अच्छी वसा, खराब वसा और कुछ जीवविज्ञानी तथ्य वो दिन गये जब लोग ताजे दूध के लिए स्थानीय दूध बेचने वाले पर निर्भर रहते थे। अब लगभग हर चीज तैयार रूप में पैकेट में बेचीं जाती है और इसमें दूध भी कोई अपवाद नहीं है। दूध के लिए लगातार बढ़ रही मांगों के कारण इसके निर्माण में उछाल आया है साथ ही ब्रांड्स में भी। ठीक उसी समय दूध के साथ-पानी वनस्पति तेल, अपमार्जक (डिटर्जेंट) कास्टिक सोडा, यूरिया, स्टार्च, सोख्ता कागज, सफेद रंग आदि की मिलावट में तेजी से वृद्धि चिता का विषय बन गई। अधिक से अधिक उपभोक्ताओं ने पैक किये हुए ब्रांडेड दूध के ओर रुख कर लिया। इस रिपोर्ट में बाकी अन्य चीजों के अलावा हमारी सारी चिताएँ दूध की मिलावट और संदूषण की होगी और पैक किये हुए फूल क्रीम दूध के प्रमुख ब्रांड के सेहत संबधी दावों की पुष्टि या विवाद को लेकर होगी। पैकेट वाले दूध का यह परीक्षण एनबीएल द्वारा प्रमाणित प्रयोगशाला में किया गया, जो मुख्य रूप से संबधित भारतीय मानकों (आईएस 13688:1999) और पैक किये हुए पाश्चुरीकृत दूध के लिए एफएसएस नियम 2011 पर आधारित था, जहाँ इस श्रेणी में दूध के वसा की न्यूनतम मात्रा की उपस्थिति के आधार पर होता है। यहाँ फूल क्रीम दूध का अर्थ है भैंस या गाय के दूध का मिश्रण या एक ऐसा उत्पाद जो दोनों के मिश्रण से तैयार किया गया हो, फूल क्रीम दूध पाश्चुरीकृत होगा तो उसका फोस्फेट परीक्षण नकारात्मक होगा। वह साफ, बेहतर और स्वच्छ डिब्बे में सही तरीके से सीलबंद होगा ताकि उसे संक्रमण से बचाया जा सके। फोस्फेट परीक्षण क्षारीय फोस्फेट (एएलपी) एक एंजाइम है जो प्राकृतिक रूप से सभी कच्चे दूध में मौजूदा रहता है और यह सही तरीके से पाश्चुरीकृत किये हुए दूध का संकेत भी होता है। पूरी तरह से पाश्चुरीकरण एंजाइम को निचले स्तर तक निष्क्रिय कर देगा जिसका पता पारम्पिरक तरीकों से उगाया जायेगा। क्योंकि एएलपी की ऊष्मा स्थिरता दूध में उपस्थित संभावित रोगजनक जीवाणुओं से अधिक है, एंजाइम उत्पाद की सुरक्षा के सूचक के रूप में काम करता है। हालाँकि एएलपी की प्रक्रिया का पता लगाने में असफलता उत्पाद को रोगजनक जीवाणुओं से मुक्त को सुनिश्चित नहीं करता है। पैक किये हुए दूध को वसा और ठोस –वसा नही (एसएनएफ) के तत्वों के अनुसार निम्नलिखित रूप में श्रेणीबद्ध किया जाता है: ए) फूल क्रीम दूध: वसा 6.0% एसएनएफ 9% (न्यूनतम) बी) टोंड दूध: वसा 3.0% एसएनएफ 8.5 % (न्यूनतम) सी) डबल टोंड दूध: वसा 1.5% और 9% (न्यूनतम) पाश्चुरीकरण: पाश्चुरीकृत का मतलब है अलग-अलग श्रेणी के दूध के प्रत्येक कण को कम से कम 63 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया होगा और इस तापमान पर लगातार कम से कम 30 मिनट तक रखा गया घो या कम से कम 71.5 डिग्री सेल्सियस पर गर्म किया गया हो और इस तापमान पर लगातार 15 सेकेण्ड के लिए रखा गया हो या प्रमाणित तापमान-समय का संयोजन जो फोस्फेट परीक्षण को नकारात्मक कर सके। परीक्षित ब्रांड हमने फूल क्रीम के पैकेट वाले दूध के 12 लोकप्रिय ब्रांड खरीदे, जिसमें दूध की वसा, वसा रहित दूध का ठोस रूप, कोलेस्ट्रोल, मिलावट और कैल्शियम आदि मापदंडों के आधार पर परीक्षण कराया। बाद में इन ब्रांड्स का परीक्षण जीवाणु तत्व संबधी और सवेंदी (ओर्गेनोप्लास्टिक) परीक्षणों