भौतिक संरचना विधि का उल्लघंन करने वाले किशोरों तथा देखरेख और संरक्षण के जरूरतमंद बालकों हेतु गृहों का संचालन अलग-अलग परिसरों से होगा। प्रत्येक संस्था में आवास निम्नलिखित मानदंडों के अनुसार होगा अर्थात:- (क) संप्रेक्षण गृह (i) लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग संप्रेक्षण गृह; (ii) शारीरिक और मानसिक स्थिति तथा किए गए अपराध की प्रकृति पर पर्याप्त ध्यान देते हुए किशोरों का उनकी आयु के आधार पर, अधिमानत: 7-11 वर्ष, 12-16 वर्ष और 16-18 वर्ष, वर्गीकरण और पृथक्करण। (ख) विशेष गृह (i) दस वर्ष से अधिक की आयु की लड़कियों तथा 11-15 और 16-18 वर्ष के आयु वर्ग के लड़कों के लिए अलग-अलग विशेष गृह; (ii) शारीरिक और मानसिक स्थिति तथा किए गए अपराध की प्रकृति के आधार पर किशोरों का वर्गीकरण और पृथक्करण; (iii) परिषद् द्वारा अधिनियम की धारा 16 के उपबन्ध (2) के अधीन बोर्ड द्वारा निर्दिष्ट किशोरों के आवासन के लिए राज्य सरकार समय-समय पर यथा विहित रीति से “सुरक्षित स्थान” अधिसूचित करेगी| (ग) बाल गृह (i) दस वर्ष से कम आयु की लड़कियों और लड़कों को एक ही गृह में रखा जा सकता है किन्तु 5-10 वर्ष की आयु वर्ग के लड़के और लड़कियों के लिए नहाने और सोने की व्यवस्था अलग-अलग होगी; (ii) 11-15 तथा 16-18 वर्ष की आयु वर्ग के लड़कों एवं लड़कियों हेतु अलग-अलग बाल गृह; (iii) शिशुओं के लिए उपयुक्त सुविधाओं के साथ 0-5 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों हेतु अलग-सुविधाएँ। (घ) आश्रय गृह (i) लड़कियों और लड़कों हेतु अलग-अलग आश्रय गृह; (ii) 10 वर्ष से अधिक की आयु की लड़कियों और 11-15 और 16-18 वर्ष की आयु-वर्ग के लड़कों हेतु अलग-अलग आश्रय गृह। (3) 50 किशोरों अथवा बालकों वाले संस्थान हेतु भवन अथवा आवास हेतु मानक इस प्रकार हैं:- (i) 2 शयनागार या सोने का कमरा (ii) दो कक्षाएँ (iii) रोगी कक्ष/प्राथमिक उपचार कक्ष (iv) रसोईघर और भोजन कक्ष, भंडारण गृह (v) मनोरंजन कक्ष और पुस्तकालय (vi) स्नान-गृह/शौचालय (vii) परामर्श और मार्गदर्शन कक्ष (viii) कार्यालय कक्ष (ix) अधीक्षक कक्ष (x) अधीक्षक के लिए आवास (xi) किशोर न्याय बोर्ड/बाल कल्याण समिति हेतु कक्ष (xii) किशोरों/बालकों की कुल संख्या के अनुसार खेलने हेतु यथेष्ट रकवा का खेल-मैदान। अधीक्षक संस्थान में ही रहेगा तथा उसे क्वार्टर उपलब्ध कराया जाएगा और यदि न्याय संगत कारणों से वह गृह में रहने में समर्थ न हो तो (निदेशक, बाल संरक्षण की पूर्व अनुज्ञा से) संस्थान के कर्मचारीवृद में से कोई अन्य वरिष्ठ सदस्य संस्थान में रहेगा तथा बालकों या किशोरों की समग्र देखभाल का पर्यवेक्षण करने की स्थिति में होगा और किसी संकट और आपतिक स्थिति में निर्णय लेगा। (i) नियम 47 (3) में अभिकथित मानकों के अनुसार आवास के स्तर का यथासंभव अनुपालन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित सुविधाओं में से कोई न्यूनतम शामिल होंगी: (क) शयनागार या रहने का कमरा: - 40 वर्ग फुट प्रति किशोर या बालक (ख) प्रसाधन एवं स्नानगार – हर 8 बच्चों पर कम से कम एक (ग) कक्षा के कमरे: - 25 किशोरों या बालकों के लिए 300 वर्ग फुट की हरेक कक्षा (घ) रोगी कक्ष/प्राथमिक उपचार: - प्रत्येक कमरा 375 वर्ग फुट का (ङ) कार्यशाला:- प्रति किशोर या बालक 75 वर्ग फुट (च) खेल का मैदान:- प्रत्येक संस्थान में किशोरों की संख्या के आधार पर पर्याप्त खेल का मैदान कराया जाएगा। (ii) दुर्घटनाओं के निवारण के लिए उपयुक्त और समतल फर्श होगा। (iii) पर्याप्त रोशनी, रोशनदान, गर्म और ठंडा रखने की व्यवस्था, सुरक्षित पेय जल, और लिंग, आयु और नि:शक्तों की सुगमता के अनुसार स्वच्छ शौचालय होंगे। (iv) अधिनियम के अधीन सभी संस्थान प्राथमिक उपचार किट, रसोई में अग्निशमन यंत्र, शयनागार, भंडारण कक्ष, परामर्श कक्ष, की व्यवस्था करेंगे, विधुत उपकरणों, समुचित भंडारण, खाद्य पदार्था के निरिक्षण की आवधिक समीक्षा की जाएगी तथा जल भंडारण एवं आपातकालीन रोशनी की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। कपड़े और बिस्तर कपड़े और बिस्तर, मानक और जलवायु – विषयक परिस्थितियों के अनुसार होंगे। कपड़ों और बिस्तर हेतु प्रत्येक किशोर या बालक की आवश्यकताएँ और न्यूनतम मानक इस नियमावली की अनुसूची-1 में विनिर्धारित हैं। स्वच्छता और सफाई प्रत्येक संस्थान में निम्नलिखित सुविधाएँ होंगी, अर्थात: (क) पर्याप्त उपचारित पेय जल हेतु जल फिल्टर लगाए जाएँगे; (ख) नहाने और कपड़े धोने, परिसर के रख-रखाव और साफ-सफाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी की व्यवस्था; (ग) समुचित जल निकास प्रणाली; (घ) कचरे के निस्तारण के लिए व्यवस्था; (ड.) मच्छरदानी उपलब्ध कराकर मच्छरों से संरक्षण; (च) वार्षिक कीटाणु (पेस्ट) नियन्त्रण; (छ) आठ बच्चों के लिए कम से कम एक शौचालय के अनुपात में पर्याप्त रोशनी वाले और हवादार शौचालयों की पर्याप्त संख्या; (ज) कपड़ो की धुलाई के लिए पर्याप्त स्थान; (झ) साफ़ और मक्खियों के प्रवेश रहित रसोई तथा बर्तनों को धोने के लिए पृथक स्थान; (ट) बिस्तर और कपड़ो को धूप में सुखाने के लिए स्थान; (ठ) रोग कक्ष/प्रथम उपचार कक्ष/ चिकित्सा केंद्र में स्वच्छता बनाए रखना। दिनचर्या प्रत्येक संस्थान में बाल समिति के परामर्श से किशोरों या बालकों के लिए दिनचर्या विकसित होगी, जिसे संस्थान में विभिन्न प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया जाएगा। दिनचर्या में अन्य बातों के साथ-साथ नियमित और अनुशासित जिन्दगी, व्यक्तिगत साफ-सफाई, शारीरिक व्यायाम, योग, शैक्षणिक कक्षाएं, व्यावसायिक प्रशिक्षण, सुव्यवस्थित मनोरंजन और खेल, नैतिक शिक्षा, सामूहिक क्रियाकलाप, प्रार्थना और सामुदायिक गायन और शनिवार तथा छुट्टियों के लिए विशेष कार्यक्रम होंगे। पोषण और आहार मानक संस्थान द्वारा निम्नलिखित पोषण और आहार मानकों का अनुसरण किया जायेगा अर्थात: (क) बालकों को नाश्ते सहित दिन में चार बार भोजन दिया जाएगा। (ख) संतुलित आहार तथा न्यूनतम पोषण मानकों अनुसार स्वाद में भिन्नता तथा इन नियमों की अनुसूची – 2 में उपवर्णित आहार मानकों को सुनिश्चित करने के लिए पोषण विशेषज्ञ या चिकित्सक की सहायता से व्यंजन सूची तैयार की जाएगी। (ग) इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक संस्थान अनुसूची -2 में निर्धारित पोषण मानकों और आहार मानकों का कड़ाई से पालन करेगा। (घ) किशोरों या बच्चों को छुट्टी के दिनों तथा त्यौहारों पर विशेष भोजन प्रदान किया जाएगा| (ङ) नवजात एवं बीमार या बच्चों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार विशेष आहार प्रदान किया जायेगा। चिकित्सकीय देखभाल (क) प्रत्येक संस्थान मासिक चिकित्सकीय जाँच के आधार पर प्रत्येक किशोर या बालक का चिकित्सा अभिलेख रखेगी तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करेगी; (ख) यह सुनिश्चित करेगी कि चिकित्सा अभिलेख में वजन और लंबाई का अभिलेख, बिमारी और उपचार तथा अन्य शारीरिक अथवा मानसिक समस्याओं का अभिलेख शामिल हो; (ग) किशोर या बालकों की नियमित चिकित्सा जाँच तथा उपचार हेतु चिकित्सा सुविधाओं, जिसमें सभी कार्य दिवसों में चिकित्सक उपलब्ध कराना शामिल है, का प्रबंध करेगा; (घ) छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए पर्याप्त चिकित्सा उपकरण, जिसमें आपातकालीन दवाइयों और उपभोग्य वस्तुओं के स्टॉक वाला प्राथमिक उपचार किट शामिल होना चाहिए; (ङ) समस्त कर्मचारीवृद को प्राथमिक उपचार करने की प्रशिक्षण प्रदान करेगी; (च) स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सरकारी अस्पताल, चिकित्सा महाविद्यालयों, अन्य अस्पतालों नैदानिक मनोवैज्ञानिकों तथा मनश्चिकित्सकों और मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों के कसाथ उनके चिकित्सकों और विद्यार्थियों द्वारा नियमित दौरे के लिए तथा संस्थाओं में आवधिक स्वास्थ्य शिविर लगाने के लिए संबंध स्थापित करेगी; (छ) प्रतिरक्षण टीकाकरण हेतु आवश्यक प्रबंध करेगी साथ ही उसके संबंध में उचित अभिलेख संधारित करेगी; (ज) संक्रामक रोगों के प्रकोप के मामले में निवारक उपाय करेगी; (झ) विकृत स्वास्थ्य के मामलों या गंभीर मामलों को निकटतम सिविल अस्पताल या मान्यता प्राप्त उपचार केन्द्रों में भेजने के लिए एक तन्त्र की स्थापना करेगी; (ञ) बीमार बच्चों को निर्बाध चिकित्सा निगरानी में रखेगी; (ट) दाखिले के समय चिकित्सा प्रमाण-पत्र का आग्रह किए बिना किशोर या बालक को प्रवेश देगी; (ठ) किशोर या बालक के माता-पिता या संरक्षक की पूर्व सहमति के बिना शल्य चिकित्सा तब तक नहीं करेगी जब तक माता-पिता को ढूढा पाना कठिन हो तथा चिकित्सा अधिकारी की राय में किसी किशोर या बालक की स्थिति ऐसी है कि उसकी शल्य चिकित्सा में विलंब से किशोर या बालक को अनावश्यक पीड़ा, उसके स्वास्थ्य को क्षति पहुंचने की