आधुनिक डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। शिक्षा से लेकर मनोरंजन तक, AI-आधारित तकनीकों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिससे हमारी उन पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। हालाँकि, इस तीव्र तकनीकी विकास के बीच AI के अंतर्निहित पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रहों और जेंडर बाइनरी सिस्टम को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है, जो समाज, विशेषकर लैंगिक समानता के लिए गंभीर चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है। यह पितृसत्तात्मक झुकाव न केवल महिलाओं, बल्कि नॉन-बाइनरी और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। AI मॉडल में लैंगिक पक्षपात और उसके आयाम AI सिस्टम में व्याप्त लैंगिक पक्षपात विभिन्न शोधों द्वारा उजागर किया गया है, जिसके समाज पर बहुआयामी प्रभाव पड़ते हैं: जैविक लिंग पर आधारित रूढ़िवादी वर्गीकरण ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट (OII) के एक हालिया शोध में GPT, RoBERTa, T5, Llama और मिस्ट्रल जैसे 16 बड़े AI मॉडलों का विश्लेषण किया गया। परिणामों से पता चला कि ये मॉडल लिंग को जैविक कारकों जैसे हार्मोन और प्रजनन अंगों (जैसे टेस्टोस्टेरोन को 'पुरुष' और गर्भाशय को 'महिला' से जोड़ना) से जोड़कर देखते हैं और उसे केवल स्त्री और पुरुष की लैंगिक बाइनरी में विभाजित करते हैं। यह दृष्टिकोण ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी समुदायों के अस्तित्व को पूरी तरह से अनदेखा करता है और उन सिसजेंडर महिलाओं को भी बाहर कर देता है जिनका गर्भाशय हटाया गया हो या जो मेनोपॉज से गुजर चुकी हों। स्वास्थ्य और व्यवहार में पूर्वाग्रह OII के शोध में 110 बीमारियों को उनके लक्षणों और लिंग के आधार पर वर्गीकृत करने का कार्य AI मॉडल्स को दिया गया। यह पाया गया कि AI मॉडल्स ने शारीरिक बीमारियों को अधिकतर पुरुषों से जोड़ा, जबकि मानसिक बीमारियों को महिलाओं और LGBTQ+ समुदाय से। यह सामाजिक रूढ़ियों को दर्शाता है जहां पुरुषों को शारीरिक रूप से मजबूत और महिलाओं/LGBTQ+ व्यक्तियों को भावनात्मक रूप से कमजोर माना जाता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में संभावित भेदभाव और गलत निदान हो सकते हैं। रोजगार और अवसरों पर प्रभाव AI में निहित लैंगिक पूर्वाग्रह रोजगार के अवसरों को भी सीमित कर सकता है। यदि AI-आधारित भर्ती उपकरण या मूल्यांकन प्रणालियाँ पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं या डेटा में निहित ऐतिहासिक पूर्वाग्रहों पर आधारित होती हैं, तो वे महिलाओं और अन्य हाशिए पर पड़े लिंगों के लिए कुछ क्षेत्रों में प्रवेश या उन्नति के अवसरों को प्रतिबंधित कर सकती हैं। यह महिलाओं के लिए नौकरियों के सीमित विकल्पों को जन्म दे सकता है, जैसा कि कुछ शोधों में भी इंगित किया गया है। निर्णय-निर्माण और सामाजिक सोच पर असर AI-आधारित वर्चुअल असिस्टेंट, चैटबॉट और रोबोट हमारी बातचीत और निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे हमारे सोचने के तरीके में भी बदलाव आ रहा है। यदि ये सिस्टम पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रहों को दर्शाते हैं, तो वे समाज में मौजूदा लैंगिक असमानताओं और रूढ़िवादिता को सुदृढ़ कर सकते हैं, जिससे समावेशी सामाजिक विकास में बाधा आ सकती है। समावेशी AI के लिए आवश्यकता AI की पितृसत्तात्मक दुनिया के खतरों को कम करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण आवश्यक है: डेवलपर्स की भूमिका: AI मॉडलों के विकास में ऐसी डेटासेट और एल्गोरिदम का उपयोग किया जाना चाहिए जो विविध लैंगिक पहचान को समझते और स्वीकार करते हों, जिसमें ट्रांसजेंडर और नॉन-बाइनरी व्यक्ति भी शामिल हों। डेवलपर्स को मॉडल के प्रदर्शन के साथ-साथ इस तरह के लैंगिक पूर्वाग्रह को कम करने के लिए भी सक्रिय रूप से प्रयास करना चाहिए। सरकारी और नियामक नीतियाँ: सरकारों और नियामक निकायों को मिलकर ऐसी नीतियाँ बनानी होंगी जो AI डेवलपर्स को उनके मॉडलों में निहित पूर्वाग्रहों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाएँ। यह भविष्य में ऐसी गलतियों की संभावना को कम करेगा और AI के नैतिक विकास को बढ़ावा देगा। जागरूकता और शिक्षा: समाज के विभिन्न वर्गों में AI के संभावित पूर्वाग्रहों और उनके प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाना महत्वपूर्ण है। शिक्षा प्रणाली में AI नैतिकता और लैंगिक संवेदनशीलता को शामिल करने से भविष्य की पीढ़ियों को अधिक समावेशी तकनीकी समाधान विकसित करने में मदद मिलेगी। समाधान की दिशा में: UN Women के अनुसार, AI में लैंगिक पूर्वाग्रह को दूर करने के लिए AI सिस्टम के विकास की शुरुआत से ही लैंगिक समानता को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। इसमें डेटा का मूल्यांकन, विविध डेटा प्रदान करना और AI विकसित करने वाली टीमों में विविधता लाना शामिल है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निहित पितृसत्तात्मक पूर्वाग्रह एक गंभीर सामाजिक चुनौती है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ तकनीकी विकास का मामला नहीं, बल्कि समावेशी मानवीय विकास का भी प्रश्न है। AI को केवल तकनीकी उन्नयन के लिए नहीं, बल्कि एक समावेशी और समान समाज के निर्माण के लिए उपयोग किया जाना चाहिए। डेवलपर्स, सरकार और समाज के सामूहिक प्रयासों से हम ऐसे AI सिस्टम का निर्माण कर सकते हैं जो सभी लैंगिक पहचानों का सम्मान करते हों और लैंगिक समानता के लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हों, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि AI का भविष्य उज्ज्वल और सभी के लिए सुरक्षित हो। स्रोत: ऑक्सफोर्ड इंटरनेट इंस्टीट्यूट (OII)