<div id="MiddleColumn_internal"> <h3 id="-" style="text-align: justify;">यह लेख किस विषय के बारे मैं है?</h3> <p style="text-align: justify;">महिलाओं के प्रति हिंसा एक बहु-आयामी मुद्दा है जिसके – सामाजिक,निजी, सार्वजानिक और लैंगिक पहलू हैं। एक पहलू से निपटें तो तुरंत ही दूसरा पहलू नज़र आने लगता है। घरेलू हिंसा महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा का एक जटिल और घिनौना स्वरूप है।</p> <p style="text-align: justify;">घरेलू हिंसा की घटनाएं कितनी व्यापक हैं, यह तय कर पाना मुश्किल है। यह एक ऐसा अपराध है जो अकसर छुपाया जाता है, जिसकी रिपोर्ट कम दर्ज़ की जाती है, और कई बार तो इसे नकार दिया जाता है। निजी रिश्तों में घरेलू हिंसा की घटना को स्वीकार करने को अकसर रिश्तों के चरमराने से जोड़ कर देखा जाता है। समाज के स्तर पर घरेलू हिंसा की हक़ीक़त को स्वीकार करने से यह माना जाता है कि विवाह और परिवार जैसे स्थापित सामाजिक ढाँचों में महिलाओं की ख़राब स्थिति को भी स्वीकार करना पड़ेगा। इन सबके बावज़ूद भी घरेलू हिंसा के जितने केस रिपोर्ट होते हैं, वे आँकड़े चौंकाने वाले हैं। भारत में हर पाँच मिनट पर घरेलू हिंसा की एक घटना रिपोर्ट की जाती है।</p> <h3 id="-" style="text-align: justify;">कानून में घरेलू हिंसा की क्या परिभाषा है?</h3> <p style="text-align: justify;">इस क़ानून के तहत घरेलू हिंसा के दायरे में अनेक प्रकार की हिंसा और दुर्व्यवहार आते हैं। किसी भी घरेलू सम्बंध या नातेदारी में किसी प्रकार का व्यवहार, आचरण या बर्ताव जिससे (१) आपके स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन, या किसी अंग को कोई क्षति पहुँचती है, या (२) मानसिक या शारीरिक हानि होती है, घरेलू हिंसा है।</p> <p style="text-align: justify;">इसके अलावा घरेलू सम्बन्धों या नातेदारी में, किसी भी प्रकार का</p> <ul style="text-align: justify;"> <li>शारीरिक दुरुपयोग (जैसे मार-पीट करना, थप्पड़ मारना, दाँत काटना, ठोकर मारना, लात मारना इत्यादि),</li> <li>लैंगिक शोषण (जैसे बलात्कार अथवा बलपूर्वक बनाए गए शारीरिक सम्बंध, अश्लील साहित्य या सामग्री देखने के लिए मजबूर करना, अपमानित करने के दृष्टिकोण से किया गया लैंगिक व्यवहार, और बालकों के साथ लैंगिक दुर्व्यवहार),</li> <li>मौखिक और भावनात्मक हिंसा ( जैसे अपमानित करना, गालियाँ देना, चरित्र और आचरण पर आरोप लगाना, लड़का न होने पर प्रताड़ित करना, दहेज के नाम पर प्रताड़ित करना, नौकरी न करने या छोड़ने के लिए मजबूर करना, आपको अपने मन से विवाह न करने देना या किसी व्यक्ति विशेष से विवाह के लिए मजबूर करना, आत्महत्या की धमकी देना इत्यादि),</li> <li>आर्थिक हिंसा ( जैसे आपको या आपके बच्चे को अपनी देखभाल के लिए धन और संसाधन न देना, आपको अपना रोज़गार न करने देना, या उसमें रुकावट डालना, आपकी आय, वेतन इत्यादि आपसे ले लेना, घर से बाहर निकाल देना इत्यादि), भी घरेलू हिंसा है।</li> </ul> <p style="text-align: justify;">घरेलू हिंसा की परिभाषा के दायरे में आने के लिए ज़रूरी नहीं कि कुछ किया ही जाए, कुछ परिस्थितियों में घरेलू सम्बन्धों में कुछ नहीं करना भी (चूक) जिससे किसी व्यक्ति के जीवन और कल्याण को चोट पहुंची हो, घरेलू हिंसा कहलाएगा; उदाहरण के तौर पर, घर का खर्च न उठाना, बच्चों की परवरिश हेतु धन न देना, आर्थिक शोषण माना जाएगा ।</p> <h3 id="-" style="text-align: justify;">किससे संपर्क करें?</h3> <p style="text-align: justify;">पीड़ित के रूप में आप इस कानून के तहत 'संरक्षण अधिकारी' या 'सेवा प्रदाता' से संपर्क कर सकती हैं। पीड़ित के लिए एक <a class="external_link ext-link-icon external-link" style="text-align: justify;" title=" संरक्षण अधिकारी (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)" href="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/social-welfare/93893e92e93e91c93f915-91c93e91793094191592493e/92e93993f93293e-93993f90293893e/nyaaya.in/law/557/the-protection-of-women-from-domestic-violence-act-2005/#section-9" target="_blank" rel="noopener">संरक्षण अधिकारी </a><span style="text-align: justify;">संपर्क का पहला बिंदु है। संरक्षण अधिकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही शुरू करने और एक सुरक्षित आश्रय या चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं। प्रत्येक राज्य सरकार अपने राज्य में ‘संरक्षण अधिकारी’ नियुक्त करती है। ‘सेवा प्रदाता’ एक ऐसा संगठन है जो महिलाओं की सहायता करने के लिए काम करता है और इस कानून के तहत पंजीकृत है। पीड़ित </span><a class="external_link ext-link-icon external-link" style="text-align: justify;" title=" सेवा प्रदाता (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)" href="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/social-welfare/93893e92e93e91c93f915-91c93e91793094191592493e/92e93993f93293e-93993f90293893e/nyaaya.in/law/557/the-protection-of-women-from-domestic-violence-act-2005/#section-10" target="_blank" rel="noopener">सेवा प्रदाता </a><span style="text-align: justify;"> से, उसकी शिकायत दर्ज कराने अथवा चिकित्सा सहायता प्राप्त कराने अथवा रहने के लिए एक सुरक्षित स्थान प्राप्त कराने हेतु संपर्क कर सकती है। भारत में सभी पंजीकृत सुरक्षा अधिकारियों और सेवा प्रदाताओं का एक डेटाबेस यहाँ उपलब्ध </span><a style="text-align: justify;" href="http://nipccd.nic.in/reports/posp.htm">यहाँ उपलब्ध है</a><span style="text-align: justify;">। सीधे पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट से भी संपर्क किया जा सकता है। आप मजिस्ट्रेट - फर्स्ट क्लास या मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट से भी संपर्क कर सकती हैं, किंतु किस क्षेत्र के मैजिस्ट्रेट से सम्पर्क करना है यह आपके और प्रतिवादी के निवास स्थान पर निर्भर करता है । १० लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में अमूमन मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट से संपर्क करने की आवश्यकता हो सकती है।</span></p> <h3 id="-" style="text-align: justify;">घरेलु हिंसा के मामले में कौन शिकायत दर्ज करा सकता है?</h3> <p style="text-align: justify;">पीड़ित खुद शिकायत कर सकती है। अगर आप पीड़ित नहीं हैं तो भी आप संरक्षण अधिकारी से <a class="external_link ext-link-icon external-link" style="text-align: justify;" title=" संपर्क कर सकते है (नए विंडोज में खुलने वाली अन्य वेबसाइट लिंक)" href="https://static.vikaspedia.in/media/images_hi/social-welfare/93893e92e93e91c93f915-91c93e91793094191592493e/92e93993f93293e-93993f90293893e/nyaaya.in/law/557/the-protection-of-women-from-domestic-violence-act-2005/#section-4" target="_blank" rel="noopener">संपर्क कर सकते है </a><span style="text-align: justify;">। कोई भी ऐसा व्यक्ति जिसे किसी कारण से लगता है कि घरेलू हिंसा की कोई घटना घटित हुई है या हो रही है या जिसे ऐसा अंदेशा भी है की ऐसी घटना घटित हो सकती है, वह संरक्षण अधिकारी को सूचित कर सकता है । यदि आपने सद्भावना में यह काम किया है तो जानकारी की पुष्टि न होने पर भी आपके खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाएगी।</span></p> <p style="text-align: justify;">सुरक्षा अधिकारी के अलावा पीड़ित ‘सेवा प्रदाता’ से भी संपर्क कर सकती है, सेवा प्रदाता फिर शिकायत दर्ज कर, ‘घरेलू हिंसा घटना रिपोर्ट’ बना कर मजिस्ट्रेट और संरक्षण अधिकारी को सूचित करता है।</p> <p style="text-align: justify;"><strong>स्त्रोत: न्याय </strong></p> </div>