संभावना हो या संस्था के प्रभारी अधिकारी की इस आशय की लिखित सहमति प्राप्त किए बिना उसका शल्य-उपचार नहीं करेगी; (ड) संस्था प्रत्येक किशोर या बालक को नियमित परामर्श प्रदान करेगी या इसका प्रबंध करेगी या ऐसी सेवाएँ, जिनमें संस्था के परिसर में परामर्श सत्रों के लिए पृथक कमरे शामिल हैं, उनके लिए जिनकी उन्हें जरूरत है विशिष्ट मानसिक स्वास्थ्य सेवा कार्यकर मों को सुनिश्चित करेगी; (ढ) ऐसे बालकों, जिन्हें विशेष नशीले पदार्थो का सेवन छुडाने तथा पुनर्वास कार्यक्रम की जरूरत है, को अर्हता प्राप्त कार्मिकों द्वारा चलाए जा रहे उपयुक्त केन्द्रों में भेजेगी, जहाँ इन कार्यकर मों में संबंधित बच्चे की आयु, लिंग तथा अन्य विनिर्देशों को अपनाया जाएगा| मानसिक स्वास्थ्य प्रत्येक किशोर या बालक के मानसिक स्वास्थ्य अभलेख का सबंधित संस्थाओं द्वारा रख-रखाव किया जाएगा। दोनों प्रकार के परिवेश आधारित अंत:क्षेप, जो बालकों के लिए समर्थ परिवेश और व्यक्तिगत चिकित्सा उपलब्ध करा रहे हैं, यह प्रत्येक बालक के लिए जरूरी है तथा इसे सभी संस्थाओं में उपलब्ध कराया जाएगा। स्पष्टीकरण इस उपनियम के प्रयोजनार्थ, परिवेश आधारित अंत:क्षेप पुन:निरोग होने की एक प्रक्रिया है जो किसी संस्था में संस्कृति और परिवेश को समर्थ बनाने के लिए प्रारंभ होती है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि प्रत्येक बालक की योग्यताओं का पता लगाया जाता है तथा उनके पास चुनाव करने और अपनी जिन्दगी के संबंध में निर्णय लेने के अधिकारी है और पहचान स्थापित करते हैं और ऐसे अंत:क्षेप का बालक पर महत्वपूर्ण भावनात्मक प्रभाव होता है। (3) किसी संस्था का परिवेश शोषण से मुक्त होना चाहिए, ताकि किशोर या बालक अपनी परिस्थितियों का सामना कर सकें तथा वे पुन: आत्मविश्वास प्राप्त कर सकें। (4) किसी संस्था में किशोर या बालकों की देखभाल में लगे सभी व्यक्ति वातावरण को अनुकूल बनाने में भाग लेगे तथा चिकित्सकों का साथ सहयोग करेंगे। (5) व्यक्तिगत चिकित्सा एक विशेषीकृत प्रक्रिया है तथा प्रत्येक संस्था इसके लिए महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य तथा चिकित्सकों के साथ सहयोग करेंगा। (6) प्रत्येक संस्था में किशोर या बालक के लिए विशेषीकृत तथा नियमित चिकित्सा के लिए प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की सेवाएँ उपलब्ध होनी चाहिए, जो बालक मार्गदर्शन केन्द्रों, मनोविज्ञान और मन:चिकित्सा विभागों जैसे बाह्य अभिकरणों अथवा इस तरह के सरकारी और गैर-सरकारी अभिकरणों से भी प्राप्त की जा सकती है। (7) प्रत्येक किशोर या बालक के लिए संस्था से संबद्ध मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के परामर्श से बाल कल्याण समिति अधिकारी द्वारा एक मानसिक स्वास्थ्य देखभाल योजना विकसित की जाएगी तथा इसे सबंधित किशोर या बालक की व्यक्तिगत देखभाल योजना में सम्मिलित किया जाएगा। (8) प्रत्येक मामले की फाइल में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सिफारिशों को रखा जाएगा तथा इसे प्रत्येक बालक के लिए देखभाल योजना में सम्मिलित किया जाएगा। (9) इन देखभाल योजनाओं के प्रति मास इन नियमों के नियम 62 के अधीन स्थापित प्रबन्धन समिति के समक्ष तथा प्रत्येक तिमाही में बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। (10) किसी भी किशोर या बालक के प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन तथा रोग निदान किए बिना मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवा नहीं दी जाएगी। शिक्षा प्रत्येक संस्था, सभी किशोर या बालकों को उनकी आयु या सामर्थ्य के अनुसार, आवश्यकता के अनुसार, संस्था के भीतर या बाहर औपचारिक, अनौपचारिक एवं जीवन कौशल शिक्षा प्रदान करेगी। शैक्षणिक अवसर, जिनमें विद्यालय, ब्रिज विद्यालय, मुक्त विद्यालय, अनौपचारिक शिक्षा तथा जहाँ आवश्यकता हो विशेष शिक्षाविदों से शिक्षा और आगत शामिल है, उपलब्ध कराए जाएँगे। जहाँ कहीं आवश्यक हो, संस्थाओं के विद्यालय जाने वाले बालकों को अतिरिक्त प्रशिक्षण सेवा प्रदान की जाएगी। यह सेवा स्वयं सेवकों को प्रोत्साहित करके अथवा प्रशिक्षण केन्द्रों से जोड़ करके प्रदान की जाएगी। व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रत्येक संस्था किशोरों या बालकों को लाभदायक व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी। इस प्रयोजनार्थ संस्थाएँ तकनीकी अनुदेश संस्थान, जन शिक्षण संस्थान, विशेषज्ञता-प्राप्त सरकारी और निजी संगठनों या उद्यमों, अभिकरणों या गैर-सरकारी संगठनों अथवा रोजगार दिलाने वाले अभिकरणों के साथ संपर्क (नेटवर्किग) स्थापित करेंगी। संस्था के अधीक्षक 16-18 वर्ष के बच्चों को प्रशिक्षु के रूप में भेजने का सम्यक प्रयास करेगा। मनोरंजन सुविधाएँ संस्थाओं में सभी किशोरों या बालकों को मार्गदर्शन के अंतर्गत मनोरंजन सेवा उपलब्ध कराईजाएगी। मनोरंजन सेवा के अंतर्गत चहार दिवारी के भीतर और बाहर खेले जाने वाले खेल, संगीत, टेलीविजन, पिकनिक और सैर, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा पुस्तकालय शामिल हैं। प्रत्येक संस्थान, मनोरंजन के क्रियाकलापों के लिए सभी बच्चों को प्रयाप्त मात्रा में सामग्री, खिलौना, खेल सामग्री मुहैया कराएगा। किशोरों या बालकों की संस्थागत व्यवस्था (1) संस्थाओं में प्रवेश पाने वाले नए किशोर के संबंध में निम्नलिखित प्रक्रिया का अनुपालन किया जाएगा:- (क) इन किशोरों को स्वीकार करना तथा इनकी तलाशी लेना; (ख) किशोरों के व्यक्तिगत सामान और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का विसंकर मण और भंडारण करना; (ग) उन्हें स्नान कराना व उनके बाल कटवाना (यदि उनके धर्म के अनुसार ऐसा करना प्रतिशिद्ध न हो); (घ) उन्हें प्रसाधन सामग्री; पहनने के लिए नए कपड़े, बिस्तर तथा अन्य जरूरी सामान और उपस्कर देना (मानदंडो के अनुसार); (ङ) जहाँ कहीं आवश्यक हो तथा ऐसे किसी किशोर की दशा में चिकित्सीय जाँच और उपचार कराना जो संक्रामक रोग, मानसिक रोग या अन्य किसी प्रकार से आदि हो गया हो; (च) किसी संक्रामक रोग से पीड़ित और विशेष देखभाल के अपेक्षित बालकों को विशेष रूप से इस प्रयोजनार्थ निधारित शयनशाला या वार्ड या अस्पताल में अलग से रखा जाएगा; (छ) किशोरों की तात्कालिक और अत्यावश्यक जरूरतों की पूर्ति की जाएगी, जैसे परीक्षा देना, उनके माता-पिता को उनसे मिलने के लिए पत्र भेजना, उनकी व्यक्तिगत समस्याएं सुलझाना इत्यादि तथा बोर्ड के आदेशानुसार किशोर की आयु का प्रभारी अधिकारी द्वारा सत्यापन किया जाएगा। (2) इन संस्थाओं के साथ संबद्ध परिवीक्षा अधिकारियों या बाल कल्याण अधिकारियों या सामजिक कार्यकर्ताओं या परामर्शदाताओं या अन्य स्वयंसेवी सामाजिक कार्यकर्ताओं या पेशागत प्रशिक्षित अथवा परामर्शदाताओं में से कोई एक व्यक्ति ऐसी संस्था में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक नए बालक या किशोर की दशा में विशिष्ट कार्यकर्ता के रूप में नियुक्त किया जाएगा। (3) संस्था में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक नए किशोर को उस संस्था और उसके कामकाज से परिचित कराया जाएगा और उसे निम्नलिखित बातों की जानकारी भी दी जाएगी:- (क) व्यक्तिगत स्वास्थ्य, स्वच्छता और सफाई; (ख) संस्थागत अनुशासन और व्यवहार संबंधी मानक, वृद्धों और अध्यापकों के लिए आदर; (ग) दैनिक कार्यकलाप, साथियों के साथ व्यवहार, विकास संबंधी अवसरों का इष्टतम उपयोग; और (घ) संस्था के भीतर उसके अधिकार, उत्तरदायित्व और दायित्व। (4) नामनिर्दिष्ट अधिकारी किशोर या बालकों का नाम प्रवेश रजिस्टर में दर्ज करेगा तथा उसे उपयुक्त आवास सुविधा आवंटित करेगा। (5) अभिलेख के लिए किशोर का फोटो तत्काल खींचा जाएगा और किशोर या बालक द्वारा नामित व्यक्ति के साथ मामला कार्यकर्ता या परिवीक्षा अधिकारी या कल्याण अधिकारी अन्वेषण और पत्राचार आरंभ करेगा। (6) अधीक्षक यह सुनिश्चित करेगा कि संस्था को किशोर या बालक से प्राप्त उसका व्यक्तिगत सामान सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है तथा व्यक्तिगत सामान रजिस्टर में दर्ज भी किया गया है और यह सामान किशोर या बालक को संस्था छोड़ते समय वापस किया जाना चाहिए। (7) संस्था में प्रवेश प्राप्त किशोर के शैक्षणिक स्तर एवं व्यावसायिक अभिरुचि का मूल्यांकन शिक्षक, कर्मशाला पर्यवेक्षक एवं अन्य तकनीकी कर्मी के द्वारा संचालित जाँच एवं अंतवीक्षा के आधार पर होगा। बाह्य विशेषज्ञ तथा समुदाय आधारित कल्याण अभिकरण, मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक, बाल निदेशन क्लिनिक, अस्पताल एवं स्थानीय चिकित्सक, खुला विद्यालय या जन शिक्षण संस्थान से आवश्यक सम्पर्क स्थापित किया जाएगा। (8) संस्थान में प्रवेश पाने वाले किशोर या बालक के मामले का विवरण प्रपत्र – XX में रखा जाएगा, जिसमें किशोर या बालक की सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से सबंधित सूचना होगी और ये सूचना, यथासंभव सभी उपलब्ध स्रोतों, जैसे कि किशोर या बालक के घर, माता-पिता या अभिभावकों, नियोक्ताओं, विद्यालय, मित्रों और समुदाय के माध्यम से प्राप्त की जाएगी। (9) किशोर या बालक की रिहाई के पूर्व योजना तथा विशेष गृहों से मुक्त हुए किशोरों या बालकों के मामलों की अनुवर्ती कार्रवाई के सुविचारित कार्यक्रम विद्यालय सरकारी और स्वैच्छिक कल्याण संगठनों के सहयोग से सभी संस्थाओं में तैयार किए जाएँगे। (10) किसी किशोर या बालक के बिना अनुमति के संस्था से चले जाने अथवा संस्था के भीतर अपराध करने की दशा में संबद्ध संस्था के अधीक्षक द्वारा इस मामले की सूचना पुलिस और संबद्ध किशोर या बालक के परिवार को, यदि ज्ञात हो, भेजी जाएगी और किशोर या बालक के गुम रहने की स्थिति में उसे ढूढने के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों सहित उक्त घटना की परिस्थितियों की विस्तृत रिपोर्ट, यथास्थिति, बोर्ड या समिति को भेजी जाएगी। (11) संस्थागत देखरेख में रहने वाले प्रत्येक किशोर या बालक के पूर्ववृत्त, परिस्थितियों और व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर उसके पुनर्वास और समाज में उसको पुन: सम्मिलित करने के उद्देश्य से उसके लिए व्यक्तिगत देखरेख योजना तैयार की जाएगी और व्यक्तिगत देखरेख योजना निम्नलिखित दिशानिर्देशों पर आधारित होगी: (क) किसी भी संस्था में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक बालक के लिए उसके प्रवेश की तारीख से एक मास के भीतर प्रभारी अधिकारी, परामर्शदाता बाल कल्याण अधिकारी या मामला कार्यकर्ता या सामाजिक कार्यकर्ता के साथ व्यक्तिगत देखरेख योजना प्रपत्र – XXI के अनुसार तैयार करेगा; (ख) सभी देखरेख योजना में किशोर या बालक के पुनरुद्धर, पुनर्वास, पुन: सम्मिलित करने और अनुवर्ती योजना शामिल होगी; (ग) किशोर या बालक की रिहाई या उसे उसके परिवार या उसकी पोषक देखभाल करने वालों या दत्तक माता-पिता के पास वापस भेजने के विकल्पों सहित उसके उपयुक्त विकास और पुनर्वास के लिए इस नियमावली के नियम 62 के अधीन गठित प्रबंधन समिति उक्त देखरेख योजना का तिमाही आधार पर पुनर्विलोकन करेगी; (घ) किशोर या बालक की देखरेख योजना तैयार करते समय उनकी सलाह भी ली जाएगी; (ङ) किशोरों या बालकों के स्थानांतरण या पुनरुद्धर या घर वापसी के मामलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उक्त देखरेख योजना का कार्यान्वयन जारी रहे। प्रतिशिद्ध वस्तुएं कोई भी व्यक्ति संस्था में प्रतिशिद्ध वस्तुएं लेकर नही आएगा, अर्थात:- (क) आग्नेयास्त्र या अन्य कोई अस्त्र-शस्त्र, चाहे उसके लिए अनुज्ञप्ति अपेक्षित हो या नहीं (जैसे कि चाक़ू, ब्लेड, लाठी, भाला और तलवार); (ख) अल्कोहल और किसी प्रकार की स्प्रिट; (ग) भांग, गांजा, अफीम या अन्य कोई स्वापक या मन: प्रभावी पदार्थ; (घ) तम्बाकू, सिगरेट, गुटखा या (ड.) इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा साधारण या विशेष आदेश के द्वारा विनिर्दिष्ट अन्य कोई वस्तु। तलाशी लेने और निरीक्षण के समय पाई गई वस्तु (1) अधीक्षक यह सुनिश्चित करेगा कि संस्था में प्रवेश पाने वाले प्रत्येक किशोर की तलाशी बगैर उसकी प्रतिष्ठा को प्रभावित किये ली जाए, उसके व्यक्तिगत सामान का निरीक्षण किया जाए तथा उसके पास पाए गए धन या अन्य किसी मूल्यवान वस्तु को उस अधीक्षक/ प्रभारी पदाधिकारी की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाए। (2) बालिकाओं की तलाशी संस्था की महिला सदस्य द्वारा ली जाएगी और बालकों और बालिकाओं दोनों की तलाशी शिष्टता और सम्मान को ध्यान में रखते हुए ली जाएगी। (3) किसी किशोर के पास पाए गए धन, मूल्यवान वस्तुओं और अन्य वस्तुओं का अभिलेख प्रत्येक संस्था में “व्यक्तिगत सामान रजिस्टर” में रखा जाएगा। (4) व्यक्तिगत सामान रजिस्टर में प्रत्येक किशोर के संबंध में की गई प्रविष्टियाँ एक साक्षी की उपस्थिति में उस किशोर को पढ़कर सुनाई जाएगी और ऐसी प्रविष्टियों की शुद्धता के प्रतीक के रूप में उक्त साक्षी के हस्ताक्षर लिए जाएँगे तथा इन प्रविष्टियों पर अधीक्षक प्रति हस्ताक्षर करेगा। वस्तुओं का निपटान किसी संस्था में प्राप्त या रखे गए किशोर के धन या मूल्यवान वस्तुओं का निम्नलिखित रीति में निपटान किया जाएगा:- (क) किसी किशोर के संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसे किसी संस्था में भेजे जाने का निदेश देते हुए जारी किए गए आदेश पर अधीक्षक ऐसे किशोर का धन और उसकी आय समय-समय पर अभिकथित रीति से उसके नाम पर जमा कराएगा; (ख) किशोर का धन अधीक्षक के पास रखा जाएगा और उसकी मूल्यवान वस्तुएं, बिस्तर, कपड़े और अन्य वस्तुएं, यदि कोई हो, सुरक्षित अभिरक्षा में रखे जाएँगे; (ग) जब ऐसे किशोर को एक संस्था से दूसरी संस्था में स्थानांतरित किया जाता हो, तब उसकी पूर्ण धनराशि, मूल्यवान वस्तुएं और अन्य वस्तुएं बालक के साथ उस संस्था के अधीक्षक को भेजे जाएँगे, जिसमें उसे स्थानांतरित किया गया हो, साथ ही साथ उनका पूरा एवं सही विवरण तथा प्राक्कलित मूल्य भी होगा। (घ) ऐसे किशोर को रिहा करते समय सुरक्षित अभिरक्षा में रखी गई उसकी मूल्यवान और अन्य वस्तुओं और उसके नाम में जमा धनराशि यथास्थिति उसके माता-पिता या अभिभावकों को सौंपी जाएगी और इस विषय में रजिस्टर में प्रविष्टि की जाएगी, जिस पर अधीक्षक हस्ताक्षर करेगा; (ङ) जब संस्था में किसी किशोर की मृत्यु हो जाती है, तब मृतक द्वारा छोड़ी गई मूल्यवान और अन्य वस्तुओं तथा उसके नाम में जमा धनराशी अधीक्षक द्वारा किसी ऐसे व्यक्ति को सौंपे जाएँगे, जो उन पर अपना दावा सिद्ध करता है और एक क्षतिपूर्ति बंधपत्र निष्पादित करता है; (च) ऐसी मूल्यवान और अन्य वस्तुओं तथा धनराशि प्राप्त करने वाले व्यक्ति से इस प्राप्ति की रसीद ली जाएगी; (छ) यदि ऐसे किसी किशोर की मृत्यु या उसके भाग जाने की तारीख से छह मास के भीतर कोई दावेदार उपस्थित नहीं होता तो मृतक की मूल्यवान और अन्य वस्तुएं और उसके नाम पर जमा धनराशि का इस नियमावली के नियम संख्या 62 के अधीन गठित प्रबन्धन समिति के विनिश्चय के अनुसार निपटान किया जाएगा। अधिनियम की धारा 61 में यथावर्णित रीति से निधि में जमा की जाएगी। मामले की फाइल का रखरखाव (1) प्रत्येक किशोर और बालक की मामला (केस) फाइल संस्था में रखी जाएगी, जिसमें निम्नलिखित जानकारी होंगी: (क) किशोर के बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति या अभिकरण की रिपोर्ट; (ख) अधीक्षक, परिवीक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी, परामर्शदाता और केस कार्यकर्ता की रिपोर्ट; (ग) पिछली संस्था से प्राप्त जानकारी, अगर कोई हो; (घ) किशोर से प्रारंभिक वार्तालाप की रिपोर्ट उसके परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, समुदाय, मित्रों से प्राप्त जानकारी तथा अन्य विविध स्रोतों से प्राप्त जानकारी; (ङ) अतिरिक्त जानकारी का स्रोत; (च) कर्मचारियों से प्राप्त पर्यवेक्षण रिपोर्ट; (छ)चिकित्सा अधिकारी से प्राप्त नियमित स्वास्थ्य स्थिति रिपोर्ट, नशामुक्ति कार्यक्रम की प्रगति की रिपोर्ट, जहाँ कहीं आवश्यक हो, मनोवैज्ञानिक परामर्श या मानसिक स्वास्थ्य से सबंधित अन्य किसी कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट; (ज) बुद्धिलब्धि (आई० क्यू०) परीक्षा, अभिरुचि परीक्षा, शैक्षिक या व्यावसायिक परीक्षाओं के परिणाम; (झ) सामाजिक इतिवृत्त (सोशल हिस्ट्री); (ञ) मामला विशिष्ट कार्यकर्ता और अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत सार और विश्लेष्ण; (ट) प्रशिक्षण और उपचार कार्यक्रम तथा विशेष सावधानियां रखे जाने के संबंध में अनुदेश; (ठ) प्रदान की गई छुट्टियाँ और अन्य विशेषाधिकार; (ड) विशेष उपलब्धियां तथा नियमों का उल्लघंन, यदि कोई हो; (ढ) तिमाही प्रगति रिपोर्ट; (ण) प्रपत्र – XXI में यथाविहित रिहाई-पूर्व कार्यक्रम, रिहाई के उपरांत योजना एवं अनुवर्ती योजना सहित व्यक्तिगत देखरेख योजना; (त) संस्था से अनुपस्थित रहने या पर्यवेक्षणाधीन रिहाई की अनुमति; (थ) रिहाई; (द) अनुवर्ती रिपोर्ट; (ध) वार्षिक फोटोग्राफ; (न) प्रपत्र – XX में यथाविहित मामले का सम्यक रूप से भरा गया इतिवृत्त; (प) सक्षम प्राधिकारी के निदेशानुसार, यदि कोई हो, विभिन्न मामलों में रिहाई के उपरांत अनुवर्ती रिपोर्ट; तथा (फ) टिप्पणियाँ। (2) संस्थाओं और बोर्ड या समिति द्वारा रखी गई सभी मामलों की फाइलें यथासंभव कंप्यूटरिकृत और नेटवर्क में भी प्रविष्ट की जाएगी ताकि ये आकंड़े राज्य और जिला बाल संरक्षण इकाई तथा राज्य सरकार को केन्द्रीय रूप से उपलब्ध हो सके। प्रबन्धन समिति (1) संस्था के प्रबन्धन और उसमें रहने वाले किशोर और बालकों की प्रगति का अनुश्रवण करने के लिए प्रत्येक संस्था की प्रबन्धन समिति होगी, जो