भूमिका भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए माँग आधारित एवं जन केन्द्रित अभियान है, जिसमें लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी आदतों को बेहतर बनाना, स्व सुविधाओं की माँग उत्पन्न करना और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध करना, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता की प्रगति में तेजी लाने के लिए भारत सरकार ने टीएससी में आमूल-चूल बदलाव किए गए हैं, जिसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में अब निर्मल भारत अभियान (एनबीए) कहा गया है। निर्मल भारत अभियान का उद्देश्य चरणबद्ध, सेचूरेशन मोड में समस्त समुदायों में स्वच्छता सुविधाओं की व्यवस्था करके मनोवृत्ति में स्थायी बदलाव लाना है जिसका परिणाम ‘निर्मल ग्राम’ के रूप में सामने आएगा। नई कार्यनीति सामुदायिक सेचूरेशन दृष्टिकोण अपनाकर ग्रामीण भारत को ‘निर्मल भारत’ में बदलने की होगी। वैयक्तिक पारिवारिक शौचालय इकाइयों के लिए वित्तिय प्रोत्साहन के प्रावधान को व्यापक बनाया गया है ताकि सामुदायिक परिणाम हासिल करने की दृष्टि से सभी बीपीएल परिवारों के साथ-साथ सभी एपीएल परिवारों, जो अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, लघु एवं सीमांत किसान, भूमिहीन श्रमिक वाले परिवार, शरीरिक रूप से विकलांग और महिला प्रमुख परिवार हैं, को इसमें कवर किया जा सके। सभी पात्र लाभार्थियों के लिए शौचालयों के निर्माण हेतु दी जाने वाले वित्तीय प्रोत्साहन राशि बढ़ाई गई है। सृजित की गई स्वच्छता सुविधाओं को बहाल रखने के लिए ग्राम पंचायतों में जल की उपलब्धता के मुद्दे का समाधान करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम की योजना के साथ संयुक्त दृष्टिकोण अपनाया गया है। संशोधित कार्यनीति के तहत् पंचायती राज संस्थयों (पीआरआई) सहित सभी स्टेकहोल्डरों और क्षेत्र स्तर पर कार्यान्वयनकर्ताओं के क्षमता निमार्ण के लिए निधियां निर्धारित की गई है। स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास और पंचायती राज जैसे अन्य राज्य विभागों के साथ तालमेल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविष्ट (आशा) और आंगनवाड़ी कर्मियों को वित्तीय रूप से प्रोत्साहित करने के प्रावधान किए गए हैं। राज्य स्व-सहायता समूहों, महिलाओं के समूहों और प्रतिष्ठित गैर-सरकारी संगठनों को स्वच्छता को बढ़ावा देने के कार्य में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। ग्राम सभाओं के जरिए एनबीए की कार्यान्वयन प्रक्रिया में अब सामाजिक लेखा परीक्षा और सक्रिय लोगों की भागीदारी का प्रावधान है। स्वच्छता सुविधाएं सृजित करने के लिए ग्रामीण परिवारों को निधियां उपलब्ध कराने में मदद करने हेतु महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के साथ तालमेल किया गया है। विकल्पों और संकेन्द्रित वित्तपोषण का रोस्टार तैयार करके ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (एसएलडब्ल्यूएम) के घटक को तरजीह दी गई है। निर्मल भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य निर्मल भारत अभियान मुख्य उद्देश्य प्रचार-प्रसार के द्वारा कम लागत तथा सार्थक तकनीकों को प्रोत्सहित कर घरेलू शौचालय की माँग उत्पन्न करना एवं:- सभी परिवारों में निजी स्वच्छ शौचालय का निर्माण, उपयोग व (खुले में शौच मुक्त) ग्राम बनाना।