के अलावा, न्यूट्रीलाइजर, अपमार्जक, यूरिया, कास्टिक सोडा, फोर्मेल्डहाइड और मेलामाइन की मिलावट के लिए भी किया गया। ऐसा माना जाता है कि दूध में वसा तत्व की मात्र के साथ-साथ वसा रहित ठोस दूध (एसएनएफ) की मात्रा भी अधिक होती है, जो की दूध की गुणवत्ता का सूचक होता है। दूध खराब हो जाने वाला उत्पाद होता है और यदि 8 डिग्री से कम तापमान से संग्रहित नहीं किया जाता है तो ख़राब होने का डर रहता है। इसलिए जीवाणु-तत्व संबधी संक्रमण से बचाने के लिए उपयोग करने से पहले उबाल लेना चाहिए। रैंक 100 में से प्राप्त कुल नक् (राउडिंड ऑफ़) ब्रांड मूल्य (500 मिली रूपये) निर्माता/विक्रेता) 1 88 पराग गोल्ड 24 पराग डेयरी, नोएडा 1 88 वेरका गोल्ड 23 रोपड जिला राहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड, दूध संयंत्र, एसएएस नगर (मोहाली), पंजाब 1 88 पारस 24 वीआरएस फूड्स लिमिटेड, साहिबाबाद उत्तरप्रदेश 2 87 मदर डेयरी 24 मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजिटेबल्स लिमिटेड, दिल्ली 3 86 रिलायसं डेयरी लाइफ 24 रिलायसं डेयरी फूड्स लिमिटेड मनकोली थाने लिमिटेड,महाराष्ट्र 3 85 मधुसुदन 24 क्रीमी फूड्स लिमिटेड, खुर्जा, बुलंदशहर, उत्तरप्रदेश 4 85 गोपालजी आनंदा 24 गोपालजी डेयरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, सियाना, बुलंदशहर, उत्तरप्रदेश 4 85 अमूल गोल्ड 24 गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ लिमिटेड, आनन्द गुजरात 4 85 गोकुल 24 कोल्हापुर जिला सहकारी दुग्ध उत्पाद संघ वाशी, नवी मुंबई 5 85 सरस गोल्ड 24 अलवर डेयरी, अलवर जिला दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड, अलवर, राजस्थान 5 84 डीएमस 24 दिल्ली दुग्ध योजना, नई दिल्ली 6 83 वीटा गोल्ड 24 बल्लभगढ़ सहकारी दुध उत्पादक संघ लिमिटेड, बल्लभगढ़ फरीदाबाद, हरियाणा मुख्य निष्कर्ष - परीक्षित ब्रांडों के बीच पराग, वेरका और पारस ने सबसे अधिक अंक हासिल किए। - दूध के परीक्षित 12 ब्रांड में से 9 ब्रांड ऐसे थे जो जीवाणु-तत्व के कारण सीधे उपयोग( बिना उबालें) के लिए असुरक्षित माने गये क्योंकि उनमें कुल प्लेट काउंट का स्तर काफी अधिक था। तीन ब्रांड-मधुसूदन, रिलायंस और वीटा-आवश्यक (30,000/ग्राम से नीचे) कुल प्लेट काउंट पर पर खरे उतरे। - भारतीय खाद्य सुरक्षा एंव मानक प्राधिकरण (एफएसएसआईए) ने जीवाणु-तत्व संबधी मानक की अनुमति केवल प्लांट (कारखाना) स्तर पर दी है। यह आवश्यकता विक्रेताओं के स्तर भी लागू होना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को सुरक्षित उत्पाद मिल सकें। - उपभोक्ताओं को यह सलाह दी जाती है कि दूध के ऐसे पैकेट ना खुले में रखें हों। वो ऐसे विक्रेताओं से ही इसे खरीदें जो इन्हें डीप फ्रीजर/रेफ्रीजरेटर में रखते हों। - पैकेट वाले दूध के सभी ब्रांड न्यूट्रीलाइजर, अपमार्जक, कास्टिक सोडा, यूरिया, फोर्मेल्डहाइड और मेलमाइन की मिलावट से मुक्त पाए गये। किसी भी प्रकार के कृत्रिम दूध के अंश नहीं पाए। किसी भी ब्रांड में ऑक्सीटोसिन नहीं पाया गया। - अधिकाँश ब्रांडों में स्तरीय वसा तत्व पाए गये जो केवल न्यूनतम आवश्कता 6% वसा और 9% एसएनएफ को पूरा कर रहे थे। परीक्षण परिणाम भौतिक रासायनिक मानकों के लिए मिल्क फैट। मिल्क सोलिड्स नॉट फैट। कोलेस्ट्रोल। आर.