जिला बाल संरक्षण इकाई के आदेश से गठित की जायेगी। (2) किशोर या बालकों की व्यक्तिगत देखरेख योजना के अनुसार उनकी समुचित देख-रेख और उपचार सुनिश्चित करने के लिए उनकी आयु अपराध की प्रकृति या अपेक्षित देखरेख की प्रकृति, शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य तथा स्थगन आदेश की अवधि के आधार पर उनको समूहों में सम्मिलित किया जाएगा। (3) प्रबंधन समिति में निम्नलिखित व्यक्ति होंगे- (1) जिला बाल संरक्षण अधिकारी (जिला बाल संरक्षण इकाई) अध्यक्ष (2) अधीक्षक सदस्य सचिव (3) परिवीक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी या मामला (केस) कार्यकर्ता सदस्य (4) जिला चिकित्सा अधिकारी सदस्य (5) मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता सदस्य (6) कार्यशाला पर्यवेक्षक या व्यवसाय अनुदेशक सदस्य (7) अध्यापक सदस्य (8) किशोर न्याय बोर्ड या बाल कल्याण समिति का सामाजिक कार्यकर्ता सदस्य (9) प्रत्येक बाल समिति से किशोर या बालक प्रतिनिधि (सभी आयु वर्गो के बालकों या किशोरों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए मासिक चक्रानुक्रम के आधार पर) सदस्य (10) वरीय नागरिक फोरम एवं / या स्थानिक कल्याण संघ से एक प्रतिनिधि सदस्य (11) एक गैर सरकारी संगठन का प्रतिनिधि सदस्य (4) जहाँ स्वैच्छिक संगठन व्यावसायिक और तकनीकी सेवाएँ, जैसे शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, मनोसमाजिक देखरेख, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम तथा कानूनी सहायता प्रदान कर रहे हों, वहाँ प्रबंधन समिति ऐसे स्वैच्छिक संगठनों के प्रतिनिधि को अपनी बैठकों में विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में आमंत्रित कर सकेगी। (5) जिन जिलों में, जिला बाल संरक्षण इकाइयों का गठन नहीं किया गया है, वहाँ जिला मजिस्ट्रेट या कलक्टर या उसके द्वारा नामित व्यक्ति इस समिति का अध्यक्ष होगा। (6) (क) प्रबंधन समिति निम्नलिखित पर विचार करने और उनका पुनर्विलोकन करने के लिए प्रति मास बैठक करेगी – (i)अभिरक्षात्मक देखरेख या संस्था में देखरेख, आवास, कार्यकलाप का क्षेत्र और अपेक्षित पर्यवेक्षण या अंत: क्षेप का स्वरूप; (ii)चिकित्सा सुविधाएँ और उपचार; (iii)भोजन, पानी, स्वच्छता और आरोग्य संबंधी दशाएं; (iv)किशोरों और बालकों के संबंध में मानसिक स्वास्थ्य अंत:क्षेप; (v)किशोरों और बालकों की व्यक्तिगत समस्याएं, विधिक सहायता सेवाओं और संस्थागत समायोजन की व्यवस्था के फलस्वरूप व्यक्तिगत देखरेख योजनाओं की तिमाही समीक्षा; (vi) व्यावसायिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर; (vii)शिक्षा और जीवन कौशल विकास कार्यक्रम; (viii)सामाजिक समायोजन, मनोरंजन, सामूहिक क्रियाकलाप, मार्गदर्शन और परामर्श; (ix)किशोरों और बालकों की आवश्यकताओं के अनुरूप आवासीय कार्यक्रमों की प्रगति, समायोजन और उपांतरणों का पुनर्विलोकन; (x)रिहाई या पुनरुद्धर के उपरांत पुनर्वास कार्यक्रम और पश्चातवर्ती देखरेख सेवाओं के सहयोग से दो वर्ष की अवधि के लिए अनुवर्ती योजना; (xi)रिहाई या पुनरुद्धर पूर्व तैयारियां; (xii)रिहाई या पुनरुद्धर; (xiii) रिहाई या पुनरुद्धर के उपरांत अनुवर्ती कार्रवाई; (xiv)आधारभूत संरचना और उपलब्ध सेवाओं सहित देखरेख के न्यूनतम मानक; (xv)दैनिक कार्यक्रम; (xvi) बालकों की आवासीय अवधि के दौरान उनके शैक्षिक, व्यावसायिक कार्यकलापों, मनोरंजन तथा रूचि के कार्यकलापों में सामुदायिक भागीदारी और स्वैच्छिक सहयोग; (xvii) यह अवलोकन करना कि इस अधिनियम और नियमावली के अधीन यथापेक्षित सभी रजिस्टर संस्था द्वारा रखे जाते हैं, इन रजिस्टरों की जाँच और सत्यापन हो, मासिक पुनर्विलोकन बैठकों में सम्यक रूप से इन पर मुहर लगाई जाए तथा इन पर हस्ताक्षर किए जाएं; (xviii)बाल समितियों से सबंधित विषय; (xix)अन्य कोई मामला, जो अधीक्षक द्वारा उठाया जाए। (ख) अधीक्षक या बाल कल्याण अधिकारी प्रत्येक किशोर या बालक की तिमाही प्रगति रिपोर्ट उसके मामले से सबंधित फाइल में तैयार करेगा और इस रिपोर्ट की एक प्रति यथास्थिति जिला बाल संरक्षण इकाई और बोर्ड या समिति को भेजेगा। (7) प्रबंधन समिति प्रत्येक संस्था में शिकायत-निवारण तंत्र स्थापित करेगी और बाल-सुझाव-पेटी किसी ऐसे स्थान पर रखी जाएगी, जहाँ किशोर या बालक आसानी से आ सकते हों और यह स्थान संस्था के कार्यालय के स्थान से दूर और बच्चों के निवास या कमरों या शयनशालाओं के निकट होगा। (8) (क) बाल-सुझाव-पेटी की चाबी प्रबन्धन-समिति के अध्यक्ष के पास रहेगी और प्रबन्धन समिति का अध्यक्ष या उसके द्वारा जिला बाल संरक्षण इकाई से नामित कोई प्रतिनिधि, बाल समिति के सदस्यों की उपस्थिति में, सप्ताह में एक बार इस पेटी की जाँच करेगा। (ख) यदि कोई ऐसी समस्या या सुझाव हो, जिस पर तत्काल ध्यान दिए जाने की जरूरत है, तो प्रबन्धन-समिति का अध्यक्ष उस विषय में विचार-विमर्श करने और आवश्यक कार्रवाई करने के लिए प्रबन्धन-समिति की आपात बैठक बुलाएगा। (ग) आपात बैठक बुलाने के लिए गणपूर्ति पाँच सदस्यों से होगी, जिनमें बाल समितियों के दो सदस्य, प्रबन्धन समिति का अध्यक्ष, यथास्थिति बाल कल्याण समिति या बोर्ड का सदस्य तथा संस्था का अधीक्षक सम्मिलित है। (घ) संस्था के अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए जाने या उसके विरुद्ध ऐसी कोई शिकायत किए जाने की स्थिति में वह आपात बैठक में भाग नहीं लेगा और उसके स्थान पर प्रबन्धन समिति के अन्य किसी उपलब्ध सदस्य को शामिल किया जाएगा। (ड.) सुझाव पेटी के माध्यम से प्राप्त सभी सुझावों और आपात बैठक में किए गए विनिश्चयों के परिणामस्वरूप की गई कार्रवाई या अपेक्षित कार्रवाई के विषय पर प्रबन्धन समिति की मासिक बैठक में विचार-विमर्श किया जाएगा और इस विषय का पुनर्विलोकन किया जाएगा| (9) प्रत्येक संस्था में बाल-सुझाव-पुस्तिका रखी जाएगी, जिसमें शिकायतें और उन शिकायतों पर प्रबन्धन समिति द्वारा की गई कार्रवाई का ब्यौरा सम्यक रूप से अभिलिखित किया जाएगा और प्रबन्धन समिति की प्रत्येक मासिक बैठक के पश्चात उक्त अनुवर्ती कार्रवाई की सूचना बाल-समिति को दी जाएगी। (10) बोर्ड या समिति छ: मास में कम से कम एक बार बाल-सुझाव-पुस्तिका का पुनर्विलोकन करेगी। बाल समितियां (1) प्रत्येक संस्था का अधीक्षक 6-10 वर्ष, 11-15 वर्ष और 16-18 वर्ष के तीन भिन्न आयु समूहों के लिए बाल समितियां गठित कराएगा और ये बाल समितियां केवल बालकों द्वारा गठित की जाएगी।गृह में स्वास्थ्य एवं सफाई समिति, शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण समिति, खेल-कूद और सांस्कृतिक समिति, मनोरंजन समिति आदि हो सकेंगे। (2) इन बाल-समितियों को निम्नलिखित कार्यकलापों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा:- (क) संस्था की दशा में सुधार; (ख) संस्था में देख-रेख से सबंधित जिन मानकों का अनुपालन किया जा रहा है, उन मानकों का पुनर्विलोकन करना; (ग) दैनिक-कार्यक्रम और आहार मापदंड की तैयारी करना; (घ) शैक्षिक, व्यावसायिक और मनोरंजन योजनाओं को विकसित करना; (ड.) संकट से निपटने में एक दूसरे की सहायता करना; (च) साथियों और देखभाल करने वालों के हाथों दुर्व्यवहार और शोषण की रिपोर्ट करना; (छ) वाल पेपर या न्यूजलेटर या पेटिंग या संगीत या थिएटर के माध्यम से अपने विचारों की सृजनात्मक अभिव्यक्ति; (ज) प्रबन्धन समिति के माध्यम से संस्था का प्रबन्धन। (3) अधीक्षक यह सुनिश्चित करेगा कि बाल समितियां मास अपनी बैठकें करें और अपने कार्यकलापों और कार्यवाहियों का ब्यौरा, रजिस्टर में अभिलिखित करें तथा इसे प्रबन्धन समिति की मासिक बैठकों के समक्ष प्रस्तुत करें। (4) अधीक्षक सुनिश्चित करेगा कि समितियों को कारगर ढंग से अपना कार्य करने के लिए लेखन सामग्री, स्थान और मार्गदर्शन सहित आवश्यक सहायता और सामग्री प्रदान की जाए| (5) स्थानीय स्वैच्छिक संगठन या परामर्शदाता निम्नलिखित कार्य करने में बाल समितियों की सहायता कर सकेगा: (क) उनके नेता का चयन; (ख) मासिक बैठकों का संचालन; (ग) बाल-समितियों के कामकाज के नियम विकसित करना और इनका अनुपालन करना; (घ) अभिलेख और बाल सुझाव पुस्तिका और अन्य सुसंगत दस्तावेज रखना; (ड.) अन्य कोई अभिनव कार्यकलाप। (6) प्रबन्धन-समिति, बाल-समितियों की स्थापना और कामकाज के बारे में अधीक्षक से रिपोर्ट प्राप्त करेगी और अपनी त्रैमासिक बैठकों में इन रिपोर्टों का पुनर्विलोकन करेगी और जहाँ अपेक्षित हो आवश्यक कार्रवाई करेगी। पुरस्कार और उपार्जन (क) अधीक्षक द्वारा संस्था के प्रबन्धन द्वारा समय-समय पर निर्धारित की जाने वाली दरों पर पुरस्कार किसी किशोर या बालक को उसके नियमित कार्य और अच्छे अनुभव व्यवहार के लिए प्रोत्साहन के रूप में प्रदान किया जाएगा; और रिहाई के समय वह पुरस्कार उस किशोर या बालक को लेने के लिए आने वाले उसके माता-पिता अथवा अभिभावक अथवा