<h3 style="text-align: justify; "><span>बादली ग्राम पंचायत, अजमेर जिला, राजस्थान: आवासीय क्षेत्र विकास</span></h3> <p style="text-align: justify; "><span>काफी लम्बे समय से ग्राम पंचायत की भूमि पर कब्जा होता हा रहा था | साझेदारों के साथ बड़े लम्बे संघर्ष के बाद ग्राम पंचायत 12 हेक्टेयर पंचायती भूमि से कब्जा हटाने में सफल हो पायी| इस भूमि का प्रयोग समाज के कमजोर वर्गो के लिए आवास (आवासीय क्षेत्र) निर्माण के लिए किया जाएगा | शेष भूमि का प्रयोग पंचायत की आमदनी बढ़ाने के लिए किया जाएगा | कब्जे की समस्या से निजात पाने और विकास के उद्देश्य से पंचायती जमीन प्रयोग में लाने का यह एक प्रयास है |</span></p> <h3 style="text-align: justify; "><span>दूनी ग्राम पंचायत, टोंक जिला, राजस्थान: सामुदायिक ढांचा</span></h3> <p style="text-align: justify; ">ग्राम पंचायत ने लोगों के लिए विभिन्न प्रकार के बुनियादी ढांचों का विकास करने का प्रयास किया | ग्राम पंचायत द्वारा निर्मित व किराए पर दी गई संपत्ति में शामिल है:</p> <ul style="text-align: justify; "> <li><strong>बैंक</strong>: बस स्टैंड परिसर की पहली मंजिल पर 18 क्ष 53 वर्ग फुट की इमारत का निर्माण किया गया | वर्तमान में बैंक द्वारा एटीएम सहित सभी प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध करायी जा रही है | लॉकरों का कार्य प्रगति पर है और भविष्य में ग्रामवासियों के लिए 200 लॉकर उपलब्ध होंगे | इस इमारत का किराया 14,000/- प्रति माह है |</li> <li><strong>सुलभ शौचालय</strong>: पुरुषों व महिलाओं के लिए सुसाध्य शौचालय उदघाटन के लिए तैयार हैं|</li> <li><strong>शॉपिंग कॉम्प्लेक्स</strong>: ग्राम पंचायत ने 85 25 वर्ग फुट के क्षेत्र में एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया है जिसमें 14 दुकानें हैं |</li> <li><strong>हाट बाजार</strong>: हाल ही में पक्के हाट बाजार की मंजूरी दी गई है | यहाँ पर प्लेटफार्म बना कर केवल महिला दुकानदारों को दिए जाएँगे | यह जगह ग्राम पंचायत भवन के ठीक पीछे है |</li> </ul> <h3 style="text-align: justify; "><span>उदवास ग्राम पंचायत, झुनझुन जिला, राजस्थान: सीनियर सेकेंडरी स्कूल का विकास</span></h3> <p style="text-align: justify; ">शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की पुरानी इमारत इतनी बड़ी नहीं थी कि उसमें विद्यार्थियों को सही ढंग से बिठाया जा सके | ग्राम पंचायत ने सरकारी सहायता एवं चंदा इकठ्ठा करके कक्षा के लिए अतिरिक्त कमरे बनाने शुरू कर दिए | आज यहाँ 18 कमरे हैं जबकि इससे पूर्व केवल 8 कमरे थे | चारदीवारी करके मुख्यद्वार लगाया गया है | शौचालय, पेय जल की सुविधाओं व स्टेज के लिए बड़े प्लेटफार्म का भी विकास किया गया है | वर्तमान में अनुसूचित जाति (98) व अनुसूचित जनजाति (10) तथा अन्य पिछड़े वर्गों (61) के विद्यार्थियों सहित 179 बच्चों को भर्ती किया गया है | स्कूल स्टाफ द्वारा सभी प्रकार की गतिविधियों का संचालन कुशलतापूर्वक किया जाता है | ग्राम पंचायत विद्यालय की प्रगति पर नियमित तौर पर निगरानी रखती है |</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>चालीग्राम पंचायत, उदयपुर जिला, राजस्थान: पेय जल योजना</span></h3> <p style="text-align: justify; ">चाली ग्राम पंचायत का मादा गाँव उच्चे स्थान पर स्थित है और वहाँ पर पानी की बहुत कमी है| अत: वहाँ के लोगों ने ग्राम पंचायत को हैंड पम्प लगाने का प्रस्ताव भेजा | चूँकि ग्राम पंचायत के लिए पहले चरण में एक गाँव के लिए भारी रकम लगाने का काम बड़ा मुश्किल था अत: उन्होंने 13वें वित्त आयोग अनुदान के 1.35 लाख रु. से ट्यूब वैल की खुदाई आरंभ कर दी| अगले चरण में 1.50 लाख रु. से पाइप लाइने लगाई गई | इसके बाद पंचायत की मुक्त अनुदान राशि के 1.44 लाख रु. से बिजली कनेक्शन लगाए गए | ग्राम पंचायत ने गाँव में पानी का टैंक बनाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट से राशि आबंटित करने का अनुरोध किया | पानी का टैंक बनाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ने जिला मजिस्ट्रेट के विवेकाधीन फण्ड से 2.30 लाख रु. की राशि मंजूर की | सरपंच ने ग्रामवासियों के साथ बैठक करके टैंक बनाने के लिए निशुल्क भूमि उपलब्ध करायी | टैंक बनाने के बाद ग्राम पंचायत ने इस परियोजना का प्रबंधन एक समिति को सौंप दिया | इस परियोजना के बिजली बिलों का भुगतान जनता जल योजना के तहत किया जाता है | इस प्रकार ग्राम पंचायत ने मादा गाँव के 1200 गाँववासियों के लिए पेयजल आपूर्ति परियोजना का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया |</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>चाली ग्राम पंचायत, उदयपुर जिला, राजस्थान: महिला ग्राम न्यायालय</span></h3> <p style="text-align: justify; ">चाली ग्राम पंचायत की तीन – चौथाई आबादी आदिवासी है | ग्राम पंचायत सावा मंदिर नामक गैर सरकारी संस्था के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के कारण महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों को संबोधित करने के लिए प्रत्येक गाँव में महिलाओं के साथ सामूहिक बैठक का आयोजन करती है | महिलाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं | प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन पाँच पात्र महिलाओं का चुनाव किया गया जो इन असामाजिक कुरीतियों के दुष्प्रभावों को समझती थीं और महिला ग्राम न्यायालय का गठन किया गया | ग्राम पंचायत ने एम.एल.ए. राशि से महिला ग्राम न्यायालय के सामुदायिक केंद्र का निर्माण किया | इस इमारत का नाम महिला सन्दर्भ केंद्र (महिला रैफरेंस केंद्र) रखा गया |</p> <p style="text-align: justify; "><span>महिला ग्राम न्यायालय की बैठक प्रत्येक सप्ताह बुलाई जाती है | प्रत्येक महिला 11/- रु. के शुल्क सहित घरेलु हिंसा के संबंध में ग्राम पंचायत के पास शिकायत दर्ज कर सकती है | महिला न्यायालय द्वारा दोषी को एक सप्ताह के भीतर बुलाया जाता है | यदि दोषी स्वयं हाजिर हो जाए तो उसे दण्ड स्वरूप 101/- रु. जुर्माने सहित हिंसा न करने के निर्देश दिए जाते हैं | यदि दोषी महिला न्यायालय में हाजिर न हो तो समिति स्वयं उसके घर जा कर उसे समझा देती है | यदि इसके बाद भी वह हिंसा करने पर उतारू रहे तो ग्राम पंचायत व गाँव के अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तियों के साथ मिल कर महिला न्यायालय परस्पर समझौता कराने का प्रयास करता है |</span></p> <p style="text-align: justify; "><span>ग्राम पंचायत नुक्कड़ नाटकों के जरिए घरेलु हिंसा के खिलाफ शिकायत करने के लिए गाँव की महिलाओं को प्रोत्साहित करती है | आज महिलाओं के प्रति अपराधों की दर में कमी आयी है |</span></p> <p style="text-align: justify; "><strong>स्रोत: भारत सरकार, <a class="ext-link-icon" href="http://www.panchayat.gov.in/hi" target="_blank" title="अधिक जानकारी के लिए ">पंचायती राज मंत्रालय</a></strong></p>