राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के बढ़ते कदम झारखण्ड में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन विजन और मिशन "जमीनी स्तर पर निर्धनों की संस्थायें बनाकर निर्धन परिवारों को लाभप्रद स्वरोजगार एवं हुनरमंद मजदूरी रोजगार के अवसर प्राप्त करने में समर्थ बनाते हुए गरीबी को कम करना, जिसके परिणामस्वरूप उनकी आजीविका में सतत आधार पर उल्लेखनीय विकास होगा"। झारखण्ड में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यक्रम के किर्यान्वयन हेतु "झारखण्ड स्टेट लाईवलीहुड प्रमोशन सोसाईटी" (जे.एस.एल.पी.एस) का गठन 2009 में हुआ। सोसाईटी के गठन का महत्त्वपूर्ण उद्देश्य-राज्य से गरीबी उन्मूलन हेतु विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ गरीब परिवारों तक पहुँचाना तथा उन्हें आजीविका से जोड़कर सशक्त समाज व राज्य का निर्माण करना है। जो अपने लक्ष्य की पूर्ति हेतु विभिन्न सरकारी गैर-सरकारी संस्थान एवं आम जन के साथ समन्वय स्थापित कर आगे बढ़ रही है। सोसाईटी आजीविका के अलावा पूरे राज्य में आदर्श ग्राम और संजीवनी परियोजना को भी क्रियान्वित कर रही है। जे.एस.एल.पी.एस को राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2011 (सितम्बर) से राज्य में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के कार्यक्रम को क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। जिसके बाद वित्त वर्ष 2012-13 से सोसाईटी ने एन.आर.एल.एम की गतिविधियों का क्रियान्वयन प्रारंभ किया। झारखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य निर्धन ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रभावी संस्थागत आधार तैयार करना है ताकि वे आजीविका में सतत् विकास के जरिए अपने परिवार की आय को बढ़ा सके और बेहतर वित्तीय सेवाएँ प्राप्त कर सके। जिसके लिए चरणबद्ध कार्यक्रम सघन एवं असघन रूप से सभी जिलों के प्रखण्डों व पंचायत स्तर तक चलाए जा रहे है। इस कार्यक्रम के जरिये प्रावधन है कि गरीबी रेखा से नीचे के प्रत्येक ग्रामीण परिवार की एक महिला सदस्य को स्वयं सहायता समूह के दायरे में लाया जाए। इसके अलावा क्षमता निर्माण व कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण एवं वित्तीय समावेशन भी किया जा रहा है। इस योजना कि कुछ मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं :- सर्वसामान्य सामाजिक एकजुटता और संस्था का निर्माण। वित्तीय सामवेशन- निर्धनों के अनुकूल वित्तीय क्षेत्र तैयार करना। आजीविका संवर्द्वन निर्धनों को उनकी हकदारी पाने में समर्थ बनाना। झारखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने 8 से 10 वर्षों की अवधी में स्वंय सहायता समूहों और निर्धन महिलाओं की सघनबद् संस्थाओं के जरिये राज्य के सभी गाँवों को गरीबी से उबारने के लिए उन्हें सतत् सहायता प्रदान करने का एजेंडा तय किया है। ताकि गरीबों के लिए चलाया गया यह कार्यक्रम गरीबों द्वारा चलाया जाने वाले उन्हीं का कार्यक्रम बन जाए और राज्य से गरीबी के कुचक्र को हमेशा के लिए खत्म किया जा सके। आजीविका कार्यक्रम के महत्वपूर्ण पायदान जिसके द्वारा कार्यक्रम अपने सफलतम सोपान की ओर बढ़ रही है,वो निम्नाकित हैं; १.सामाजिक जुड़ाव २.संस्थाओं का निर्माण ३.वित्तिय समावेशन 4.आजीविका संवर्धन 5.नियोजन एवं कौशल विकास सामाजिक जुड़ाव अंतर्निहित क्षमता को उपयोग में लाना भारत में और अन्यत्र स्थानों में गरीबी उन्मूलन करने की सफल योजनाओं से उजागर हुआ कि निर्धनों में गरीबी से उबर पाने की स्वाभविक क्षमता और सशक्त इच्छा होती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की मुखय ध।रणा यह है, कि यदि निर्धनों का सही ढंग से सशक्तिकरण किया जाता है और उन्हें उचित सहायता दी जाती है तो इससे अत्यंत निर्धन व्यक्ति भी गरीबी रेखा से बाहर आ सकते हैं और सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकते हैं।इसी उद्देश्य से एन.आर.एल.एम. परियोजना की परिकल्पना की गई है, जो निम्नलिखित है :- निर्धनों को जागरूक बनाना ताकि वे अपनी संस्थाएं बना सकें। अत्यंत निर्धनों को शामिल करना। संस्थाओं का निर्माण करना, क्रिया-कलापों की पहुँच और दायरे को बढ़ाने के लिए सामुदायिक संसाधनों का सशक्तिकरण करना। लगनशील, पेशेवर, संवेदनशील और जवाबदेह सहायक संरचना का निर्माण। संस्थाओं का निर्माण “मिलकर कार्य करने में समुदायों की मदद करना” ग्रामीण गरीबी को दूर करने में सबसे बड़ी चुनौती है - निर्धनों के स्वामित्व वाले संगठनों की कमी। भारत के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त अनुभव से यह पता चला है कि निर्धनों का सशक्त संस्थागत मंच उन्हें अपने लिए मानव, वित्तीय और सामाजिक संसाधन तैयार करने में सक्षम बनाता है। इन संसाधनों से निर्धन समुदाय अपने अधिकार एवं हकदारी प्राप्त कर सकते हैं, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के अवसरों और सेवाओं का लाभ उठा सकते है।गरीबी को दूर करने वाली विभिन्न भूमिकाओं को पूरा करने के लिए निर्धनों की आत्मनिर्भर, स्व-प्रबंधित संस्थाओं का निर्माण राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन कार्यक्रम का एक मुखय तत्व है। निर्धन महिलाओं को समुदाय आधरित संगठनों में एकजुट करने के पश्चात एन.आर.एल.एम कार्यक्रम लाभप्रद जीविकाएं सृजित करने की दृष्टि से निधियां प्राप्त करने और अपने हुनर और परिसंपत्तियों का दायरा बढ़ाने में इन संस्थाओं की मदद करता है। वित्तीय समावेशन “निर्धनों के अनुकूल वित्तीय क्षेत्रों का निर्माण” विगत दो दशकों में भारत में वित्तीय क्षेत्रा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। इस बात को व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है लेकिन झारखण्ड में देश की इस आर्थिक सफलता का लाभ अभी भी अत्यंत निर्धन परिवारों तक नहीं पहुँच पाया है।झारखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य है कि झारखण्ड राज्य के सभी ग्रामीण परिवारों को वित्तीय सेवाएं मिलें और उन्हें अपनी प्राथमिक जरूरतों को पूरा करने, अपने परिसंपति आधर को बढ़ाने तथा अपनी आजीविकाओं को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान किया जाए।इस प्रक्रिया को तीव्र बनाने के लिए महत्वपूर्ण विभिन्न घटक इस प्रकार है :- समुदायिक संगठन ;स्वंय सहायता समूह, ग्राम संगठन, संकुल स्तरीय संगठन के माध्यम से ऋण की सुविधा उपलब्ध कराना। बैकिंग क्षेत्रों की भूमिका को सुदृढ़ करना। सर्वसामान्य वित्तीय समावेशन की दिशा में कार्य करना। ब्याज सब्सिडी के जरिए को वहन योग्य बनाना। आजीविका संवर्द्धन “जीवन में बदलाव” जीवित रहने के लिए ग्रामीण निर्धनों को विविध आजीविकाओं और आय के विविध स्रोतों की जरुरत होती है। इसमें छोटे एवं सीमांत किसानों की भूमि पर खेती, पशुपालन, वन उत्पाद, मत्स्य पालन या पारंपरिक गैर-कृषि पेशों में मजदूरी शामिल है। आय का कोई एक स्रोत असफल रहने पर भी आजीविका में विविधता होने से निर्धनों को अपने आपको संभालने में मदद मिलती है। इस कार्यनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है- कृषि में महिलाओं को अधिकार-संपर्क बनाने वाली महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना (एम.के.एस.पी.) नामक योजना, इस परियोजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार की एक महिला को किसी न किसी आजीविका कार्यक्रम से जोड़ना है नियोजन एवं कौशल विकास “गाँव के हर हुनरमंद को काम” आजीविका कौशल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत निम्नलिखित कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी के माध्यम से 18-35 साल के ग्रामीण युवक एवं युवतियों को 3 माह, 6 माह, 9 माह एवं 12 माह का प्रशिक्षण प्रदान कर 75 फीसदी प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराना। बैंक द्वारा संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) के माध्यम से ग्रामीण युवक एवं युवतियों को विभिन्न उद्यमों में प्रशिक्षित कर स्वरोजगार हेतु उद्यमों को स्थापित करवाना। ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को प्रशिक्षित कर सूक्ष्म उद्यम सलाहकार के रूप में तैयार करना, ताकि यह संस्थागत व्यवस्था ग्रामीण अंचल के स्वरोजगार करने के इच्छुक युवक एवं युवतियों को पेशेवर सेवायें प्रदान कर सफल उद्यमी बनने का मार्ग प्रशस्त करे। स्त्रोत: झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रोमोशन सोसाइटी, रांची, झारखण्ड।