स्वयं बच्चे को देकर रसीद ली जाएगी। (ख) जब कभी किसी किशोर या बालक के द्वारा ईमानदारी के रूप में अच्छी सेवा, सफाई या परोपकारी व्यवहार किया जाता है तब उसे एक पीत-चिन्ह (येलो टोकन) अधीक्षक द्वारा निर्गत किया जायेगा। जब बुरा कार्य करेगा तब एक बार में एक पीत-चिन्ह वापस ले लिया जायेगा। इस प्रकार जब किसी किशोर के पास 10 पीत चिन्ह हो जाए तब उसे नकद पुरस्कार के साथ सार्वजनिक तौर पर पुरस्कृत किया जायेगा। किशोरों या बालकों से मिलना और उनके साथ सूचना का आदान-प्रदान (1) किशोर या बालक के माता-पिता और रिश्तेदारों को महीने में एक बार उससे मिलने की अनुमति दी जाएगी अथवा विशेष परिस्थिति में अधीक्षक द्वारा यथानिर्धारित मुलाक़ात की अवधि के अनुसार मास में एक से अधिक बार भी बालक से मिलने की अनुमति उसके माता-पिता या रिश्तेदारों को दी जाएगी, सिवाय उन मामलों में जब यह पाया जता हो कि उन माता-पिता या रिश्तेदारों या अभिभावकों ने ही बालक के साथ हिंसा, दुर्व्यवहार और शोषण किया था| (2) संस्था में रह रहे किशोरों या बालकों को पत्रों को प्राप्त करने से रोका नहीं जाएगा और उन्हें यह स्वतंत्रता होगी कि वे यथोचित समय पर जितने चाहे पत्र लिखें, तथा यदि किशोरों या बालकों के माता-पिता, अभिभावक या रिश्तेदारों का पता मालूम हो, तो संस्था यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक किशोर या बालक प्रतिमास अपने अभिभावकों को एक पत्र लिखे, जिसका डाक महसूल संस्था द्वारा ही उपलब्ध कराया जाएगा। (3) अधीक्षक किसी भी किशोर या बालक को या उसके द्वारा लिखे गए किसी पत्र का परिशीलन कर सकेगा तथा पर्याप्त समझे गए कारणों से वह ऐसे पत्र को देने या भेजने से इंकार कर सकेगा और इस प्रयोजनार्थ रखी गई पुस्तक में अपने कारणों को लेखबद्ध करके पत्र समिति को भेजेगा। (4) विशेष परिस्थिति में, या बोर्ड या समिति के आदेशानुसार, अधीक्षक किसी किशोर या बालक को अपने माता-पिता या अभिभावक या रिश्तेदार से दूरभाष पर बातचीत करने की अनुमति देगा। किसी किशोर या बालक की मृत्यु किसी संस्था में किसी किशोर या बालक की मृत्यु होने या उसके द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने की दशा में निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाई जाएगी:- (1) संस्था में किसी किशोर या बालक की अप्राकृतिक मृत्यु होने या उसके द्वारा आत्महत्या कर लिए जाने की दशा में संस्था के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि मृत्यु-समीक्षा और शव-परीक्षण यथाशीघ्र किया जाए। (2) किसी प्राकृतिक कारण से या रोगग्रस्त होने के कारण किसी किशोर या बालक की मृत्यु की दशा में अधीक्षक चिकित्सा अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त करेगा, जिसमें मृत्यु का कारण दर्शाया जाएगा तथा इस मामले की लिखित सूचना तत्काल निकटवर्ती पुलिस थाने, बोर्ड या समिति, राष्ट्रीय अथवा राज्य-बालक-अधिकार-संरक्षण आयोग, जिला-बाल-संरक्षण-इकाई या राज्य-बाल-संरक्षण-इकाई या अन्य किसी सबंधित प्राधिकारी तथा उस किशोर या बालक के माता-पिता या अभिभावकों या रिश्तेदारों को भेजी जाएगी। (3) अकस्मात मृत्यु या हिंसा के परिणामस्वरूप मृत्यु या आत्महत्या या दुर्घटना के कारण मृत्यु होने की दशा में मामला (केस) कार्यकर्ता या परिवीक्षा-अधिकारी या कल्याण-अधिकारी द्वारा इस घटना की सूचना, अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी को तुरन्त दी जाएगी तथा अधीक्षक तत्काल, निकटवर्ती पुलिस थाने, बोर्ड या समिति और मृतक किशोर या बालक के माता-पिता या अभिभावकों या रिश्तेदारों को सूचित करेगा। (4) यदि संस्था में प्रवेश पाने के चौबीस घंटे के भीतर किसी किशोर या बालक की मृत्यु हो जाती है तो संस्था का अधीक्षक उस पुलिस थाने के अधीक्षक, जिसकी अधिकारिता में यह मामला आता हो और जिला चिकित्सा अधिकारी या निकटवर्ती सरकारी अस्पताल तथा मृतक किशोर या बालक के माता-पिता या अभिभावकों या रिश्तेदारों को इस विषय में अविलम्ब सूचित करेगा। (5) अधीक्षक, उस निकटवर्ती मजिस्ट्रेट को, जो मृत्यु समीक्षा कार्यवाही करने के लिए सशक्त हो, तथा यथास्थिति बोर्ड या समिति को तत्काल इस मामले की सूचना देगा। (6) संस्था के अधीक्षक व चिकित्सा अधिकारी उस बालक की मृत्यु की परिस्थितियों का ब्यौरा दर्ज करके एक रिपोर्ट संबधित मजिस्ट्रेट, जिस पुलिस थाने की अधिकारिता में यह मामला आता हो, उस थाने के प्रभारी अधिकारी, समिति और जिला चिकित्सा अधिकारी या जिस निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में निरिक्षण और मृत्यु के कारण की जाँच हेतु किशोर या बालक का शव भेजा गया हो, उस अस्पताल को भेजेंगे और अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी मृत्यु के कारण के विषय में अपने विचार अभिलिखित करेंगे और इसकी रिपोर्ट उस पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी को देंगे, जिसकी अधिकारिता में यह मामला आता हो| (7) ऐसे किसी किशोर या बालक की मृत्यु के कारणों और अन्य ब्यौरों के संबंध में पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली जाँच की कार्रवाई के लिए अधीक्षक और चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध रहेंगे। (8) मृत्यु-समीक्षा होते ही मृतक किशोर या बालक का शव उसके माता-पिता या अभिभावकों या रिश्तेदारों को सौंपा जाएगा अथवा किसी दावेदार के उपस्थित न होने की दशा में उस किशोर या बालक के ज्ञात धर्म के अनुसार अधीक्षक की देखरेख में उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। किशोर या बालक से दुर्व्यवहार और उसका शोषण (1) प्रत्येक संस्था बालकों को दुराचार, उनका शोषण, उपेक्षा और उससे दुर्व्यवहार से निवारण एवं संरक्षा के प्रोटोकॉल जिसका निर्धारण राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर किया जायेगा का पालन किया जाना सुनिश्चित करेगी। (2) संस्था का अधीक्षक यह सुनिश्चित करेगा कि कोई दुराचार, उपेक्षा एवं दुर्व्यवहार नहीं हुआ है और इसमें कर्मचारियों का इस बात से अवगत रहना भी शामिल है कि शोषण, उपेक्षा, दुर्व्यवहार का अर्थ क्या है और ऐसे शोषण, उपेक्षा और दुर्व्यवहार के प्रारंभिक संकेत क्या होते है तथा ऐसे मामलों में कौन सी कार्रवाई करनी है। (3) किसी भी संस्था में बालकों की देखरेख और संरक्षण के उत्तरदायी व्यक्तियों द्वारा उनके साथ शारीरिक, लैगिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार की दशा में, जिसमें उनकी उपेक्षा सम्मिलित है, निम्नलिखित कार्रवाई की जाएगी:- (i) दुर्व्यवहार और शोषण की घटना की सूचना प्राप्त होने पर संस्था के कर्मचारियों द्वारा यह रिपोर्ट तत्काल अधीक्षक को की जानी चाहिए। (ii) शारीरिक, यौन या भावनात्मक दुर्व्यवहार का आरोप जानकारी में आने पर अधीक्षक बोर्ड या समिति के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जो विशेष अन्वेषण का आदेश देगी। (iii) बोर्ड या समिति ऐसे मामले को दर्ज करने तथा ऐसी घटनाओं का सम्यक संज्ञान लेने और आवश्यक अन्वेषण करने का स्थानीय पुलिस थाने या विशेष किशोर पुलिस इकाई को निदेश देगी। (iv) बोर्ड या समिति यह सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगी कि समस्त जाँच कार्य संपन्न हो और किशोर या पीड़ित बच्चे को विधिक-सहायता और परामर्श उपलब्ध कराए जाए। (v) बोर्ड या समिति ऐसे किशोर या बालक को किसी अन्य सुरक्षित संस्था, या स्थान या उपयुक्त व्यक्ति को स्थानांतरित करेगी। (vi) संस्थाओं में किशोरों या बालकों की बाबत किए गए किसी अन्य अपराध की दशा में बोर्ड या समिति उसका संज्ञान लेगी और स्थानीय पुलिस स्टेशन या विशेष किशोर पुलिस इकाई द्वारा किए जाने वाले आवश्यक अन्वेषण की व्यवस्था करेगी। (vii) संस्था का अधीक्षक प्रबन्धन-समिति के अध्यक्ष को भी सूचित करेगा और ऐसी घटना और उस पर की गई अनुवर्ती कार्रवाई की रिपोर्ट की एक प्रति प्रबन्धन-समिति की अगली बैठक के समक्ष रखेगा। (viii) बोर्ड या समिति प्रत्येक संस्था में गठित किशोर समिति से, दुराचार और शोषण सबंधी तथ्य की जाँच हेतु विमर्श कर सकता है और उससे निपटने में संबधित स्वैच्छिक संगठनों, बाल अधिकारों के विशेषज्ञों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों अथवा संकट अंत:क्षेप केन्द्रों से सहायता प्राप्त कर सकेगी। भयंकर रोगों या मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित किशोर या बालक (1) जब इस अधिनियम उपबंधों के अधीन किसी उपयुक्त व्यक्ति या उपयुक्त संस्था की देख-रेख में रखा गया बालक किसी ऐसे रोग या ऐसी शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य समस्या से ग्रसित पाया जारा हो, जिसके लिए लम्बे चिकित्सीय इलाज की आवश्यकता हो या वह किसी स्वापक; नारकोटिक ड्रगद्ध या मन: प्रभावी पदार्थ का आदी हो तो उस बालक को सक्षम-प्राधिकारी के आदेश से अनुमोदित