भूमिका स्वर्ण जयन्ती ग्राम स्वरोजगार योजना(एस.जी.एस.वाई.) की सफलता के लिए विभिन्न अभिकरणों के बीच घनिष्ट सम्बद्ध जरूरी है। यह योजना पंचायत समिति और अन्य पंचायती राज, संस्थान, बैंक, सरकारी विभाग और स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से डी. आर. डी. ए. द्वारा क्रियान्वयन किया जाता है। डी. आर. डी. ए. से अपेक्षा की जाती है कि वह कार्यक्रम के कार्यान्वयन में पर्याप्त समन्वय स्थापित करेगा। एस. जी. एस. वाई. में ग्राम सभा विवेचनात्मक भूमिका अदा करेगी। ग्राम सभा सबसे पहले बी.पी.एल. परिवारों की सूची स्वीकृत करेगी। इसके अलावे, प्रत्येक साल के शुरू में 3 सदस्य वाली समिति सम्भावित स्वरोजगारियों की पहचान प्रत्येक प्रमुख क्रियाकलाप के लिए करेगी। स्वरोजगारियों की सूची, जिसे बैंक द्वारा ऋण के लिए स्वीकृत की गई है, ग्राम सभा के सामने रखी जाएगी। ग्राम पंचायती, एस. जी. एस. वाई. या दुसरे कार्यक्रम से मुख्य क्रियाकलापों के लिए भी ढाँचा जरूरी है, उसके लिए वित्त दिलाने के लिए कदम उठाएगी। क्रियान्वयन ग्राम पंचायत सक्रिय रूप से एस. जी. एस. वाई. के निष्पादन का अनूश्रवण करेगी और विशेषकर ऋण के नियमित भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। जिला स्तरीय तकनीकी दल द्वारा क्रियाकलाप की सूची को भेजने के पहले बी.डी.ओ. पंचायत समिति द्वारा सूची की स्वीकृति प्राप्त करेगा। प्रखंड एस. जी. एस. वाई. द्वारा हरेक महीना भेजे गए प्रतिवेदनों की समीक्षा पंचायत समिति करेगी। पंचायत समिति वसूली प्रगति पर विशेष ध्यान देगी। जिला परिषद अपनी बैठकों में एस.जी.एस.वाई. की प्रगति की समीक्षा करेगी। एस.जी.एस. वाई. के क्रियान्वयन में बैंक अधिकारी आलोचनात्मक भूमिका अदा करती है। यह योजना ऋण-सह- अनुदान कार्यक्रम है। ऋण एक मुख्य कारक है और अनुदान एक छोटा सहायक कारक होगा। कार्यक्रम के क्रियान्वयन के हर स्तर पर मुख्य क्रियाकलापों की पहचान, स्वयं सहायता समूहों का गठन, व्यक्तिगत स्वरोजगारियों की पहचान आदि सबसे महत्वपूर्ण है। स्वरोजगारियों के चुनाव में बैंक का निर्णय निर्णायक होगा। एस. जी. एस. वाई के (वित्तीय) सरकारी विभाग से सहयोग प्रमुख सरकारी विभागों को महत्वपूर्ण भूमिका (क्रियान्वयन और निजी क्षेत्रीय क्रियाकलापों- के समूचे अभ्यास में) अदा करना है। एस. जी. एस. वाई. में कार्यान्वयन अभिकरणों एवं नीति विभागों के बीच बहूत घनिष्ठ सहयोग जरूरी है। यह सहयोग मुख्य क्रियाकलापों के चुनाव और परियोजना प्रतिवेदन के निर्माण से शुरू हो जाती है। नीति विभाग मुख्य क्रियाकलापों की सफलता के लिए जरूरी संरचना निर्माण के लिए उत्तरदायी है। इसके अलावे जब बैंक ऋण स्वीकृति प्रदान कर देती है तब नीति विभाग को यह सुनिश्चित करनी होगी की स्वरोजगारियों को सभी सुविधाएँ एवं तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान की जाए। नीति विभाग यह भी सत्यापित करेगी कि स्वरोजगारियों के पास आवश्यक दक्षता के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था है। नीति विभाग को प्रशिक्षण के गुण पर खुद संतोष होनी चाहिए। वे लोग स्वरोजगारियों को उपयुक्त संस्थान में विधिवत प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था के लिए डी. आर. डी. ए. को सहायता करेगा। विकास का अनूश्रवण और स्वरोजगारियों की अपेक्षित आय का दायित्व उन्हीं पर होगा। स्वयं सेवी संस्थाओं को भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करनी है। वे लोगों को स्वयं सहायता समूहों का निर्माण और देख- रेख के साथ- साथ स्वरोजगारियों की प्रगति का अनुश्रवण करने में सम्मिलित कर सकते हैं। जहाँ संभव है प्रौद्योगिकी व्यवस्था में सहायता और उत्पाद की गुनवता में भी स्वयं सेवी संस्था की प्रकृति और उनकीक्षमता पर निर्भर करेगी। इसलिए ध्यान में यह रखना जरूरी है कि कार्यक्रम में उन्हीं स्वयं सेवी संस्थानों का सहयोग लिया जाय जो सहयोग देने में सामर्थ्य हैं। अनुश्रवण स्वरोजगारी ने गरीबी रेखा को पार किया। इसे सुनिश्चित करने ले लिए यह काफी नहीं कि उसे अनुदान एवं ऋण द्वारा वित्त प्रदान किया गया हो। उसका सम्पति विकास के प्रबंधन का बढ़ती हुए आय सृजन के लिए लगातार अनुवर्तन अनुश्रवण एवं मूल्यांकन किया जाना है। स्वरोजगारी को प्रदान किया गया परियोजना का अनुवर्तन डी.