यौन/लैंगिक उत्पीड़न किसी महिला के साथ निम्नलिखित कृत्य यौन/लैंगिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है- शारीरिक संपर्क करना या ऐसा करने का प्रयास कोई अश्लील टिप्पणी या फब्तियां बोलना; अश्लील चित्र दिखाना; किसी प्रकार की यौन संबंधित मांग करना; अशोभनीय आचरण करना; किसी भी रूप में कामवासना की संतुष्टि का प्रयास करना। उपर्युक्त कृत्य निम्नलिखित किसी भी स्थान पर घटित होने पर कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 के अधीन दण्डनीय अपराध होगा। कार्यस्थल में शामिल है सार्वजनिक/निजी क्षेत्र में किसी भी कार्यस्थल जैसे सभी कार्य संस्थायें, निर्माण स्थल, फैक्ट्री, शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल एवं निजी नर्सिंग होम, मनोरंजन संस्थान आदि। रोजगार रोजगार के दौरान दौरा किया गया कोई अन्य स्थान गैर-सरकारी संस्था, उपक्रम, लोक उद्यम, संस्थान आदि आवास या मकान या असंगठित क्षेत्र सोसायटी, ट्रस्ट, गैर-सरकारी संगठन व सेवाप्रदाता सरकारी विभाग अस्पताल एवं नर्सिग होम खेल संस्थान, स्टेडियम, स्पोर्टस कॉम्पलैक्स या खेल व प्रतियोगिता स्थल पीड़िता कौन है उत्पीडित महिला घरेलू कर्मचारी महिला कर्मचारी कोई भी महिला जो कार्य स्थल पर आती है घरेलू कामगार वह महिला जो किसी घर में घरेलू कार्य के लिए नियुक्त होती है तथा पारिश्रमिक के रूप में नकद रूपये या अन्य वस्तु लेती है, चाहे वह सीधे या किसी एजेन्सी के द्वारा नियुक्त हो, घरेलू कामगार की श्रेणी में आती है। अधिनियम के मुख्य प्रावधान इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक अपराध असंज्ञेय होगा। ऐसा कोई कार्यस्थल जहां पर 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हों वहां पर प्रबन्धन द्वारा एक आंतरिक शिकायत समिति गठित की जायेगी, जिसकी अध्यक्ष महिला होगी जिससे महिला अपनी समस्या की चर्चा कर सकती हैं; समिति शिकायत प्राप्त होने के 03 माह के भीतर अपनी छानबीन पूरी कर रिपोर्ट देगी; रिपोर्ट के आधार पर 02 माह के अन्दर कार्यवाही की जानी होगी; शिकायत समिति की अनुशंसा द्वारा अपना या उत्पीड़क के स्थानान्तरण का अधिकार; शिकायत समिति से मुआवजे की मांग का अधिकार, यदि कोई प्रबन्धन शिकायत समिति का गठन नहीं करता तो उस पर रू. 50 हजार का जुर्माना हो सकता है। तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। घरेलू कर्मचारी से शिकायत मिलने पर यदि स्थानीय कमेटी को शिकायत सही लगती है तो आई.पी.सी. की धारा 50 के तहत पुलिस को केस दर्ज करने के लिए भेज सकती है। शिकायत एवं जांच प्रक्रिया को सार्वजनिक करना या उसके बारे में प्रेस को किसी रूप में सूचित करना पूरी तरह से गैर कानूनी है। शिकायत कौन दर्ज करा सकता है स्वयं और यदि शारीरिक रूप से अक्षम हैं तो किसी अन्य के माध्यम से (मित्र, साथी कामगार, राज्य महिला आयोग के किसी अधिकारी द्वारा या जो घटना का जानकार हो) के द्वारा पीड़ित की लिखित सहमति के बाद शिकायत दर्ज करायी जा सकती है; यदि पीड़ित महिला मानसिक रूप से अक्षम (पागल) है तो कोई भी व्यक्ति जो घटना के बारे में जानता हो शिकायत दर्ज करा सकता है; यदि पीड़ित महिला की मृत्यु हो जाती है तो उसके कानूनी वारिस या कानूनी वारिस की लिखित सहमति के बाद शिकायत दर्ज करायी जा सकती है। शिकायत कब तक दर्ज करायी जा सकती है घटना होने के दिन से लेकर 03 महीने तक पीड़िता अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैं; आन्तरिक कमेटी या स्थानीय कमेटी उचित कारण होने पर अतिरिक्त 03 महीने की समय सीमा बढ़ा सकती है। अधिनियम के अन्तर्गत दण्डात्मक प्रावधान इस अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन करने पर या उल्लंघन करने का प्रयत्न करने पर निम्नलिखित सजा होगी प्रथम बार अपराध करने पर रू. 50000/- तक का जुर्माना; उसी अपराध को दुबारा करने पर प्रथम जुर्माने के दोगुने जुर्माने से दण्डित किये जाने का प्रावधान है। शिकायत किससे और कहाँ करें यदि कार्यस्थल की आंतरिक समिति गठित है तो उससे लिखित शिकायत करें; अपने क्षेत्र के जिलाधिकारी से अथवा जिले में स्थानीय शिकायत कमेटी अथवा ब्लाक, तहसील में नियुक्त नोडल अधिकारी से; नोडल अधिकारी शिकायत को 07 दिनों के अन्दर स्थानीय कमेटी को जांच हेतु भेजेंगे; यदि आंतरिक समिति नहीं है अथवा शिकायत मालिक के खिलाफ है तो शिकायत स्थानीय शिकायत कमेटी को लिखित में दी जायेगी। तहसील, जिला, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क परामर्श/विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यदि शिकायतकर्ता लिख नहीं सकती तो शिकायत कमेटी के किसी सदस्य द्वारा लिखित शिकायत करने में पीड़िता की मदद की जानी चाहिए। उपरोक्त में किसी से भी, स्वयं, माता-पिता या अन्य रिश्तेदार या सरकार द्वारा मान्य कोई समाज सेवी संस्था के माध्यम से शिकायत दर्ज करायी जा सकती है या फिर टोल फ्री नं. पर कॉल कर सकते हैं। टोल फ्री/हेल्पलाइन नम्बर समाधान शिकायत निवारण प्रकोष्ठ 18001805220 वूमेन्स पावर लाइन 1090 पुलिस 100 निःशुल्क विधिक सहायता 18004190234, 15100 स्त्रोत: दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, उत्तर प्रदेश