संस्था में रहने की शेष अवधि या ऐसी अवधि के लिए उस प्रयोजनार्थ स्थापित किसी स्थान पर रखा जायगा जिसे जो उस बालक की समुचित चिकित्सा के लिए चिकित्सा-पदाधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र में आवश्यक समझा गया हो। (2) जहाँ उपर्युक्त उप नियम (1) के अधीन बालक के हटाने का आदेश देने वाले सक्षम प्राधिकारी को ऐसा प्रतीत होता हो कि बालक रोग से या शारीरिक या मानसिक शिकायत से चंगा हो गया है, फिर भी अभिरक्षा में रहने योग्य है तो संस्था को भेजने के प्रभारी व्यक्ति को या उस उपयुक्त व्यक्ति को, जिससे या जिनसे वह हटाया गया हो को आदेश करेगा अथवा यदि बालक गृह में रखे जाने लायक नहीं रह गया हो तो उसे उन्मुक्त करने का आदेश करेगा। (3) जहाँ सांसर्गिक या संक्रामक रोग से ग्रसित बालकों के मामले में उपनियम (1) अधीन कार्रवाई कर ली गई हो वहाँ शक्ति सम्पन्न उप नियम (1) के अधीन सशक्त प्राधिकारी उक्त बालक को यथा स्थिति उसके माता-पिता या अभिभावक के पास पुनर्वापसी के पूर्व, समाधान कर होने पर कि ऐसी कार्रवाई उक्त बालक के हित में होगी यथास्थिति उसके माता-पिता या अभिभावक को बुला कर समाधान कर लेगा कि वैसे माता-पिता या अभिभावक बालक को पुन: संक्रमित नहीं करें। (4) जिस स्थान पर सक्षम प्राधिकारी की अधिकारिता के भीतर या निकटवर्ती जिले या राज्य में गंभीर मनोरोगों या शारीरिक रोग और संक्रामण से पीड़ित किशोर या बालक की देखरेख और संरक्षण के लिए इस अधिनियम की धारा 57 के अधीन यथावश्यक संगठन मौजूद नहीं है, उस स्थान पर राज्य सरकार ऐसे किशोर या बालकों की विशेष आवश्यक्ताओं की पूर्ति के लिए यथावश्यक संगठनों की स्थापना करेगी। किशोर या बालकों की अनुपस्थिति की छुट्टी किसी संस्था में रहने वाले किशोर या बालक को संस्था की देखरेख में परीक्षा या नामांकन कराने के लिए या परिवार में विवाह जैसे विशेष अवसरों पर या मृत्यु या दुर्घटना या गंभीर बिमारी के आपातकालीन समय में अवकाश पर जाने के लिए अनुज्ञात किया जा सकेगा। यात्रा के समय को छोड़ कर सामान्य रूप से अधिकतम सात दिनों की अल्पकालिक छुट्टी अधीक्षक द्वारा सिफारिश की जाती है, किन्तु ऐसी छुट्टी बोर्ड या समिति द्वारा मंजूर की जाएगी। किशोर के माता-पिता या अभिभावक या किशोर या बालक की ओर से अधीक्षक छुट्टी के लिए बोर्ड या समिति को आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा, जिसमें छुट्टी का प्रयोजन और छुट्टी की अवधि का स्पष्ट उल्लेख करते हुए किशोर या बालक को छोड़ने का अनुरोध होगा। अनुपस्थिति की छुट्टी के आवेदन पर विचार करते समय बोर्ड या समिति, किशोर या बालक या उनके माता-पिता या अभिभावकों को सुनेगी और यदि बोर्ड या समिति यह समझती है कि ऐसी छुट्टी को मंजूर करना किशोर या बालक के हित में है तो समुचित आदेश दिया जाएगा और बोर्ड या समिति परिवीक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी से एक रिपोर्ट उस दशा में मांग सकेगा, जब किशोर या बालक या सबंधित माता-पिता या अभिभावक द्वारा दी गई प्रारभिक सूचना उस प्रयोजन के लिए पर्याप्त नहीं है। छुट्टी मंजूर करने का आदेश जारी करते समय या पर्यवेक्षण के अधीन मुक्त करते समय सक्षम प्राधिकारी छुट्टी के आदेश के साथ छुट्टी की अवधि तथा शर्तों का उल्लेख करेगा और यदि छुट्टी की अवधि के दौरान इन शर्तों का पालन नहीं किया जाता है तो किशोर या बालक को संस्था में वापस बुलाया जा सकेगा। माता-पिता या अभिभावक किशोर या बालक के मार्गरक्षक की व्यवस्था करेगा और जहाँ यह संभव नहीं है, वहाँ अधीक्षक परिवार के स्थान तक और वहाँ से वापस आने के समय किशोर या बालक के मार्गरक्षण की व्यवस्था करेगा। यदि किशोर या बालक के माता-पिता या अभिभावक मार्गरक्षण के लिए इच्छुक हो किन्तु आर्थिक रूप से सक्षम न हों, तो अधीक्षक उनके लिए नियमों के अधीन यथा अनुमान्य यात्रा खर्च की व्यवस्था करेगा। यदि किशोर या बालक छुट्टी की अवधि के दौरान परिवार से भाग जाता हो तो इनके माता-पिता या अभिभावक द्वारा संस्था के अधीक्षक को तत्काल सूचित किया जाना अपेक्षित है तथा उन्हें ढूढने का प्रयास किया जाना आवश्यक है और यदि वे पाए जाते हैं तो इन्हें तत्काल संस्था में वापस लाया जाएगा| यदि किशोर या बालक चौबीस घंटे के भीतर नहीं पाया जाता हो तो अधीक्षक निकटतम पुलिस थाने और गुमशुदा व्यक्ति-ब्यूरो को इसकी सूचना देगा किन्तु किशोर या बालक के विरुद्ध कोई प्रतिकूल अनुशासनिक कारवाई नहीं की जाएगी और अधिनियम के अधीन अभिकथित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। यदि किशोर या बालक के माता-पिता या अभिभावक छुट्टी की अवधि में इनकी उचित देखरेख नहीं करते हों या निर्धारित अवधि के भीतर किशोर या बालक को संस्था में वापस नहीं लाते हों तो आगे से ऐसे अवसरों पर छुट्टी से इंकार किया जा सकेगा। यदि किशोर या बालक मंजूर की गई छुट्टी के अवसान पर संस्था में वापस नहीं आता है तो बोर्ड या समिति किशोर का प्रभार संभालने तथा उसे संस्था में वापस लाने के लिए ऐसे मामले को, पुलिस को सौंप देगी। ऐसी छुट्टी की अवधि संस्था में किशोर या बालक के ठहरने की अवधि की गणना करते समय संस्था में रहने की अवधि में शामिल होगी, और छुट्टी की अवधि के पश्चात संस्था से अनुपस्थित रहने की अवधि संस्था में रहने की अवधि से अपवर्जित की जाएगी। निरीक्षण (1) राज्य सरकार इस नियमावली के नियम 100 के अधीन गठित चयन-समिति की सिफारिश पर राज्य, जिला या नगर स्तर पर निरीक्षण समिति का गठन तीन वर्षो के लिए करेगी। (2) निरीक्षण समितियां इन संस्थाओं का दौरा करेंगी और संस्था की स्थितियों, सुरक्षा हेतु प्रक्रियाओं की उपयुक्तता, कल्याण एवं स्थायित्व का निरीक्षण करेगी, संस्थाओं द्वारा अनुपालित देखरेख और संरक्षण के मानकों का पुनर्विलोकन करेंगी, बाल अधिकारों के उल्लघंन की किसी भी घटना के प्रति सतर्कता और इस नियमावली के नियम 62 और 63 के अधीन स्थापित प्रबन्धन समिति के कार्यों और बाल समिति के कार्यकलापों की जाँच-पड़ताल करेंगी और समुचित निदेश देंगी। (3) यह दल संस्था के सुधार और विकास हेतु सुझाव भी देगा। (4) इस दल में न्यायिक, राज्य सरकार, बोर्ड या समिति, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग, चिकित्सा या अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों, स्वैच्छिक संगठनों और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधियों सहित सात सदस्य होंगे। (5) प्रत्येक तीन मास में कम से कम एक बार निरीक्षण किया जाएगा। (6) निरीक्षण दौरे में कम से कम तीन सदस्य होंगे। (7) दल संस्थाओं को या तो सूचित करके दौरा करेगा या औचक दौरा करेगा। (8) दल अपने दौरे में बालकों का कल्याण सुनिश्चित करने तथा उनसे बेझिझक सूचनाएँ प्राप्त करने के लिए उनसे बातचीत करेगा। (9) बालकों के बारे में निष्कर्षों और सुझावों पर सभी सम्बद्ध प्राधिकारियों द्वारा अनुवर्ती कार्रवाई की जाएगी। (10) निरिक्षण समिति से प्राप्त अनुवर्ती कार्रवाई रिपोर्ट, निष्कर्ष तथा सुझाव जिला बाल संरक्षण इकाई और राज्य सरकार को भेजे जाएंगे। सामाजिक लेखा-जोखा (1) राज्य सरकार, बोर्ड या समिति या विशेष किशोर पुलिस इकाई, जहाँ अपेक्षित हो, की स्थापना से सम्बद्ध मामलो की, बोर्ड या समिति या विशेष किशोर पुलिस इकाई के कामकाज की, संस्थाओं और कर्मचारियों के कामकाज की, दत्तक ग्रहण अभिकरणों के कामकाज की, किशोर न्याय के बालक अनुकूल न प्रशासन और राज्य में इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से सम्बद्ध अन्य किसी भी मामले का अनुश्रवण और मूल्यांकन करेगी। (2) मानसिक स्वास्थ्य, बालक देख-रेख और संरक्षण एवं लोक दायित्व के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों को शामिल करके एवं इनके सहयोग से सामाजिक लेखा जोखा कराया जाएगा। वापस भेजा जाना और अनुवर्ती कार्रवाई बोर्ड या समिति, किशोर या बालक और इनके माता-पिता या अभिभावक की समुचित सुनवाई और साथ ही साथ पारिवारिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करने के लिए बोर्ड या समिति द्वारा निदेशित पर्यवेक्षण अधिकारियों या बाल कल्याण अधिकारियों की रिपोर्टिं और मामले के निर्णय के लिए बोर्ड या समिति के समक्ष प्रस्तुत किये गए सम्बद्ध कागजात या रिपोर्ट के आधार पर किशोर या बालक को वापस भेजने का आदेश देगी। बोर्ड या समिति प्रपत्र – XXII के अनुसार, मार्गरक्षण के आदेश की प्रति के साथ वापस भेजे जाने के आदेश की प्रति जिला बाल संरक्षण इकाई या राज्य सरकार को भेजेगी जो किशोर या बालक को वापस भेजने के लिए निधि उपलब्ध कराएगी। वापस भेजे जाने के मामले में यथास्थिति कार्यकर्ताओं या परामर्शदाताओं या बाल कल्याण अधिकारियों या पर्यवेक्षण अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत देखभाल योजनाओं के रूप में वापस भेजने की योजना तैयार की जाएगी और यह इस नियमावली के नियम 