संकेतक : अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण योजना में प्रमाणिक युवकों की संख्या जिले में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवकों की संख्या । योजना : (1) प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), (2) दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयूजीकेवाई) उपाय : १ 2011 की जनगणना के आधार पर जिले में युवा आबादी का अनुमान लगाना और उनके प्रशिक्षण के लिए सर्वाधिक लक्ष्यों का निर्धारण करना। २ कौशल विकास मेलों और सामुदायिक भागीदारी के ज़रिए युवाओं की अपेक्षाओं का पता लगाना और उसके अनुरूप उन्हें आजीविका परामर्श देना। ३ हार्ड और सॉफ्ट आधारभूत सरंचना (मानव संसाधन सहित) सहित प्रशिक्षण संरचना का जायज़ा लेना। ४ समय पर मुल्यांकन और प्रमाणन सुनिश्चित करना। ५ कौशल मेलों के आयोजन के लिए स्थानीय विधायक और सांसद कोष का उपयोग करना और कौशल श्रेणी में 'चैम्पियन्स ऑफ चेंज' पुरस्कार की शुरुआत करना। ६ मनोनीत टीम के माध्यम से नियमित निगरानी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विद्यार्थियों की उपस्थिति, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं की पर्याप्तता बनी रहे। संकेतक : प्रमाणिक और नियोजित युवाओं की संख्या/अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण के तहत प्रशिक्षित युवाओं की संख्या योजना : (1) पीएमकेवीवाई (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना), (2) डीडीयूजीकेवाई (दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना) उपाय : १ लक्ष्य यह सुनिश्चित करने का है कि प्रमाणपत्र धारी प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर मिलें ज़िलेवार कौशल मैपिंग, ताकि मांग और आपूर्ति एक समान रहे। २ स्थानीय उद्योग की मांग के अनुसार, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सुसंगत कोर्स/ट्रेड की सुनिश्चित करना। ३ प्रशिक्षण के अनिवार्य अंग के रूप में सॉफ्ट स्किल और मूल रुप से आईसीटी प्रशिक्षण सुनिश्चितकरना। ४ पाठ्यक्रम निर्धारण में स्थानीय उद्योगों को शामिल करना और उन्हें प्रशिक्षण के लिए स्थान उपलब्ध कराने को प्रोत्साहित करना। ५ रोजगार मेले आयोजित करना और स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहित करना ताकि प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं को कैंपस प्लेसमेंट दिया जा सके। ६ प्लेसमेंट के बाद एक वर्ष तक विद्यार्थियों पर नज़र रखना। संकेतक : प्रशिक्षण पूरा करने वालों की संख्या/पोर्टल पर पंजीकृत प्रशिक्षणार्थियों की कुल संख्या। योजना : (1) एनएपीएस (राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षुता प्रोत्साहन स्कीम), (2) एनएटीएस (राष्ट्रीय शिक्षुता प्रशिक्षण स्कीम) उपाय : १ स्थानीय उद्योगों की पहचान करना जो प्रशिक्षणार्थियों को ले सकते हैं। २ आईटीआई और अल्पकालिक प्रशिक्षण केंद्रों को उद्योग से जोड़ना। ३ प्रशिक्षणार्थियों के पंजीकरण हेतु स्थानीय चेम्बर ऑफ कामर्स का उपयोग। ४ प्रशिक्षणार्थियों को काम पर रखने वाले स्थानीय उद्योग को नकद पुरस्कार अथवा मान्यता देकर प्रोत्साहित करना। ५ सीएससी केंद्रों का उपयोग और अनुभवी सलाहकारों की नियुक्ति कर प्रशिक्षणार्थियों के पंजीकरण को आसान बनाना। ६ डीबीटी (डाइरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से वजीफे का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना। संकेतक : मान्यता प्राप्त पूर्व-शिक्षण प्रमाण पत्र धारी व्यक्तियों की संख्या/अनौपचारिक तौर पर कुशल कार्यबल। योजना : पीएमकेवीवाई (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) उपाय : १ लक्ष्य यह है कि अनौपचारिक रूप से कुशल कार्यबल के रोजगार की संभावना बेहतर हो। २ ऐसे क्षेत्रों की पहचान करना जो अनौपचारिक रूप से प्रशिक्षित कामगारों को नियोजित करते हैं, और ऐसे कामगारों का डेटाबेस तैयार करना। ३ आरपीएल (पूर्व-शिक्षा की मान्यता) के माध्यम से प्रमाणपत्र प्राप्त कामगारों की संख्या के लिए सर्वाधिक लक्ष्य निर्धारित करना और चिन्हित क्षेत्रों के अंतर्गत प्रशिक्षण प्रदाताओं के लिए पीएमकेवीवाई के तहत निर्धारित लक्ष्य से उनकी तुलना करना। ४ गतिशीलता और परामर्श के लिए आरपीएल सलाहकारों की नियुक्ति करना तथा अभ्यर्थियों को मूल्यांकन के लिए तैयार करना । ५ आरपीएल प्रमाणित कामगारों को पुरस्कार राशि का भुगतान समय पर सुनिश्चित करना। ६ ब्रिज पाठ्यक्रम के दौरान हुए वेतन के नुकसान को पूरा करके कामगारों को प्रमाणपत्र लेने के लिए प्रोत्साहित करना। ७ त्वरित आकलन और प्रमाणन सुनिश्चित करना। ८ ऐसे कामगारों को वेतन के अंतर पर नियोजित करने के लिए उद्योगों को प्रोत्साहित करना संकेतक : अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रशिक्षण के तहत प्रशिक्षण प्राप्त प्रमाणित कमज़ोर/वंचित वर्ग के युवाओं की संख्या क) महिलाएं – प्रमाणित प्रशिक्षणप्राप्त ख) एससी - प्रमाणित प्रशिक्षणप्राप्त ग) एसटी – प्रमाणित प्रशिक्षणप्राप्त घ) ओबीसी - प्रमाणित प्रशिक्षणप्राप्त ङ) अल्पसंख्यक – प्रमाणित प्रशिक्षणप्राप्त च) अन्यरूपेण सक्षम – प्रमाणित प्रशिक्षणप्राप्त / प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र प्राप्त युवाओं की कुल संख्या योजना : (1) पीएमकेवीवाई (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना) (2) डीडीयूजीकेवाई (दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (3) अल्पसंख्यक, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास विभाग और निःशक्तता विभाग की योजनाएं उपाय : १ 15 से 29 वर्ष आयु समूह की जनसंख्या में से इन वंचित वर्गों की युवा जनसंख्या को अलग से चिन्हित करना। २ जागरुकता और परामर्श के लिए समुदायों और पंचायतों को शामिल करना (उदाहरण के लिए कौशल सखी मॉडल, महाराष्ट्र) ३ बाधा रहित प्रशिक्षण सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना। ४ वंचित वर्गों के स्थानीय पारंपरिक व्यवसायों (उदाहरण के लिए जनजातीय कला/पारंपरिक हस्तशिल्प) की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्किल मेपिंग।