एम् वैल्यू। बी.आर रीडिंग। सैचुरेटिड फैट। कैल्शियम। विटामिन ए। मिल्क फैट। दूध का वसा तत्व का भाग जो मक्खन से बना है उसके बराबर है। भारतीय मानक और एफएस नियमों, 2011 के अनुसार फूल क्रीम दूध में वसा तत्व 6% से कम नहीं होना चाहिए। - सभी ब्रांड वसा तत्व के लिए आवश्यक न्यूनतम आवश्यकता को पूरा करते हैं। - वेरका (6.69%) और गोकुल (6.60%) पाई गई। गोपालजी आनंदा (6.0%) जो केवल आवश्यकता को पूरा करता है। मिल्क सोलिड्स नॉट फैट दूध में दो भाग होते हैं: वसा और ठोस जो वसा नहीं होता (एसएनएफ) ठोस जैसे विटामिन, लवण प्रोटीन और लैक्टोज आपस में मिलाकर एसएनपफ का निर्माण करते है। एसएनफ दूध का सवसे अधिक आवश्यक भाग है। भारतीय मानकों और एफएसएस नियमों के अनुसार यह 9% से कम नहीं होना चाहिये। - मदर डेयरी में एसएनपफ (8.96%( और सरस (8.98%) मामूली रूप से आवश्यक न्यूनतम मात्रा से कम थे। बाकी अन्य ब्रांड ने एसएनपफ न्यूनतम आवश्यकता को पूरा करते हैं। - रियालंस (9.80%) में सबसे अधिक एसएनपफ पाया गया, इसके बाद पाया गया, इसके बाद पराग (9.65%) और वीटा (9.30%) स्थान आटा है। कोलेस्ट्रोल कई जैव रासायनिक प्रक्रियाओं में कोलेस्ट्रोल आवश्यक भूमिया अदा करता है, लेकिन इसे बेहतर तरीके से हृदय रोगों के संबध में जाना जाता है। कोलेस्ट्रोल खासकर ख़राब या बैंड कोलेस्ट्रोल (निम्न घनत्व वाले लिपोप्रोटीन, एलडीएल) तंत्रिका तंत्र की समस्याओं, मष्तिक अंतरग्रर्थी संयोजन, पित्ताशय की थैली की पथरी (गॉल ब्लैडर स्टोंस) और शायद कैंसर के खतरे को भी बढ़ाने का काम करते हैं। यह कोलेस्ट्रोल स्वाभाविक रूप से दूध के वसा में पाया जाता है। कोलेस्ट्रोल एक दिन में 300 मिलीग्राम से अधिक नहीं लेना चाहिए। - पारस (6.48 मिलीग्राम/100 ग्राम) में सबसे कम कोलेस्ट्रोल तत्व पाए गये, इसके बाद सरस (8.10 मिलीग्राम/100 ग्राम)और वेरका (8.87 मिलीग्राम/100) का स्थान आता है। - डीएमएस (13.63 मिलीग्राम/100ग्राम) सर्वाधिक कोलेस्ट्रोल पाया गया, इसके बाद अमूल (12.48 मिलीग्राम/100ग्राम) और मधुसुदन (11.72 मिलीग्राम/100ग्राम) का स्थान आता है। रिचर्ट मिसल (आरएम) वैल्यू रिचर्ट मिसल (आरएम) वैल्यूपरीक्षण से मिलावट का पता चलता है, यदि कोई है तो। - सभी ब्रांडों में आवश्यक न्यूनतम मात्रा जो दूध की वसा की गुणवत्ता तय करती है उससे अधिक पाई गई। बीआर रीडिंग इस परीक्षण में दूध की वासा में मिलावट का पता चलता है। खासकर दई वनस्पति तेलों की मिलावट की गई हो तो उसमें बाहर से मिलाई गई वसा पता लगता है। - सभी ब्रांड में बीआर रीडिंग निर्धारित सीमा में पाई गई। भौतिक रासायनिक मापदंड भारांक (%में) पराग गोल्ड वेस्का गोल्ड पारस मदर डेयरी रिलायस डेयरी लाइफ मिल्क फैट 15 11.28 12.57 10.71 12.24 11.10 मिल्क सोलिड्स नॉट फैट 12 10.95 0.03 9.06 8.88 11.40 कोलेस्ट्रोल 8 6.21 6.53 7.41 6.50 5.39 आरएम) वैल्यू 5 4.39 4.40 4.45 4.47 4.42 बीआर रीडिंग 5 3.69 3.69 3.90 3.96 3.57 सैचुरेटिड फैट 5 3.46 4.18 3.34 3.02 3.30 कैल्शियम 6 5.36 4.49 5.48 3.98 3.68 विटामिन ए 4 3.07 3.42 3.56 3.47 3.41 सैचुरेटिड फैट (संतृप्त वसा) संतृप्त वसा दूध में प्राकृतिक रूप से मौजूदा वसा है। ये मुख्य रूप से पशु आधारित वसा है जैसे दूध वसा, घी और मक्खन। एक औसत व्यक्ति के लिए संतृप्त वसा के प्रतिदिन लेने की मात्रा 8 से 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए। अधिक मात्रा में संतृप्त वसा वसा लेने से रक्त में खराब कोलेस्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती है और सामान्य तौर पर यह माना गया है कि एलडीएल का उच्च स्तर हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा देता है। - अन्य ब्रांड की तुलना में वेरका (3.52%) में सबसे कम संतृप्त वसा तत्व पाया गया. इसके बाद गोकुल (3.90%) का स्थान आता है। मधुसुदन (5.0%) में सबसे अधिक संतृप्त वसा पाई गई । कैल्शियम कैल्शियम मजबूत, सघन हड्डियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और हड्डियों को सेहतमंद बनाये रखने का काम करता है। कैल्शियम की कमी से सुखंडी (रिकेट्स) अरु हड्डियों की कमजोरी (ओस्टियोपोरोसिस) को बढ़ावा देती है। दूध कैल्शियम के बेहतर स्रोत के रूप में जाना जाता है इसलिए आशा की जाती है कि ये कैल्शियम तत्वों से भरपूर होगा। पारस (168.19) में सबसे अधिक कैल्शियम पाया जाता है, इसके बाद पराग (166.२) और गोकुल (164.08) का स्थान आता है। विटामिन ए विटामिन ए अच्छी सेहत के लिए जरूरी माना जाता है विशेषकर आँखों, त्वचा , रोग प्रतिरोधक कार्यप्रणाली, प्रजनन और हड्डियों के विकास के लिए। दूध विटामिन ए का अच्छा स्रोत माना जाता है। - गोपालजी आनंदा (२.11 मिग्रा/किग्रा), में सबसे अधिक विटामिन ए तत्व पाए गए इसके बाद पारस (1.88 मिग्रा/किग्रा) और मदर डेयरी (1.76 मिग्रा/किग्रा) का स्थान आता है। - वीटा और सरस में विटामिन ए नहीं पाया गया। भारी धातु भारी धातुओं में अपेक्षाकृत उच्च घनत्व होता है, और उच्च सांद्रता पर ये विषैले हो सकते हैं। वॉयस सोसायटी ने दूध को सीसा, तम्बा, आर्सेनिक (संख्या) जस्ता, टिन, जिंक और कैडमियम तत्वों के लिए विशलेषण किया। एफएसएस नियमों के अनुसार सीसे की मात्रा २ पीपीएम, तांबा 30 पीपीएम, आर्सेनिक 0.1 पीपीएम, टिन 250 पीपीएम, जिंक 50 पीपीएम और कैडमियम 1.5 पीपीएम से अधिक नहीं होना चाहिए। सीसा, आर्सेनिक, टिन और कैडमियम किसी भी ब्रांड में नहीं पाया गया। कुछ ब्रांड में जिंक और तांबा पाए गये लेकिन अधिकतम निर्धारित सीमा से काफी कम। कुल मिलकर सभी ब्रांड भारी धातुओं के इस परीक्षण में सफल रहे। मधुसूदन गोपालजी आनंदा अमूल गोल्ड गोकुल सरस गोल्ड डीएमएस वीटा गोल्ड 12.45 10.50 11.97 12.30 10.53 11.14 10.86 9.18 9.30 9.00 9.54 6.94 9.15 9.90 5.31 5.86 5.02 5.78 6.72 4.55 6.12 4.66 4.40 4.70 4.43 4.40 4.43 4.43 3.87 3.66 3.75 3,69 4.32 3.39 3.87 3.00 3.36 3.08 3.88 3.38 3.34 3.44 4.11 3.97 4.28 5.10 4.94 4.73 3.64 3.17 3.89 3.10 2.88 0.08 2.94 0.80 सूक्ष्मजीवविज्ञानी गतिविधि के लिए कुल प्लेट काउंट/मिथाइलीन ब्लू रिडक्शन टाइम दूध में सूक्ष्मजीव संक्रमण बहुत बड़ा मुद्दा है। सुक्ष्मजीवी कई प्रकार के खाद्य जनित बीमारियों के लिए जिम्मेदारी होते हैं। हमने कुल कुल प्लेट काउंट/मिथाइलीन ब्लू रिडक्शन टाइम के लिए परीक्षण(एमबीआरटी) के लिए परीक्षण करवाया। यह परीक्षण खुदरा विक्रेता से खरीदे गए पोली-पैक दूध पर किया गया। यह