंक ने अल्प वित्त के अंतर्गत ऋण सीमा पुनरीक्षित कर रु० 1लाख कर दी है, अतः सिडबी अपनी अल्प वित्त ऋण-व्यवस्था के अंतर्गत रु० 1लाख तक के ऋणों को अल्प ऋण के रूप मने शामिल करेगा। जहाँ तक उपेक्षित मध्यवर्ती उद्यमों से संबंधित ऋण प्रदायगी का सम्बन्ध है, ऋण सीमा रु० 0.50 लाख से रु० 10 लाख बनी रहेगी, क्योंकि रु० 0.50 लाख से रु० 10 लाख तक के ऋण वाले कुछ उधारकर्त्ता व्यक्तिगत ऋण के अंतर्गत हो सकते हैं और इसलिये वे उपेक्षित मध्यवर्त्ती उद्यमों से सम्बन्धित ऋण प्रदायगी के लिए पात्र होंगें। अल्प वित्त संस्थाओं में बैंक की ईक्विटी एवं तत्सम्बन्धी निवेशों के सम्बन्ध में बैंक सांविधिक दिशानिर्देशों से मार्गदर्शन लेगा। बैंक उचित व्यवहार संहिता, व्यथा निवारण क्रियाविधि तथा संयोजी/संबंधगत उधार के बारे में अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं को जारी भा.रि.बैंक के दिशानिर्देशों सिडबी अल्प ऋण कोष से संबधित सहायता पर लागू हैं।। स्रोत: भारतीय लघु, उद्योग विकास बैंक (सिडबी)