योजना का उद्देश्य नागरिकों को अवसर प्रदान करना ताकि वह अपने हित से जुडे़ सामाजिक और आर्थिक विषयों पर खुद विचार करें और गांव के विकास के लिए योजना बनाएं। योजना के मुख्य प्रावधान पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों पर होगी। सबसे नीचे ग्राम पंचायत, उसके ऊपर पंचायत समिति और सबसे ऊपर जिला परिषद् होती है। 20 लाख की जनसंख्या से अधिक के सभी राज्यों में ग्राम, खण्ड एवं जिला स्तर पर पंचायतें बनाई जाती हैं। तीनों स्तर की पंचायतों में पांच साल की अवधि पर चुनाव कराया जाएगा और पंचायत भंग होने पर छह महीने के अन्दर चुनाव कराया जाएगा। ग्राम सभा को संवैधानिक दर्जा प्राप्त है। महिलाओं के लिये एक तिहाई आरक्षण है और अनुसूचित जातियों के लिये आरक्षण जनसंख्या के अनुपात में है। ग्राम पंचायत क्षेत्र के सभी मतदाता ग्राम सभा के सदस्य होते हैं। सरपंच के कार्य ग्राम सभा की बैठक बुलाना और उसकी अध्यक्षता करना। ग्रामीणों की अपेक्षाओं को जिला परिषद्, पंचायत समिति व जिला प्रशासन से लेकर राज्य सरकार तक पहुंचाना व ग्राम पंचायत की सार्वजनिक सम्पत्ति का सदुपयोग करवाना। हर महीने ग्राम पंचायत की कम से कम 2 बैठक सार्वजनिक स्थान या पंचायत घर पर बुलाना व पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्यवाही की रिर्पोट पढ़कर सबके सामने रखना। ग्राम सचिव के कार्य प्रत्येक ग्राम पंचायत में सरकार द्वारा नियुक्त एक ग्राम सचिव होगा जो ग्राम पंचायत तथा सरकार के बीच एक कड़ी के रूप मे कार्य करेगा। ग्राम पंचायत द्वारा पारित प्रस्तावों का रिकार्ड रखना व उनके क्रियान्वयन में सहायता करना। ग्राम पंचायत की कार्यवाही को विवरण पुस्तिका में दर्ज करना। ग्राम पंचायत की शक्तियाँ ग्राम पंचायत स्वयं की जानकारी पर या किसी रिपोर्ट या अन्य सूचना की प्राप्ति पर संबंधित निर्माण अथवा भूमि के मालिक या प्रयोगकत्र्ता को एक निश्चित समय में अतिक्रमण हटाने के लिए आदेश दे सकती है। यदि पंचायत द्वारा नोटिस दिए जाने पर अतिक्रमणकत्र्ता वह रूकावट नहंी हटाता है तो उस पर 100 रू. तक का जुर्माना हो सकता है व उल्लघंन जारी रहने की स्थिति मंे 10 रू. प्रतिदिन जुर्माना हो सकता है जो अधिक से अधिक 1000 रू. हो सकता है। ग्राम पंचायत विकास योजना ग्राम पंचायत विकास योजना गांव के विकास और बुनियादी सेवाओं के लिये एक वर्ष की योजना है, जिसे सरपंच, पंच और ग्रामीण मिलकर बनाते हैं। ग्राम पंचायत विकास योजना में नागरिकों की जरूरतों और उनकी प्राथमिकताओं का उपलब्ध संसाधनों के साथ मेल खाना जरूरी है। यह योजना ग्राम पंचायतों को पारदर्शी और भागीदारी प्रक्रिया से सभी ग्रामवासियों को शामिल कर के बनानी चाहिये। ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है कि वह स्थानीय नागरिकों, गरीबों और हाशिए के लोगों के लिये सही योजना बना कर बुनियादी सेवायें दिलवायें। ग्राम सभा की बैठकें, विशेष बैठकें और कोरम ग्राम सभा की सामान्य बैठकें साल में चार बार सरपंच द्वारा बुलायी जाती है। ग्राम सभा की विशेष बैठकें सरपंच अपनी मर्जी से या पंचायत समिति या 1/10 ग्राम सभा सदस्यों द्वारा लिखित में दिए जाने पर बुलायी जा सकती है। ग्रामसभा की बैठक में सभी पंचों, ग्राम सचिव, खण्ड विकास व पंचायत अधिकारी, शिक्षा अधिकारी इत्यादि का भाग लेना जरूरी है। ग्राम सचिव ग्राम सभा की कार्यवाही को लिखेगा। बैठक की कार्यवाही लिखने के पश्चात सरपंच, पंच तथा उपस्थित सभी लोगों के हस्ताक्षर करवाए जाएंगें या अंगूठे के निशान लगवाए जाएंगें। अधिक जानकारी के सम्पर्क करें जिला स्तर जिला विकास व पंचायत अधिकारी (डी.डी.पी.ओ.) कार्यालय, अतिरिक्त उपायुक्त (ए.डी.सी.) कार्यालय, उपायुक्त (डी.सी.) कार्यालय राज्य स्तर डायरेक्टर (पंचायत विभाग) हरियाणा, पंचायत भवन, प्लाट नंबर-3, सेक्टर 28-सी, चंडीगढ़-160028. फोन नंबर 0172-2654725. स्रोत: एस एम सहगल फाउंडेशन