मूलभूत संरचना सम्बन्धी परियोजनाओं के लिए सहायता एमएसएमई क्षेत्र की तेजी से संवृद्धि के लिए पर्याप्त एवं गुणवत्तापूर्ण मूलभूत संरचनागत सुविधाओं का होना एक प्रमुख आवश्यकता है। इसके फलस्वरूप रोजगार सृजन एंव दक्षतापूर्ण परिचालन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और समग्र अर्थव्यवस्था पर चहुंमुखी प्रभाव पड़ता है। परियोजनाओं की अत्यत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों की संबद्धता के प्रति संतुष्ट होने पर बैंक औद्योगिक पार्कों, परिवहन, आदि क्षेत्रों की मूलभूत संरचना परियोजनाओं को सहायता देता है। मूलभूत संरचना के क्षेत्र में बैंक के लिए अपनी ऋण गतिविधियाँ बढ़ाने के पर्याप्त संभावनाएं हैं। जहाँ एक ओर अन्य क्षेत्रों में मूलभूत संरचनागत परियोजनाओं को सहायता-संघों/बहु बैंकिंग व्यवस्थाओं के माध्यम से सहायता दी जाएगी, वहीं औद्योगिक मूलभूत संरचना के क्षेत्र में पर्यटन, मालगोदाम तथा शीत भंडारण श्रंखला क्षेत्र की अत्यंत लघु, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबद्धता रखने वाली परियोजनाओं को सहायता दिए जाने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं। इसके अलावा, योजना के अंतर्गत, अत्यंत लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबद्धता के सम्बन्ध में संतुष्टि के उपरांत, औद्योगिक उद्यम-समूहों में सामूहिक उपशिष्ट प्रंबध की सुविधाओं एवं बहिस्राव उपचार संयंत्रों तथा नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को सहायता दिए जाने पर विचार किया जा सकता है। कार्यशील पूंजी सहायता कार्यशील पूंजी सहायता निम्नलिखित को चुनिन्दा रूप से देने पर विचार जायेगा। मौजूदा ग्राहक जो केवल सिडबी से बैंकिंग कर रहे हैं। सिडबी के मौजूदा ग्राहक (जो अन्य बैंकों के साथ भी बैंकिंग कर रहे हैं) और जिनकी अचल प्रतिभूति का बड़ा हिस्सा सिडबी के पास है: अच्छा कामकाज करने वाली मौजूदा संस्थाएं, जो सिडबी के लिए नई और किसी अन्य बैंक से कार्यशील पूंजी सुविधा का लाभ नहीं उठा रही है: वे नई संस्थाएं, जिनके लिए सिडबी ऋण अधिग्रहण के एक हिस्से के रूप में अधिग्रहण करने पर विचार किया जा सकता है, बर्श्तें अधिग्रहण सम्बन्धित दिशानिर्देशों का पालन किया गया हो। स्रोत: भारतीय लघु, उद्योग विकास बैंक (सिडबी)