आर.डी.ए./ प्रखंड अधिकारीयों एवं बैंक अधिकारीयों एवं बैंक अधिकारीयों के द्वारा किया जाना है जिससे यह पता लगे कि स्वरोजगारी ठीक से अपना सम्पति को प्रबंध कर रही है और प्रक्षिप्त आय सृजन के योग्य है। अगर स्वरोजगारी किसी भी तरह का कठिनाइयों का सामना कर रहा है तो उसे हटाने का सभी प्रयास करना होगा। सभी स्वरोजगारी को विकास पत्रिका देना होगा। प्रपत्र की दो प्रति बनानी होगी जिसका एक प्रति स्वरोजगारी को और दूसरा प्रखंड मुख्यालय में रखा जाएगा। हरेक साल का अंत में खोज के आधार पर संपत्ति का भौतिक सत्यापन भी किया जा सकता है। ऐसे सत्यापन परिणाम को अगले साल के वार्षिक योजना में समविष्ट करना चाहिए। अनुवर्तन और अनूश्रवण डी. आर. डी. ए., बी. डी. ओ., बैंक शाखाओं आदि अभिकरणों द्वारा विभिन्न स्तरों से भी किया जायेगा। एस.जी.एस.वाई. के क्रियान्वयन का निष्पादन हरेक स्तर में लगातार अनुश्रवण द्वारा किया जाएगा प्रखंड एवं जिला स्तरों पर यह निष्पादन प्रतिवेदन और सम्पतियों का भौतिक सत्यापन द्वारा किया जाएगा। केंद्र स्तर पर निष्पादन मासिक विकास प्रतिवेदन के आधार पर लगातार अनुश्रवण किया जाएगा। राज्य डी.आर.डी.ए. द्वारा जिलावार सूचनाएं प्राप्त कर केंद्र को भेजेगी जो निम्नलिखित होगी। क) मासिक प्रगति प्रतिवेदन- मासिक प्रगति प्रतिवेदन हरेक परवर्ती महीना के 20 तारीख तक केंद्र को भेजना होगा। मासिक प्रगति प्रतिवेदन भेजने के लिए प्रपत्र राज्यों द्वारा संचारित किया जायेगा। ख) वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन – वित्तीय वर्ष का अंतिम महिना अर्थात मार्च महिना अंतिम वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन के लिए माना जाएगा। राज्य में एस.जी.एस.वाई. के क्रियान्वयन पर विशेष विवरण के साथ वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन विशेषकर निम्नलिखित विन्दूओं पर केंद सरकार को भेजेगी :- वर्ष के अंदर भौतिकी और वित्तीय प्रगति विभिन्न क्रियाकलापों के लिए अनुबंध प्रदान किया गया और लाभ उठाया गया। कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर साधारण टिप्पणी सुझाव के साथ, अगर कोई है। प्रखंड/ डी.आर.डी.ए. स्तर पर एस.जी.एस.वाई. का गुणात्मक अनुश्रवण कार्यक्रम का प्रभावकारी क्रियान्वयन के लिए क्षेत्र निरिक्षण द्वारा भौतिकी अनुश्रवण महत्वपूर्ण है। राज्य मुख्यालय में जो अधिकारी एस.जी.एस.वाई. से संबंध रखते हैं जिलों का नियमित भ्रमण द्वारा कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर संतोष प्राप्त करेगें। इसी तरह जिला, अनुमंडल एवं प्रखंड स्तर के अधिकारी आंतरिक क्षेत्रों का भ्रमण द्वारा कार्यक्रम के सभी पहलुओं का निकट से अनूश्रवण करेंगे। अनुश्रवण के समानुरूप पद्धति के विकास एवं एस.जी.एस.वाई. के क्रियान्वयन के लिए प्रखंड/ डी.आर.डी.ए. स्तर पर क्षेत्र भ्रमण द्वारा सम्पति का भौतिक सत्यापन के साथ-साथ स्वरोजगारियों के परिवार की आय सृजन की जाँच के लिए विभिन्न स्तर के अधिकारीयों को निम्नलिखित तालिका के सुझाव दिए गए हैं। जिला दंडाधिकारी/ सभापति डी.आर.डी.ए. -10 परिभ्रमण प्रत्येक महीना परियोजना निदेशक - 20 परिभ्रमण प्रत्येक महीना परियोजना पदाधिकारी परियोजना अर्थशास्त्री - 40 परिभ्रमण प्रत्येक महीना अनुमंडल अधिकारी - 20 परिभ्रमण प्रत्येक महीना बी.डी.ओ. - 20 परिभ्रमण प्रत्येक महीना ए.डी.ओ. - 20 परिभ्रमण प्रत्येक महीना जिलाधीश/ डी.आर.डी.ए. सभापति नीति विभाग के अधिकारीयों के लिए उपयुक्त क्षेत्रभ्रमण की संख्या निर्धारित करेगी और उनका जाँच प्रतिवेदन प्राप्त करेगी। इस जाँच प्रतिवेदन का निर्माण करेगी। यह प्रतिवेदन डी.आर,डी.ए. की प्रबंध बैठकी में चर्चा की जाएगी। जब कभी जरूरी हो शोधक करवाई भी करेगी। डी.आर.डी.ए. भी राज्यों को त्रैमासिक समेकित प्रतिवेदन मुख्य अवलोकन पर समीक्षा सारांश और अनुवर्ती कारवाई यदि लिया गया है के साथ भेजेगा। राज्य स्तर एस.जी.एस.वाई. समिति गुणात्मक अनुश्रवण निर्गमन उपलब्धि को मान्य मुद्दा के रूप में निरीक्षण करेगी। निर्वाचित सभापति/परियोजना निदेशक को भी इस बैठकी में बुलाएगा। स्रोत : जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची