महिला सशक्तीकरण महिला सशक्तीकरण का अर्थ है महिलाओं की आध्यात्मिक, राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक शक्ति में वृद्धि करना। इसमें अक्सर सशक्तीकृत महिलाओं द्वारा अपनी क्षमता के दायरे में विश्वास का निर्माण शामिल होता है। सशक्तीकरण सम्भवतः निम्नलिखित या इसी प्रकार की क्षमताओं को मिलाकर है: स्वयं द्वारा निर्णय लेने की शक्ति होना, उचित निर्णय लेने के लिए जानकारी तथा संसाधनों की उपलब्धता हो, कई विकल्प उपलब्ध होना जिनसे आप चुनाव कर सकें (केवल हां/नहीं, यह/वह ही नहीं) सामूहिक निर्णय के मामलों में अपनी बात बलपूर्वक रखने की समर्थता, बदलाव लाने की क्षमता पर सकारात्मक विचारों का होना, स्वयं की व्यक्तिगत या सामूहिक शक्ति बेहतर करने के लिए कौशल सीखने की क्षमता अन्यों की विचारधारा को लोकतांत्रिक तरीके से बदलने की क्षमता विकास प्रक्रिया तथा चिरंतन व स्वयं की पहल द्वारा बदलावों के लिए भागीदारी स्वयं की सकारात्मक छवि में वृद्धि एवं धब्बों से उबरना भारत में महिलाओं की स्थिति अब भारत में महिलाएं शिक्षा, राजनीति, मीडिया, कला एवं संस्कृति, सेवा क्षेत्रों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्र में भागीदारी करती हैं। भारतकासंविधानसभीभारतीयमहिलाओंकीसमानताकीगारंटीदेताहै (धारा 14), राज्यद्वाराकिसीकेसाथलैंगिकआधारपरकोईभेदभावनहींकरता (धारा 15(1)), सबोंकोअवसरोंकीसमानताप्राप्तहै (धारा 16), समानकार्यकेलिएसमानवेतनकाप्रावधानहै (धारा 39(घ)।इसकेसाथही, राज्यद्वारामहिलाओंएवंबच्चोंकेपक्षमेंविशेषप्रावधानोंकी (धारा 15(3)) अनुमतिदेताहै, महिलाओंकेसम्मानकेप्रतिअपमानजनकप्रथाओंकेत्याग (धारा 51(अ)(ई)), तथाराज्यद्वाराकार्यकीन्यायपूर्णएवंमानवीयस्थितियोंतथाप्रसूतिराहतकोसुनिश्चितकरनेकेप्रावधानोंकीभीअनुमतिदेताहै (धारा 42)। भारतमेंमहिलाआन्दोलनने 1970 केदशककेअंतमेंज़ोरपकड़ा।मथुराबलात्कारमामलाराष्ट्रीयस्तरकेसबसेपहलेमामलोंमेंसेथाजिसनेमहिलासमूहोंकोएकजुटकिया।मथुरामेंएकपुलिसस्टेशनमेंएकलड़कीकेसाथबलात्कारकरनेकेआरोपीपुलिसकर्मियोंकोबरीकरनेका 1979-80 मेंबड़ेस्तरपरव्यापकविरोधहुआ।येविरोधव्यापकरूपसेराष्ट्रीयमीडियामेंदिखाएगएतथाइन्होंनेसरकारकोगवाहीकानून, अपराधप्रक्रियाकोडएवंभारतीयपेनलकोडकोसंशोधितकरनेकेअलावानिगरानीमेंबलात्कारकीश्रेणीबनानेपर, विवशकरदिया।महिलाआन्दोलनकारी, कन्यावध, लिंगभेद, महिलाओंकीसम्पत्तिएवंमहिलासाक्षरताजैसेमुद्दोंपरएकहोगईं। चूंकि भारत में शराबखोरी को अक्सर महिलाओं पर अत्याचार से जोड़कर देखा जाता है, कई महिला समूहों ने आन्ध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उड़ीसा, मध्य प्रदेश एवं अन्य राज्यों में शराब-विरोधी अभियान चालू किए। कई भारतीय मुसलमान महिलाओं ने शरीअत कानून के अंतर्गत महिलाओं के अधिकारों पर धार्मिक नेताओं की विवेचना पर सवाल खड़े किए हैं एवं तिहरे तलाक की प्रथा की आलोचना की है। 1990 के दशक में, विदेशी दानदाता एजेंसियों द्वारा अनुदान के फलस्वरूप महिलाओं पर केन्द्रित नए गैर सरकारी संस्थाएँ बनाना सम्भव हुआ। स्वयं-सहायता समूहों एवं गैर सरकारी संस्थाओं जैसे कि सेल्फ एम्प्लॉइड विमेंस असोसिएशन (SEWA) ने भारत में महिलाओं के अधिकारों पर महती भूमिका निभाई है। स्थानीय आन्दोलनों की नेताओं से रूप में कई महिलाएं उभरी हैं। उदाहरण के लिए, नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मेधा पाटकर। भारत सरकार ने 2001 को महिला सशक्तीकरण वर्ष (स्वशक्ति) घोषित किया। सन् 2001 में महिलाओं के सशक्तीकरण की नीति पारित की गई। नवीनतम समाचार उद्यमिता एवं कौशल विकास पर अनुसूचित जाता/जनजाति वर्ग की महिलाओं का प्रशिक्षण शशि सिंह, भारत की महिला उद्यमियों का कंसोर्सिअम (CWEI), उद्यमिता एवं कौशल विकास हेतु अनुसूचित जाति/जनजाति महिलाओं के लिए एक महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करता है। प्रशिक्षण सतत् ज़ारी रहता है तथा इसकी कोई अंतिम तिथि नहीं होती। कोई शुल्क नहीं लिया जाता। पंजीकरण पहले आओ, पहले पाओ के आधर पर किया जाता है, एवं प्रत्येक कार्यक्रम में अधिकतम 25 प्रशिक्षणार्थी सम्मिलित किए जाते हैं। विस्तृत जानकारी के लिए- सुश्री शशि सिंह, अध्यक्ष, CWEI से atshashwat_mail@yahoo.co.in पर संपर्क करें।