सभी विद्यालय में स्वच्छता परिसर निर्माण एवं उपयोग ।सभी आंगनबाड़ी में शौचालय एवं उपयोग तथा स्वच्छता सम्बन्धी सभी आदतों में व्यवहार परिवर्तन।ग्राम में सम्पूर्ण स्वच्छता के लिए ठोस व तरल अवशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान देते हुए समुदाय प्रबंधित पर्यावरणीय स्वच्छता पद्धति विकसित करना।ग्रामीण क्षेत्र के जीवन स्तर में सुधार। निर्मल भारत अभियान(एनबीए ) की प्राथमिकताएँ व्यक्तिगत शौचालय के निर्माण हेतु बी.पी.एल. परिवार के साथ प्रतिबंधों सहित ए.पी.एल. परिवारों को भी प्रोत्साहन राशि। अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवारछोटे एवं मध्यम किसान परिवार,भूमिहीन वास भूमि सहित बसाया गया मजदूर परिवार। विशिष्ठ व्यक्ति (शारीरिक रूप से असक्षम) द्वारा परिपोषित परिवार। महिला प्रधान (द्वारा परिपोषित) परिवार। सरकारी विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में स्वच्छता सुविधा। पंचायतों में कूड़े-कचरे एवं गंदे पानी (ठोस व तरल पदार्थ) का प्रबंधन। पंचायती राज संस्थानों, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों एवं स्थानीय संस्थानों का क्षमता संवेर्धन । महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण सुनिश्चित रोजगार योजना(मनरेगा) के साथ अभिषरण(कन्वर्जेन्स)। वर्ष 2022 तक निर्मल भारत का निर्माण । हमें स्वच्छता की आवश्यकता क्यों है? स्वच्छता का एक अर्थ आरोग्य विधा हैं, स्वच्छता स्वास्थ्य का मूल भुत आधार है ।स्वच्छता का आशय, मात्र व्यक्तिगत स्वच्छता व्यवहारों को अपनाना और स्वयं को स्वास्थ्य रखने से ही नहीं हैं वरण एक व्यापक अर्थ में पुरे वातावरण को स्वच्छ रखने से हैं इसलिए आवश्यक हैं कि ग्राम में खुले में शौच की प्रथा को समाप्त किया जाय।हम तभी सुरक्षितअं जब कि पूरा गाँव खुले में शौच से मुक्त हो।ग्राम में खुले में शौच की प्रथा को समाप्त करने के लिए घरेलू प्रक्रिया छोड़कर समुदाय आधारित प्रक्रिया अपनानी चाहिए। (पल्स पोलियो अभियान कि तरह)लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए स्वच्छता आवश्यक है।स्वच्छता अपनाने एवं वातावरण को स्वच्छ रखने से कुपोषण की दर, मातृत्व दर में कमी होती है।स्थायी स्वच्छता के लिए गुणवत्ता परक सुविधाएँ, सही उपयोग की जानकारी एवं व्यवहार में परिवर्तन आवश्यक है।स्वच्छता जिंदगी जीने का तरीका है और अच्छे एवं उत्तम स्वास्थ्य, लम्बी आयु, उचित पोषण और गुणवत्तापूर्ण जीवन में वृद्धि करने का साधन है।स्वच्छता महिलाओं के सम्मान के लिए, सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए भी आवशक है।स्वच्छता सामाजिक स्वस्थ्य , मर्यादा एवं देश के सम्मान व गरिमा के लिए भी आवशक है।स्वच्छता एवं शौचालय अपनाने से बच्चों, बुजगों एवं महिलाओं को सुगमता रहती हैं साथ ही आपात स्थिति में भी सुविधा है। निर्मल भारत अभियान के तहत स्वच्छता के सात मुख्य आयाम हैं पीने के पानी का रखरखाव एवं सुरक्षित उपयोग बेकार पानी की निकासी मानव मल का सुरक्षित निपटान घर एवं भोजन की स्वच्छता ग्रामीण स्वच्छता स्वच्छता के सात मुख्य आयाम को प्राप्त करने की प्रथम महत्वपूर्ण सीढ़ी खुले में शौच स्व पूर्ण मुक्ति एवं शत प्रतिशत स्वच्छकर ,जलबंध, लिच-पिट शौचालय का प्रयोग शौचालय स्वच्छकर शौचालय मानव मल के समुचित निपटान का सबसे सुरक्षित साधन स्वच्छकर शौचालय हैं। खुला मानव मल फैलाने और बिमारियों का कारण है, और जब इसके साथ पानी, हवा और धूप का मिलान होता है तो यह और अधिक हानिकारक हो जाता हैं। सुरक्षित मानव मल का निपटान ना होना. जल स्रोत के प्रदूषण का मुख्य कारण हैं, क्योंकि मक्खी और अन्य कीटाणुओं के पनपने का आधार है एवं इनके द्वारा गंदगी एवं कीटाणु फैलाते भी हैं। जल-बंध स्वच्छकर शौचालय एक ऐसा विकल्प है हो बीमारी पैदा करने वाले कीटाणु को फैलाने में अवरोध करता है, जिसमें मानव मल को मक्खी के सम्पर्क में न आने देता हैं और मल का निष्पादन स्वच्छ तरीके से होता है। वातावरण दूषित नहीं होता है। इस तरीके से जल-बंध शौचालय ही स्वच्छकर शौचालय का सबसे आसान विकल्प है। शुष्क शौचालय (बकेट शौचालय) से मानव द्वारा मैला ढुलाई की प्रथा को बढ़ावा देता हैं, साथ ही यह शौचालय, स्वच्छकर शौचालय की श्रेणी में नहीं आता है। इससे संक्रमण क खतरा बरकरार रहता है। भारत सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में बकेट शौचालय निर्माण की अनुमति नहीं है। स्वच्छकर जल-बंध शौचालय से मल का समुचित निपटान संभव है। ग्रामीण क्षेत्र के लिए स्वच्छकर जल-बंध शौचालय महत्वपूर्ण हैं ग्रामीण क्षेत्र में अधिकांश लोग खुले में शौच के लिए जाते , जो सभ्य समाज ले लिए शर्मनाक स्थिति है। खुले में शौच करनेवालों में बच्चों के संख्या भी बहुत अधिक है, बच्चों का मल भी एक वयस्क व्यक्ति के मल के समान नुकसानदायक है। खुला मानव मल संक्रमण फैलाने आवर बिमारियों का कारण है, पानी, हवा और धूप के मिलान से यह और अधिक हानिकारक हो जाता है, क्योंकि यही मक्खी और अन्य कीटाणुओं के पनपने का आधार है। सुरक्षित मानव मल का उचित निपटान न होना, जल स्रोत के प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। खुले में शौच की परम्परा महिलाओं को एकांत प्रदान नहीं करती है। इसलिए उन्हें सूर्योदय के पहले या सूर्यास्त के बाद शौच के लिए पड़ता है, और यदि बीच में आवश्यक हुआ तो उन्हें इसे रोकना पड़ता है, जो कि स्वस्थ्य के लिए हानिकारक है। अधिकांशत: महिलाएँ सुरक्षा की दृष्टि से समूह में खुले में शौच हेतु जाती हैं, संक्रमण फैलाने का खतरा अधिक होता है। बूढ़े और बीमार व्यक्तियों को बाहर शौच के लिए जाना और भी कठिन है, विशेषकर बारिश के दौरान अथवा आपातकाल में स्थिति और ख़राब होती है। मनरेगा अभिषरण के साथ शौचालय निर्माण में मजदूर एवं सामग्री की आवश्यकता मॉडल नम्बर -1 मजदूरों की आवश्यकता: 1. राजमिस्त्री : कुल 6 अदद 2. मजदूर : कुल 12 अदद 3. प्लम्बर : कुल 1 अदद सामग्री की आवश्यकता: 1.पैन : 1 अदद 2. पांवदान : 1 जोड़ा 3. 4” पी.वी.सी. पाईप : 2 मीटर 4. ईंट :1189 अदद 5. सीमेंट : 6 बोरा 6. बालू : 1.89 घनमीटर या 67 घनफुट 7. मिट्टी : 0.31 घनमीटर या 11 घनफुट 8. छड़ : 8 एम.एम.= 28 किलोग्राम 9. छत : आ.सी.सी. स्लैब 10. लकड़ी का दरवाजा : 1 अदद साइज (2’-6’’xX6”) कुल लागत : 10183.00 रुपया मॉडल नम्बर -2 मनरेगा अभिषरण के साथ शौचालय निर्माण में मजदूर एवं सामग्री की आवश्यकता : मजदूरों की आवश्यकता: 1. राजमिस्त्री : कुल 6 अदद 2. मजदूर : कुल 12 अदद 3. प्लम्बर : कुल 1 अदद सामग्री की आवश्यकता: 1.पैन : 1 अदद 2. पांवदान : 1 जोड़ा 3. 4” पी.वी.सी. पाईप : 2 मीटर 4. ईंट :1262 अदद 5. सीमेंट : 5 बोरा 6. बालू : 2 घनमीटर या 70 घनफुट 7. मिट्टी : 0.34 घनमीटर या 12 घनफुट 8. छड़ : 8 एम.एम.= 28 किलोग्राम 9. छत : आ.सी.सी. स्लैब 10. लकड़ी का दरवाजा : 1 अदद साइज (2’-6’’xX6”) कुल लागत : 11099.00 रुपया मॉडल नम्बर -3 मनरेगा अभिषरण के साथ शौचालय निर्माण में मजदूर एवं सामग्री की आवश्यकता : मजदूरों की आवश्यकता: 1. राजमिस्त्री : कुल 5 अदद 2. मजदूर : कुल 10 अदद 3. प्लम्बर : कुल 1 अदद सामग्री की आवश्यकता: 1.पैन : 1 अदद 2. पांवदान : 1 जोड़ा 3. 4” पी.वी.सी. पाईप : 2 मीटर 4. ईंट :1 अदद 5. सीमेंट : 5 बोरा 6. बालू : 2.26 घनमीटर या 80 घनफुट 7. मिट्टी : 0.19 घनमीटर या 1 घनफुट करीब 8. छड़ : 8 एम.एम.= 16 किलोग्राम 9. छत : नारियाल्स टाइल्स 10. लकड़ी का दरवाजा : 1 अदद साइज (2’-6’’xX6”) कुल लागत : 9745.00 रुपया मॉडल नम्बर -4 मनरेगा अभिषरण के साथ शौचालय निर्माण में मजदूर एवं सामग्री की आवश्यकता : मजदूर की आवश्यकता: 1. राजमिस्त्री : कुल 6 अदद 2. मजदूर : कुल 13 अदद 3. प्लम्बर : कुल 1 अदद सामग्री की आवश्यकता: 1.पैन : 1 अदद 2. पांवदान : 1 जोड़ा 3. 4” पी.वी.सी. पाईप : 2 मीटर 4. ईंट :1 248अदद 5. सीमेंट : 6 बोरा 6. बालू : 1.89घनमीटर या 67 घनफुट 7. मिट्टी : 0.338 घनमीटर या 12 घनफुट करीब 8. छड़ : 8 एम.एम.= 16 किलोग्राम 9. छत : आ.सी.सी. स्लैब 10. दरवाजा एगिल आयरन एवं जी.सी.आई.सीट : 1 अदद साइज (2’-6’’xX6”) कुल लागत : 13082.00 रुपया मॉडल नम्बर -5 मनरेगा अभिषरण के साथ शौचालय निर्माण में मजदूर एवं सामग्री की आवश्यकता : मजदूरों की आवश्यकता: 1. राजमिस्त्री : कुल 3 अदद 2. मजदूर : कुल 9 अदद 3. प्लम्बर : कुल 1 अदद सामग्री की आवश्यकता: 1.पैन : 1 अदद 2. पांवदान : 1 जोड़ा 3. 4” पी.वी.सी. पाईप : 1 मीटर 4. ईंट :819 अदद 5. सीमेंट : 2 बोरा 6. बालू : 1.17 घनमीटर या 41 घनफुट 7. मिट्टी : 0.102 घनमीटर या 4 घनफुट 8. छड़ : 8 एम.एम.= 8 किलोग्राम 9. छत : नारियाल्स टाइल्स (खपड़ा) 10. लकड़ी का दरवाजा : 1 अदद साइज (2’-6’’xX6”) कुल लागत : 5411.00 रुपया राशि के लिए प्रपत्र एवं आवेदन का प्रारूप वर्ष - ग्राम :........................................................... पंचायत: ........................................................ प्रखंड: ............................................................. गाँव की सामान्य जानकारी कुल आबादी : ------------------------------------------ कुल परिवार: ------------------------------------------- ए.पी.एल. : ------------------------------------------ बी. पी. एल. : ------------------------------------- कितने घरों में शौचालय है : ए.पी.एल. : ------------------------ बी. पी. एल. : ------------------- कितने घरों में शौचालय नहीं है : ए.पी.एल. : ---------------------- बी. पी. एल. : ----------- ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति खाता स.: _________________आई.एफ.एस.सी. कोड: ------- जमाकर्ता: ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति ----------------------------------- भाग -2 कार्यालय ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति --------------------------------------------- दिनांक:------------------------------------ पत्रांक:---------------------------------------------- प्रेषक: अध्यक्ष ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति ग्राम -------------------- सेवा में, सदस्य सचिव, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति जिला -------------------------- विषय : निर्मल भारत अभियंता अंतर्गत प्रचार-प्रसार व व्यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु राशि उपलब्ध कराने के सम्बंध में । महाशय, सविनय निवेदन यह है कि ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति ---------------------------का गठन ग्राम सभा द्वारा क्र लिया गया है, और समिति का बैंक में खाता(बैंक का नाम ---------------------- में खाता संख्या---------------- एवं आईएफ़एससी कोड ------------------) खोल लिया गया है। ग्राम निर्मल भारत अभियंता अंतर्गत प्रचार-प्रसार व व्यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु समिति द्वारा से एक ग्राम स्वच्छ्ता योजना तैयार किया है, जिसमें गतिविधि विवरण व लागत संलग्न है। अतः श्रीमान से अनुरोध है कि रु----------------------- ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के खाता में उपलब्ध कराया जाए ताकि समिति के माध्यम से स्वच्छ्ता प्रचार-प्रसार कर परिवारों में शौचालय का निर्माण एवं उपयोग सुनिशिचत किया जा सके। साथ ही अनुरोध है कि हमारे ग्राम के राज मिस्त्रियों, समिति के सदस्य, जलसहिया व स्वच्छ्ता सामग्री केन्द्र का प्रशिक्षण अपने स्तर से कराना सुनिश्चित करें ताकि कार्य में गुणवता व गतिप्रदान कर सकें। हस्ताक्षर हस्ताक्षर अध्यक्ष जलसहिया(कोषाध्यक्ष) ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति अनुलग्नक: गतिविधि विवरण, लाभार्थ की सूची व ग्राम सभा बैठक कार्यवाही। भाग-3 व्यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु क्रम परिवार की संख्या व्यक्ति शौचालय की लागत कुल लागत सरकार का सहयोग लाभार्थी का अंशदान समयविधि जिम्मेदारी अभ्युक्ति बी. पी. एल. ए.पी.एल. कुल व्यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु सरकार का सहयोग = रु--------------------- जलसहिया को प्रोत्साहन राशि----------------- परिवार x रु. 75.00 = रु----------------------- प्रचार-प्रसार हेतु कुल लागत = रु--------------------- 1% प्रशासनिक व्यय = रु---------------------------- कुल लागत = रु---------------------------- रूपये -------------------------------- अध्यक्ष जलसहिया(कोषाध्यक्ष) ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति भाग -4 शौचालय माँग की सूची ग्राम ------------------------------------------ पंचायत------------------------------------ क्रमांक लाभार्थी का नाम बी.पी.एल.संख्या ए.पी.एल. वर्ग जॉब कार्ड सं. अध्यक्ष जलसहिया(कोषाध्यक्ष) ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति स्रोत: पेयजल एवं स्वच्छता विभाग,झारखण्ड सरकार, केंद्र सरकार एवं पत्र सूचना कार्यालय