ध्यान देने योग्य बात हो सकती है एफएसएसएआई ने केवल संयंत्र (कारखाना) के स्तर पर आवश्यकता निर्धारित की है, खुदरा विक्रय स्तर पर कोई आवश्यकता निर्धारित नहीं की गई है। कुल प्लेट काउंट कालोनी-गठन इकाईयां (सीएफयु)/मिलीलीटर दूध के नमूने में सूक्ष्मजीवी, फंगस और खमीर की गणना करता है जोकि वायुजीवी स्थितियों में बढ़ते हैं। एफएसएस अधिनियम के नुसार कुल प्लेट काउंट संयत्र स्तर पर 50,000 सीएफयू/ग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। - मधुसूदन, रिलायंस और वीटा टीपीसी ने टीपीसी की आवश्यकता को पूरा करता है। - अन्य ब्रांड किल प्लेट काउंट की आवश्कता को पूरा नहीं करते है। गोकुल (7,200.000 सीएफयू/मिली लिटर) में अधिकतम किल प्लेट काउंट पाया गया, इसके बाद वेरका (7,200.000 सीएफयू/मिली लिटर) का स्थान आता है सूक्ष्मजीव गणना (जो कि कुल प्लेट काउंट है) का स्तर काफी अधिक देखते हुए सीधे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए जब तक पयार्प्त न उबाला जाए। दूध में सूक्ष्मजीवों का निर्धारत मात्रा से अधिक मिलने की वजह संयंत्र से खुदरा विक्रेताओं तक कोल्ड स्टोरेज और परिवहन के दौरान शीत शृंखला (कोल्ड चें) पालन ना किया गया हो। इससे पहले 2011 में किये गए अध्ययन में भी समान परिणाम पाए गए थे। सभी ब्रांड सफल रहे - सभी ब्रांड फास्फेट परीक्षण में सफल रहे। - दूध के सभी ब्रांड न्यूट्रीलाइजर डिटर्जेंट कास्टिक सोडा, यूरिया, फोर्मोर्लिन और मेलामाइन की मिलावट से मुक्त पाए गये। उनहोंने भारतीय मानक अरु एफएसएस नियमों की आवश्यकता को पूरा किया। - किसी भी ब्रांड में ओक्सीटोक्सिन नहीं पाया गया। (ओक्सीटोक्सिन के इंजेक्शन दूध दुहने से पहले गाय या भैंस को लगाया जाता है। ओक्सीटोक्सिन दूध की मात्रा को नहीं बढ़ाता लेकिन उसकी धार को तेज कर देता है) मिथाइलीन ब्लू रिडक्शन टाइम (एमबीआरटी) घंटों में मिथाइलीन ब्लू रिडक्शन टाइम दूध में सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को जांचने के लिए एक सूचक परीक्षण है। भारतीय मानक के अनुसार, एमबीआरटी जांचने के लिए दूध के लिए समय पांच घंटे से कम न हो। - गोकुल को छोड़कर सभी ब्रांड ने एमबीआरटी की आवश्यकता को पूरा किया। संवेदी गुणों के लिए उत्पाद को समिति के सदस्यों द्वारा मानकों पर परखा गया जिसमें रंग और दिखावट, सुगंध, गंध और स्वाद आदि थे। अन्य सभी चीजों के साथ, दूध निलबिंत कणों, गंदगी और बाहरी तत्वों से मुक्त होना चाहिए। उसमें बासी, अम्लीय अन्य असामान्य गंध नहीं होना चाहिए। दूध में पके हुए, अम्लीकरण, बासी, धातुई या न्यूट्रीलाइजर की गंध नहीं होनी चाहिए। मिलावट और अन्य योजक के कारण उसे किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक सुगंध से मुक्त होना चाहिए। दूध को पानी जैसी, लसदार और दही जैसी बनावट से मुक्त होना चाहिए। - सभी ब्रांड ने संवेदी परीक्षण में बेहतर प्रदर्शन किया। पैकिंग और मार्किंग दूध अच्छी गुणवत्ता वाले पॉली में पैक होना चाहिए ताकि उसके प्राकृतिक गुण इस्तेमाल करने की समय सीमा तक बरकरार रहे। दूध के पैकेट पर निम्न चीजें चिहिन्त होनी चाहिए। ए) उत्पाद का नाम और प्रकार पहले अंकित हो जैसे टोंड, फूल क्रीम, आदि। बी) निर्माता यूनिट/पैक करने वाले और उत्पादक का नाम और पूरा पता सी) बैच या कोड संख्या डी) लीटर/मिलीलीटर में कुल मात्रा ई) कब तक प्रयोग करना है उसकी तिथि पफ) कुल खुदरा मूल्य जी) स्टोर करने के दिशा-निर्देश एच) प्रति 100 मिलीलीटर में पोषक तत्व की जानकारी आई) उपभोक्ता की शिकायत की स्थिति में नाम, पता , टेलीफोन नबर, व्यक्ति/दफ्तर का ईमेल पता। - सभी ब्रांड सही तरीके से पॉली पैक थे। - सभी ब्रांड ने अपने पैकेट पर आवश्यक सारी जानकारी डे रखी थी। - केवल मधुसुदन पर हरा बिंदु बना हुआ था- हालाँकि, या अनिवार्य आवश्यकता नहीं है। समय सीमा की जानकारी पश्च्युरीकरण पश्च्युरीकरण खाद्य, विशेषकर तरल, को एक विशेष तापमान पर एक तय समय सीमा तक गर्म करने और तुरंत उसे ठंडा करने की प्रक्रिया है। यह खाद्य में सूक्ष्मजीवों की वृद्धि की प्रक्रिया को कम करता है। कीटाणुशोधन से अलग, पश्च्युरीकरण का लक्ष्य खाद्य में सभी सूक्ष्मजीवों को मारना नहीं है। इसके बदले पश्च्युरीकरण का लक्ष्य वृद्धि करने वाले रोगजनकों की संख्या को कम करना है जो कि बीमारियों (ऐसा माना जाता है कि पश्च्युरीकरण उत्पाद जिस प्रकार दर्शाया गया है वैसे ही संग्रहित किया गया है और उसे उपयोग की अवधि खत्म होने से पहले इस्तेमाल करना है) का कारण बनते हैं। पश्च्युरीकरण आमतौर पर दूध से संबधित होता है। यही वजह है दूध के इस्तेमाल करने की बढ़ी हुई अवधि दो से तीन हप्ते करने के लिए रेफ्रेजिरेटर में रखने की जरूरत होती है। आजकल पश्च्युरीकरण करने के दो मुख्य प्रकार हैं: एचटीएसटी और उपयोग करने की तिथि या अवधि को बढ़ाने (ईएसएल) का उपाय। एचटीएसटी प्रक्रिया में दूध को धातु की प्लेट या पाइप के जरिए भेजा जाता है बाहर से गर्म पानी की जरिए गर्म किया जाता है और उसे 7.17 डिग्री सेल्सियस (161 डिग्री फारेनहाइट) पर 16-20 सेकेण्ड के लिए गर्म किया जाता है। ईएसएल में सूक्ष्मजीवों के निथारने का चरण होता है और पहले कम तापमान फिर अत्यधिक उच्च तापमान (यूएचटी)। कीटाणुशोधन कीटाणुशोधन किसी भी उस प्रक्रिया को कहेंगे जिसमें खाद्य, तरल आदि में मौजूद संक्रामक कारकों (जैसे फंगी, जीवाणु, विषाणु, बीजाणु रूप आदि) सहित किसी भी रूप के सभी जीवित तत्वों को निकाल (हटा) यह मार सकता है। दूध को अधिक तापमान पर लम्बे समय तक रखने के लिए उसका कीटाणुशोधन करना जरूरी है। दूध को गर्म करने के पारपरिक प्रक्रिया में उसे 114-120 डिग्री सेल्सियस पर 20-30 मिनट के लिए गर्म करना शामिल है। अभी हाल ही में यूएचटी प्रक्रिया प्रस्तुत की गई है। जब यूएचटी को कीटाणुशोधन संचालन और डिब्बबद तकनीक (जैसे की सइन रोकने वाली पैकेजिंग) के साथ शामिल किया जाए तो बिना रेफ्रीजरेटर के 6 से 9 महीने तक संग्रहित किया जा सकता है। यूएचटी प्रक्रिया में दूध को 135 डिग्री सेल्सियस (275 डिग्री फारेनहाइट ) पर कम से कम एक सकेंड के लिए रखा जाता है। आमतौर पे दूध पर पश्च्युरीकरण अंकित है तो उसे यूएचटी प्रक्रिया द्वारा शोधन किया गया है। सूक्ष्मजीव सूक्ष्मजीव शब्द सूक्ष्मतापूर्वक छोटे जीवित जीवों के लिए लागू होता है। हम सूक्ष्मजीवों की बीमारियों के साथ जोड़कर देखते हैं। सूक्ष्मजीव रोगजनक कहलाने वाले बीमारी का कारण होते हैं। हलांकि, कुछ सूक्ष्मजीव रोगजनक होते हैं और सूक्ष्मजीव हमारे ग्रह के जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, वो मछलियों को भोजन उपलब्ध कराते है, वो मिट्टी में प्रकट होते हैं जहाँ वो पौधों को पोषण प्रदान करते हैं, और जुगाली करने वाले पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। डेयरी उद्योग में कुछ सूक्ष्मजीव नुकसानदयाक (उदाहरण के लिए, जीव, रोगजनक जीव) होते हैं, हांलांकि अन्य फायदेमंद (मुख्य भोजन के पहले का खाद्य चीज और दही को नियंत्रित रूप से किव्वन करने के लिए खमीर और फुफुंद का प्रयोग होता है) होते हैं। अधिकांशतः डेयरी उद्योग में जीवाणु, खमीर, फुफुन्द और विषाणुओं से सामना किया जाता है। जीवाणु वृद्धि (ए) तापमान, (बी) पोषक तत्वों की उपस्थिति (सी) पानी की आपूर्ति (डी) ऑक्सीजन की आपूर्ति और (ई) माध्यम की अम्लता से प्रभावित होते हैं। एक स्वस्थ गाय से प्राप्त ताजा दूध में कुछ जीवाणु होते है लेकिन रख-रखाव के दौरान जीवाणुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। दूध एक आर्दश खाद्य है और कई जीवाणु आसानी से इसमें वृद्धि कर जाते हैं। इंसानों के लिए पोषक खाद्य होने के साथ ही, दूध सूक्ष्मजीवों को वृद्धि करने के लिए अनुकूल वातावरण देता है। खमीर, फुफुंद और बड़ी संख्या में दूध में जीवाणु वृद्धि कर सकते हैं, खासकर 16 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर। ताजा निकाले गये दूध का तापमान 38 डिग्री सेल्सियस होता है। यदि इस तापमान पर रखा जाए तो इसमें जीवाणु तेजी से बढ़ते है और दूध खट्टा हो जाता है। सूक्ष्मजीव गाय, हवा, भोजन सामग्री दूध दुहने वाले उपकरणों और दूध दुहने वाले के जरिये प्रवेश कर सकता है। एक बार सूक्ष्मजीव दूध में प्रवेश कर जाते हैं तो उनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है। एक बार दूध में सूक्ष्मजीवों का प्रवेश हो जाए तो उसे नियंत्रित करने से अधिक सूक्ष्मजीवों को पहले ही निकाल देना अधिक प्रभावशाली है। दूध निकालने वाले उपकरणों को इस्तेमाल करने से पहले और उसके बाद सही तरीके से धो लेना चाहिए केवल खंगालना पयार्प्त नहीं है। दूध को ठंडा करके सूक्ष्मजोवों की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है। अधिकांश सुक्ष्मजीव ठंडे वातावरण में धीरे-धीरे पनपते हैं। दूध को ठंडा करने से रासायनिक गिरावट भी धीमी हो जाती है। हमारी सलाह - उपयोग करने की अधिकतम समयसीमा सुनिश्चित करने के लिए पॉली पैक दूध को 8 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान में रखें। - पॉली पैक दूध को उबालने के बाद ही उपयोग में लाएं। इससे दूध में उपस्थित सूक्ष्मजीवी नष्ट हो जाते हैं। - कच्चे दूध को जितना हो सके उबाल लें। - टेट्रा पैक दूध कीटाणुशोधक होता है, जिसके सभी सूक्ष्मजीवी नष्ट कर दिए जाते हैं। यह सुरक्षित होता है और इसे उबालने की आवश्यकता नहीं होती है। कई उपभोक्ताओं के लिए यह मंहगा हो सकता है। दूध को उबालना अमेरिकी विज्ञान पत्रिका द जर्नल ऑफ़ अमेरिकन साइंस में प्रकाशित एक अध्ययन में यह बताया गया है कि दूध को कैसे उबालना चाहिए: केवल दो मिनट तक दूध को उबालने से यह उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित हो जाता है। बड़ी संख्या में लोग दूध को बार-बार उच्च तापमान पर उबालते रहते हैं, ऐसा करने से उसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दूध को कम गरम करने से उसके पोषक तत्व बने रहते हैं। विशेषज्ञों का यह भी कहना है की दूध को दो बार से ज्यादा और दो-तीन मिनट से अधिक नहीं उबालना चाहिए। क्या प्राकृतिक या कच्चे खाद्य पदार्थ, प्रसंस्कृत भोज्य पदार्थ से श्रेष्ठ होते हैं? अधिकांश लोगों का मानना है की ऐसे खाद्य पदार्थ कम या बिना प्रसंस्कृत के बनाए जाते हैं, स्वास्थ्य के लिए श्रेष्ठ होते हैं। कई लोगों का तो यह भी मानना है कि छोटे या स्थानीय खेत उत्तम और स्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों का स्रोत होते हैं। हलांकि स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कुछ प्रकार के प्रसंकरण आवश्यक होते हैं। उदाहरण के लिए, उपभोक्ता सुरक्षा के लिए कच्चे मांस, कुक्कट और मछलियों को पकाकर ही खाते है। इसी प्रकार से दूध में मौजूद जीवाणुओं को मारने के लिए उसे पश्च्युरीकृत किया जाता है। पश्च्युरीकरण के बाद भी दूध में अधिकांश पोषक तत्व रहते हैं। क्या कच्चा दूध पीने से अस्थमा, एलर्जी, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है? नहीं। कच्चा दूध पीने से स्वास्थ्य को कोई लाभ नहीं होता है (जिस दूध को जीवाणु नाश के लिए पश्च्युरीकृत न किया गया हो) जब तक कि उसे पश्च्युरीकृत नहीं किया जाता है तब तक वह बिमारी वाले जीवाणुओं से मुक्त नहीं होता है। दूध के पश्च्युरीकरण की प्रक्रिया में ऐसे किसी जीवाणु के बारे में जानकारी नहीं मिली है, जिनसे खतरनाक बीमारियाँ, एलर्जी, विकासत्मक अथवा व्यवहारगत समस्याएँ आती हों। दूध में पश्च्युरीकरण कैसे काम करता है? पश्च्युरीकरण वह प्रक्रिया है, जिसमें दूध को तब तक उच्च तापमान पर गर्म किया जाता अहि, जब तक कि उसमें उपस्थित बिमारी वाले जीवाणुओं का नाश न हो जाए। समान्यतः तौर पर कहें तो, पश्च्युरीकरण में दूध को कम समय के लिए उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसमें बीमारी फैलाने वाले हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते है। इसका आविष्कार तब हुआ जब कच्चे दूध की वजह से क्षयरोग, स्कर्लिट ज्वर और मियादी बुखार जैसे रोगों की वजह से लाखों लोग बीमार होने लगे और मौतें होने लगीं। इन रोगों का संक्रमण कच्चे दूध से हुआ था। कच्चे दूध में कई जीवाणु होते है, उनमें से कई हानिकारक होते हैं। इसलिए यदि आप सोचते हैं की कच्चा दूध अच्छे जीवाणुओं के स्रोत हैं, तो ऐसा नहीं है। इसमें हानिकारक जीवाणु भी होते है, जो आपको स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, तो उन्हें ऐसे खाद्य पदार्थों से ग्रहण करिए, जिनसे खतरा न हो। उदाहरण के लिए, तथाकथित रूप से प्रोबायोटिक जीवाणु की पश्च्युरीकरण के दौरान दही जैसे कुछ खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है। दूध दूषित के कारण दूध इन कारणों से दूषित होता है: - गाय के थनों में संक्रमण के कारण - गाय की बीमारियाँ (गौजातीय टीबी) - गाय की त्वचा पर जीवाणु - वातावरण (उदाहरण के लिए, मल, धुल, प्रसंकरण उपकरण) - कीट, चूहे और पशुओं की अन्य बीमारियाँ - मनुष्य (धुलधुसरित कपड़ों और जूतों के संपर्क में आने से) स्रोत: उपभोक्ता कार्यों के मंत्रालय, भारत सरकार