62 के अधीन स्थापित प्रबंध समिति के पुनर्विलोकन और सिफारिश पर आधारित होगी। पुलिस के अतिरिक्त बोर्ड या समिति भी किशोरों या बालकों को वापस भेजने के लिए गैर सरकारी संगठनों का सहयोग लेगी। किशोरियों या बालिकाओं को महिला मार्गरक्षण दल के साथ भेजा जाएगा। यदि सक्षम प्राधिकारी का निदेश हो तो यात्रा और अन्य आकस्मिक खर्चों सहित किशोरों या बालकों को वापस भेजने के लिए किये गये व्यय जिला बाल संरक्षण इकाई या राज्य सरकार द्वारा वहन किये जाएँगे। जब कोई किशोर या बालक अपने घर वापस नहीं जाना चाहता तो बोर्ड या समिति अपने अभिलेख में इस बात को दर्ज करेगी तथा उसे घर जाने हेतु न तो बाध्य किया जाएगा, और न ही समझाया जाएगा, विशेष रूप से यदि बाल कल्याण अधिकारी या पर्यवेक्षण अधिकारी की सामाजिक जाँच रिपोर्ट से यह निश्चित हो गया हो कि परिवार में पुन: जाना किशोर या बालक के सर्वोत्तम हित में नहीं है, या माता-पिता या अभिभावक किशोर या बालक को पुन: वापस लेने से इंकार करते हो। बालक को वापस भेजने में सहायता हेतु बोर्ड या समिति द्वारा समानुदर्शित बाल कल्याण पदाधिकारियों या परवीक्षा पदाधिकारियों, गैर सरकारी संगठनों द्वारा अनुवर्ती योजना तैयार की जाएगी, जो व्यक्तिगत देखभाल योजना के भाग रूप में होगी। सम्बद्ध बाल कल्याण अधिकारी या परिवीक्षा अधिकारी या गैर-सरकारी संगठन दो वर्षों की अवधि तक तिमाही अनुवर्ती रिपोर्ट बोर्ड या समिति को तथा इसकी एक प्रति उस संस्था के अधीक्षक को भेजेगा, जहाँ किशोर या बालक रह रहा हो। अनुवर्ती रिपोर्ट में किशोर या बालक को वापस भेजने के पश्चात उसकी स्थिति तथा किशोर या बालक की असुरक्षा में उतरोत्तर कमी करने हेतु राज्य सरकार द्वारा पूरी की जाने वाली इनकी जरूरतों के बारे में स्पष्ट उल्लेख होगा। अधीक्षक किशोर या बालक की केस फाइल में अनुवर्ती रिपोर्ट भी रखेगा तथा अगली बैठक में इसे, इस नियमावली के नियम 62 के अधीन गठित प्रबन्धन-समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा। अधीक्षक अनुवर्ती रिपोर्ट की एक प्रति जिला बाल संरक्षण इकाई को भी भेजेगा। जहाँ सरकारी कार्यकर्ताओं या गैर-सरकारी संगठनों के न होने के कारण अनुवर्ती कार्रवाई सम्भव नहीं हो, वहाँ सम्बद्ध जिला-बाल-संरक्षण –इकाई बोर्ड या समिति को जरूरी सहायता प्रदान करेगी। आगन्तुक पुस्तिका प्रत्येक संस्था में आगन्तुक पुस्तिका रखी जाएगी, जिसमें वहाँ आने वाले व्यक्ति अपने आगमन की तारीख और उचित सुझावों को लेखाबद्ध करेंगे। संस्था का अधीक्षक ऐसी प्रत्येक प्रविष्टि की एक प्रति जिला बाल संरक्षण इकाई या निदेशक, समाज कल्याण को भेजेगा। प्रविष्टियाँ भेजते समय अपनी इच्छानुसार अपना स्पष्टीकरण अथवा अन्य अभ्युक्तियाँ दे सकेगा, जिस पर नामनिर्दिष्ट अधिकारी यथावश्यक आदेश जारी कर करेगा। रजिस्टरों का रखा जाना अधीक्षक, अधिनियम द्वारा यथापेक्षित जरूरी तथा इन नियमों द्वारा विनिर्दिष्ट रजिस्टरों और प्रपत्रों को अपने कार्यालय में रखेगा। रजिस्टरों, फाइलों या पुस्तिकाओं की सूची में कम से कम निम्नलिखित सामग्री शामिल होगी:- (क) प्रवेश और उन्मुक्ति रजिस्टर (ख) पर्यवेक्षण (ग) चिकित्सा फाइल या चिकित्सा रिपोर्ट (घ) पोषण आहार फाइल (ड.) स्टाफ रजिस्टर (च) लॉग – बुक (छ) आदेश पुस्तिका (ज) बैठक पुस्तिका (झ) रोकड़ बही (ट) बजट विवरण फाइल (ठ) जाँच रिपोर्ट फाइल (ड) व्यक्तिगत देखरेख योजना के साथ व्यक्तिगत केस फाइल (ण) बाल सुझाव पुस्तिका (त) आंगुतक पुस्तिका (थ) कर्मचारी संचलन रजिस्टर (द) व्यक्तिगत सामान रजिस्टर (ध) प्रबन्धन समिति की कार्यवृत्त रजिस्टर (न) बाल समितियों की कार्यवृत्त रजिस्टर (प) कर्मचारियों और किशोरों या बालकों की उपस्थिति रजिस्टर (फ) परिवाद एवं की गई कार्रवाई का प्रतिवेदन रजिस्टर (ब) अंत: वासियों को पुरस्कार एवं दण्ड रजिस्टर गृहों के कार्मिक या कर्मचारी (1) प्रत्येक गृह के कार्मिकों की संख्या, राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जायेगी। (2) गृह के आकार, क्षमता, कार्यभार, कार्यों के वितरण और कार्यक्रमों की अपेक्षा के अनुसार संस्थागत, संगठनात्मक ढांचा निश्चित किया जाएगा। (3) किसी गृह में पूर्णकालिक कर्मचारियों में आवश्यकतानुसार, अधीक्षक, परिवीक्षा अधिकारी (पर्यवेक्षण गृह या विशेष गृह की दशा में), मामला कार्यकर्ता (बाल गृह या आश्रय गृह या परवर्ती देखरेख संगठन की दशा में), परामर्शदाता, शिक्षक, व्यावसायिक प्रशिक्षण अनुदेशक, चिकित्सीय कर्मचारीवृन्द, प्रशासनिक कर्मचारीवृन्द, अवधायक (केयरटेकर) स्वयंसेवक, भंडारपाल, रसोई या, हेल्पर, धोबी, सफाई कर्मचारी तथा माली शामिल हो सकेंगे। (4) अंशकालिक कर्मचारीवृन्द में मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, व्यावसायिक चिकित्सक और समय-समय पर अपेक्षित अन्य वृत्तिक सम्मिलित हो सकेंगे। (5) गृह के कर्मचारी अधीक्षक के नियंत्रण और सम्पूर्ण पर्यवेक्षण में रहेंगे, जो आदेश द्वारा उनके विनिर्दिष्ट विशिष्ट दायित्वों को अवधारित करेगा और समय-समय पर किए गए ऐसे आदेशों से संबद्ध प्राधिकारी को अवगत रखेगा। (6) अधीक्षक के अधीनस्थ कर्मचारी के कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्धारण अधिनियम की क़ानूनी अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। (7) कर्मचारियों की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा विहित नियमों के अनुसार की जाएगी। (8) 100 किशोरों या बालकों की क्षमता वाली किसी संस्था के लिए निम्नलिखित पैटर्न पर कर्मचारियों की नियुक्ति का सुझाव है:- क्र. सं. कर्मचारी/अधीक्षक पदों की संख्या 1 2 3 1. प्रभारी पदाधिकारी (अधीक्षक) 1 2. परामर्शदाता (हर 50 बालकों के लिए एक) 2 3. परिवीक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी या मामला कार्यकर्ता 2 4. गृह माता या गृह पिता (हर 20 बालकों के लिए एक) 5 5. शिक्षक (अंशकालिक या स्वैच्छिक) 2 6. चिकित्सक 1 7. पारा-चिकित्सकीय कर्मचारीवृंद 2 8. भंडारपाल सह लेखापाल 1 9. कला और हस्तशिल्प-सह –संगीत शिक्षक 1 (अंशकालिक) 10. शारीरिक प्रशिक्षण अनुदेशक-सह –योग प्रशिक्षक 1 (अंशकालिक) 11. वाहन चालक 1 12. रसोईया 2 13. सहायक (हेल्पर) 2 14. सफाई कर्मी 2 15. माली 1 (अंशकालिक) 16. सुरक्षा गार्ड 4 कुल योग 30 (9) शिशुओं को रखने वाली संस्थाओं या 12 वर्ष तक के बच्चे या वैसे बच्चे जो शारीरिक एवं मानसिक रूप से ग्रसित बच्चों की दशा में आया और पारा-चिकित्सकीय कर्मचारियों की व्यवस्था आवश्यकता के अनुसार की जाएगी। संस्था के अधीक्षक के कर्तव्य एवं दायित्व (1) अधीक्षक का प्रमुख उत्तरदायित्व संस्था के रख-रखाव का होगा तथा किशोरों या बालकों और कर्मचारीवृन्द को आवश्यकता पड़ने पर हर समय उपलब्ध रहने के लिए संस्था के परिसर में ही रहेगा और यदि संस्था के परिसर में आवास सुविधा उपलब्ध नहीं हो तो अधीक्षक संस्था के परिसर में आवास सुविधा उपलब्ध कराए जाने तक संस्था के निकट ही किसी स्थान पर रहेगा। (2) अधीक्षक के सामान्य कर्तव्यों और कार्यों में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे: (क) अधिनियम के उपबंधों और उसके अधीन बनाए गए नियमों और आदेशों का अनुपालन; (ख) बोर्ड या समिति के आदेशों का अनुपालन; (ग) किशोरों या बालकों को प्यार, स्नेह, देखरेख, विकास और कल्याण का घरेलू वातावरण प्रदान करना; (घ) संस्था में देखरेख के न्यूनतम मानकों को बनाए रखना; (ड.) भवन और परिसरों का समुचित रखरखाव; (च) संस्था का प्रतिदिन निरीक्षण करना एवं चक्कर लगाना, खाद्य सामग्री के अलावा परोसे जाने वाले भोजन आदि का उचित भंडारण तथा निरीक्षण सहित सुरक्षा उपाय तथा आवधिक निरीक्षण; (छ) किशोरों या बालकों के अनुशासन और कल्याण का पर्यवेक्षण और मोनिटर करना; (ज) यथास्थिति, प्रशिक्षण और उपचार कार्यक्रमों या सुधारात्मक कार्यकलापों सहित सभी संस्थागत कार्यकलापों, कार्यक्रमों तथा प्रचालनों का नियोजन, कार्यान्वयन और समन्वयन; (झ) आकस्मिकताओं से निपटने के लिए त्वरित कार्रवाई जिसमें नियमित अग्निड्रिल और खाली कराने की योजना भी शामिल है; (ट) संस्था के परिसर के भीतर दुर्घटना और आग से बचाव के निवारक उपाय सुनिश्चत करना; (ठ) जल भंडारण, बिजली-संयत्र, आपातकालीन रोशनी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था; (ड) संयंत्रों और उपस्करों का सावधानीपूर्वक संचालन; (ढ) सांसर्गिक या संक्रामक रोगों से पीड़ित किशोरों या बालकों को अलग-अलग रखना; (ण) दैनिक रूटीन का पालन और अनुपालन करना; (त) केस फाइल में किशोर या बालक की मासिक रिपोर्ट को फाइल करना; (थ) संस्था में स्थानीय और राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन; (द) किशोरों या बालकों के भ्रमण या सैर अथवा पिकनिक का आयोजन करना; (ध) बजट तैयार करना तथा वित्तीय ममालों पर नियंत्रण; (न) कार्मिकों को कार्यों का आवंटन; (प) कार्मिकों के कल्याण तथा कर्मचारीवृंद के अनुशासन पर ध्यान देने सहित कार्यालय प्रशासन का पर्यवेक्षण; (फ) सभी अनुशासनिक मामलों में त्वरित, कठोर और विचारशील कार्रवाई; (ब) प्रबन्धन समिति की बैठक आयोजित करना और आवश्यक सहायता प्रदान करना; (भ) अधिनियम और नियमावली के अधीन अपेक्षित सभी अभिलेखों और रजिस्टरों का रखरखाव; (म) जब कभी आवश्यक है, जिला बाल संरक्षण इकाई या राज्य सरकार के साथ सम्पर्क, समन्वयन तथा सहयोग करना; और (य) यह सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक किशोर को विधिक रूप से प्रतिनिधित्व मिल रहा है, तथा नि:शुल्क विधिक सहायता और अन्य आवश्यक सहायता मिल रही है, जिला बाल संरक्षण इकाई के विधि अधिकारी से समन्वय करना और जहाँ कहीं जिला बाल संरक्षण इकाई का गठन नहीं हुआ है, वहाँ जिला या राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सेवाएँ उपलब्ध कराना। (र) बाल समितियों को संगठित करना एवं आवश्यक समर्थन प्रदान करना। (3) अधीक्षक को अन्य दायित्व भी है: यथा (i) नियमों एवं विनियमों के बाल अधिकारों को सभी संभव तरीके से सुनिश्चित करना; (ii) वह कर्मचारियों पर नियंत्रण रखेगा और संस्था के सुचारू तथा प्रभावी कार्य संचालन के लिए अनुदेश निर्गत करेगा; (iii) अधीक्षक यह सुनिश्चत करेगा कि कर्मचारी अपना दायित्व का निर्वाह नियमों एवं विनियमों के अनुसार कर रहे हैं तथा बालकों को गुणात्मक एवं पूरी मात्रा में भोजन, बच्चों की अभिरुचि एवं जरूरत के अनुसार शैक्षिक और व्यावसायिक प्रशिक्षण मिल रहा है, बजट और लेखा पर तथा संस्था के वित्तीय प्रबन्धन, पर नियंत्र रखेगा, संस्था के उत्तरोतर विकास के लिए योजना एवं गैर योजना का प्रस्ताव करेगा; (iv) संस्था के अधीक्षक महत्वपूर्ण गोपनीय दस्तावेजों, विलेखों, एकरारनामा, कर्मचारियों के निजी फाईलों, अभिलेख, बच्चों की कीमती वस्तुओं आदि का अभिरक्षक होगा; (v) अधीक्षक सुरक्षित पेयजल, संस्था में उचित स्वच्छता एवं स्वास्थ्य की स्थितियों, बालक/किशोरों के उचित स्वास्थ्य देखेरेख आदि का उत्तरदायी होगा; (vi) अधीक्षक रात्रि के समय पखवारा में कम से कम एक बार औचक निरीक्षण करेगा तथा यह सुनिश्चित करेगा कि रात्रि के समय संस्था का संस्थागत प्रबन्धन नियत्रित एवं सतर्कता में है; (vii) अधीक्षक अंत:वासियों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध विकसित करेगा तथा विभिन्न समितियों की बैठक का आयोजन करेगा तथा कार्यवाही का संचालन करेगा और यह पर्यवेक्षण करेगा कि समितियों के निर्णय प्रभावी ढंग से कार्यान्वित हों; (viii) आवधिक तौर पर अंत: वासियों एवं कर्मचारियों के परिवार के आगंतुको का संचालन करेगा; (ix) वह प्रत्येक बालक के लिए पुनर्वास योजना को बनाने का उतरदायी होगा। उपाधीक्षक के कर्तव्य उपाधीक्षक के कर्तव्य एवं उत्तरदायित्व निम्न हैं:- (क) स्थापन – आदेशों का अभिरक्षक; (ख) भोजन की तैयारी, भोजन के वितरण का पर्यवेक्षण तथा सबंधित अभिलेखों आदि का रख-रखाव; (ग) क्रियाकलापों में बच्चों की सहभागिता प्रोत्साहित करने के लिए, बच्चों एवं कर्मचारियों के साथ खुली बैठक का संचालन करना; (घ) बच्चों के माता-पिता के साथ अंतर्विकशा संचालित एवं बाह्य व्यक्तियों के साथ बच्चों के संवाद का नियमितीकरण; (ड.) बच्चों के सेमिनार, सांस्कृतिक – कार्यक्रम, बैठक आदि में भाग लेना सुलभ कराना; (क) सकारात्मक सुदृढ़ीकरण/ज्ञानात्मक पुनर्सरचना के उपयोजन को अनुश्रवण करना, गृह माता-पिता या वार्डन के परामर्श स्टेट्स रिपोर्ट तैयार करना; (छ) वाह्य भोजन पदार्थ का अनुश्रवण करना यदि बच्चों के माता-पिता द्वारा आपूरित किया जाता हो; (ज) बाल गृह में आपूरित कपड़े एवं बिछावन का अभिरक्षक; (क) शिविर, पिकनिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्काउट, रेड्क्रोस के कार्य इत्यादि जैसे पाठ्येत्तर क्रियाकलापों का आयोजन; (ख) बच्चों के सुरक्षात्मक अधिकार को सुनिश्चित करना; (ग) बच्चों के विकासात्मक अधिकार को सुनिश्चित करना; (घ) यह सुनिश्चित करना कि बच्चों को मापदंड के अनुसार जरूरी भोजन एवं वस्त्र मिले; (ङ) पानी, बिजली आदि सहित परिसर की स्वच्छता एवं भौतिक आधारभूत संरचना का रख-रखाव सुनिश्चित करना; (च) अधीक्षक द्वारा सौंपे गए कोई अन्य कर्त्तव्य एवं दायित्व, उपाधीक्षक का पद नहीं रहने पर अधीक्षक द्वारा कार्य सम्पादित किये जायेंगे। प्रधानाध्यापक के रूप में उपाधीक्षक के कर्त्तव्य प्रधानाध्यापक के निम्नलिखित कर्त्तव्य है:- (i)अकादमिक क्रियाकलापों की समय सारणी तैयार करना, (ii)बच्चों की शारीरिक एवं व्यक्तित्व विकास हेतु खेल-कूद क्रियाकलापों का आयोजन करना, (iii) मंद गति से सिखने वालों की पहचान करना तथा संस्थाओं के विशेषज्ञों और अधीक्षक के परामर्श से समस्या समाधान के लिए समुचित कदम उठाना, (iv) शिक्षकों के कार्य की संवीक्षा करना तथा बेहतर कार्य संपादन के लिए उनका मार्गदर्शन करना, (v) शिक्षकों के प्रशिक्षण सहित शैक्षिक कार्यक्रमों में नवीन अवधारणा की शुरुआत के लिए संस्थाओं के अधीक्षक को सलाह देना, (vi) शिक्षकों के संबंध में व्यक्तिगत कार्य संपादन पत्र संधारित करना तथा बच्चों के संबंध में ऐसे ही कार्य पत्र संधारित करने हेतु कक्षा शिक्षकों को सलाह देना, (vii) सौंपे गये कोई अन्य कर्त्तव्य एवं दायित्व। अवधायकों (केयर टेकर) के मुख्य दायित्व केयर टेकर के सामान्य कर्तव्य, कृत्य एवं उतरदायित्व निम्नलिखित होंगे:- (क) प्यार और स्नेह के साथ बच्चों से व्यवहार करना, (ख) बच्चों की उचित देख-भाल एवं कल्याण करना, (ग) संस्था के निम्नलिखित नियमों एवं विनियमों के अनुपालन में बच्चों का विनियमन करना, (घ) स्वच्छता एवं स्वास्थ्य का रख-रखाव करना, (ड.) दैनंदिन कार्यों का प्रभावशाली ढंग से कार्यान्वयन करना, (च) गृह की रक्षा-सुरक्षा की व्यवस्थाओं की देखभाल करना, (छ) जब कभी बच्चे गृह से बाहर जाएं उनको मार्गरक्षक प्रदान करना, (ज) बच्चों के भोजन परोसे जाने के समय उपस्थित रहना, (झ) अधीक्षक के द्वारा सौंपे गए कोई अन्य कर्त्तव्य एवं दायित्व। परिवीक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी या केस वर्कर के कर्त्तव्य (1) प्रत्येक प्ररिविक्षा अधिकारी या बाल कल्याण अधिकारी या केस वर्कर बोर्ड या समिति अथवा सबंधित प्राधिकारी द्वारा दिए गए सभी निदेशों का पालन करेगा और वह निम्नलिखित कर्तव्यों, कार्यों और उत्तरदायित्वों का निर्वहन करेगा:- (क) व्यक्तिगत साक्षात्कार तथा परिवार, सामाजिक अभिकरणों और अन्य स्त्रोंतों के माध्यम से किशोर (प्रपत्र -IV ) अथवा बालक (प्रपत्र -XIII) का सामाजिक अन्वेषण करना; (क) बोर्ड या समिति की कार्रवाई में उपस्थित रहना और जब कभी अपेक्षा की जाए, रिपोर्ट प्रस्तुत करना; (ख) किशोरों या बालकों की समस्याओं को स्पष्ट करना तथा संस्थागत जीवन में उनकी कठिनाइयों को हल करना; (ग) अभिविन्यास, मोनिटरिंग, शैक्षिक, व्यावसायिक तथा पुनर्वास कार्यक्रमों में भाग लेना; (घ ) किशोर या बालक तथा प्रभारी अधिकारी के बीच सहयोग और सदभावना स्थापित करना; (ड.) किशोर या बालक के परिवार के साथ सम्पर्क स्थापित करने में सहायता करना तथा परिवार के सदस्यों को भी सहायता प्रदान करना; (च) किशोर या बालक के साथ विचार-विमर्श करके प्रत्येक बालक के लिए देखरेख योजना तैयार करना तथा उसके क्रियान्वयन की कार्रवाई करना; (छ) मुक्ति-पूर्व कार्यक्रम में भाग लेना तथा किशोर या बालक को सम्पर्क स्थापित करने में सहायता करना, जो उनको मुक्त करने के पश्चात भावनात्मक और सामाजिक समर्थन प्रदान कर सकते है; (ज) किशोरों के पुनर्वास और सामाजिक पुन: एकीकरण को सुगम बनाने तथा आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए स्वैच्छिक कार्यकर्ताओं तथा संगठनों से सम्पर्क स्थापित करना; (झ ) किशोरों की मुक्ति के पश्चात अनुवर्ती कार्रवाई तथा उनकी सहायता और मार्गदर्शन करना; (ट) उनके पर्यवेक्षणाधीन किशोरों या बालकों के आवास तथा रोजगार के स्थान या ऐसे विद्यालय का, जिसमें किशोर या बालक पढ़े है, नियमित दौरा करना और प्रपत्र - XXI में यथाविहित पाक्षिक रिपोर्ट पेश करना; (ठ) जहाँ कहीं संभव हो, बोर्ड के कार्यालय से, यथास्थिति, प्रेक्षण गृह, विशेष गृह, बाल गृह अथवा उपयुक्त व्यक्ति तक, किशोर या बालक के साथ जाना; और (ड) केस फाइल और ऐसे रजिस्टरों का रखरखाव, जो समय-समय पर विनिर्दिष्ट किए जाएं। (2) अधिनियम की धारा 13 के खण्ड (ख) के अधीन, पुलिस से या किशोर से या पुलिस के बाल कल्याण पदाधिकारी से सूचना प्राप्त होने पर परिवीक्षा पदाधिकारी, किशोर या बालक के पारिवार इतिहास एवं पूर्व के कार्यकलापों या अन्य यथावश्यक भैतिक परिस्थितियों की जाँच करेगा और तत्सबन्धी सामाजिक अनुसंधान रिपोर्ट प्रपत्र IV या XIII में बोर्ड या समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा। स्रोत: समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार।