<h3 style="text-align: justify; "><span>परिचय </span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">स्वैच्छिक विकास संगठन के कार्यों और कार्यविधियों में वे मूल्य प्रतिबिम्बित होने चाहिए जिन्हें ले कर संगठन काम कर रहा है| देश के वर्तमान कानूनी मानदंडों के अतर्गत पंजीकृत होने के अलावा स्वैच्छिक संगठन जवाबदेही और पारदर्शिता द्वारा सांगठनिक सत्यनिष्ठा को आगे बढ़ाएंगे |</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>सांगठनिक सत्यनिष्ठा </span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">ऐसे स्वैच्छिक विकास संगठनों के विकास और स्थायित्व के लिए, जो अपने दायरे ढाँचे और सिद्धांतों में सार्वजनिक (निजी नहीं) हों, निम्नलिखित कार्य आवश्यक है:</p> <p style="text-align: justify; ">क) संगठन को उन पर लागू होने वाले और कानूनों का पालन करना चाहिए|</p> <p style="text-align: justify; ">ख) क्योंकि स्वैच्छिक क्षेत्र और अन्य क्षेत्रों (विशेषकर निगमित क्षेत्र और सरकार) के बीच कार्य के लिए मिलने वाले लाभों, वेतनों, आदि में थोड़ी ही समानता है, अतः कार्यदल के सदस्यों को मुख्यतः स्वैच्छिकवाद के मूल्यों और सामाजिक प्रतिबद्धता से प्रेरणा प्राप्त करनी चाहिए|</p> <p style="text-align: justify; ">ग) संगठन को एक स्पष्ट लिखित नीति तैयार करनी चाहिए जिसमें मतभेद होने की स्थिति में सामंजस्यपूर्ण निर्णय की व्यवस्था हो|</p> <p style="text-align: justify; ">घ) संगठन की रोजगार नीति स्पष्ट, सहायक, समान अवसर प्रदान करने वाली और गैर-भेदभावकारी होनी चाहिए|</p> <p style="text-align: justify; ">ङ) संगठन को वार्षिक कार्य सम्बन्धित विवरण तथा वित्तीय रिपोर्ट तथा साथ ही विभिन्न गतिविधियों पर रिपोर्ट, तथा समीक्षाओं और मूल्यांकनों के प्रभाव पर रिपोर्ट तैयार कर उपलब्ध करानी चाहिए</p> <h3 style="text-align: justify; "><span>जवाबदेही </span><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; "> </p> <ul style="text-align: justify; "> <li><span>संगठन का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए लाभार्थी समुदाय के प्रति जवाबदेही पर साथ ही साथ संगठन की सरकार और निधिदाताओं के प्रति भी जवाबदेही होनी चाहिए|</span></li> <li><span>जवाबदेही में नियमित, व्यवस्थित और खुले मूल्यांकन व मानीटरिंग के माध्यम से काफी सुधार लाया जा सकता है जिससे संगठन के सिंद्धांतों और मूल्यों, जनता और समुदाय के प्रति उसकी वचनबद्धता, बदलाव लाने और प्रतिक्रिया करने की उसकी क्षमता तथा उसकी लागत-प्रभाविकता का आकलन और सुदृढ़ीकरण किया जा सके|</span></li> <li><span>इस मूल्यांकन और मानीटरिंग में निम्न बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए</span></li> </ul> <p style="text-align: justify; "> </p> <p style="text-align: justify; ">क) जहाँ भी संभव हो बाहरी और स्वतंत्र पक्षों से जानकारी मांगी जानी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संगठन ईमानदार है, वस्तुनिष्ठ है, अपनी स्वार्थपूर्ति में नहीं जुटा है और समुचित रूप से आलोचनात्मक है|</p> <p style="text-align: justify; ">ख) इस तरह की मूल्यांकन और मानीटरिंग का कार्य सरल और सरसरा नहीं होना चाहिए जैसे कि कई बार वित्तीय आडिटिंग हो जाती है, बल्कि इसमें सामाजिक-आर्थिक कारकों पर विचार किया जाना चाहिए और साथ अभीष्ट (इंटेन्डेड) और अनभीष्ट (अ (अनइंटेन्डेड) प्रभावों की छानबीन की जानी चाहिए (इसमें सामाजिक आडिट तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं)</p> <p style="text-align: justify; ">ग) ऐसे सांगठनिक तौर-तरीके विकसित करना जिनसे संगठन अपनी प्रभावकारिता और विश्वसनीयता स्थापित कर सके और निधिदाताओ तथा सरकारों द्वारा अपनाये गए अतिरिक्त नियंत्रण का प्रतिरोध कर सके|</p> <h3 style="text-align: justify; "><strong>पारदर्शिता </strong><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; ">संगठन को कार्य के उद्देश्य में निम्न प्रकार से पारदर्शिता अपनानी चाहिए:</p> <p style="text-align: justify; ">क) यह स्पष्ट प्रलेखित करना चाहिए कि वे कौन है, वे के करते हैं और किस प्रकार करते हैं|</p> <p style="text-align: justify; ">ख) वित्तीय मानदंडों और कर्मचारी व स्वैच्छिक कार्यकर्त्ता सम्बन्धी नीति का स्पष्ट तौर पर पालन करना चाहिए और उसका प्रलेखीकरण करना चाहिए|</p> <p style="text-align: justify; ">ग) वितीय विवरण के साथ अपने कार्यक्षेत्रों और सम्बद्ध संगठनों के बारे में वार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए और अन्य को उपलब्ध करानी चाहिए|</p> <h3 style="text-align: justify; "><strong>वित्तीय प्रबंधन </strong><strong> </strong></h3> <p style="text-align: justify; "> </p> <ul style="text-align: justify; "> <li><span>संगठन के वित्तीय प्रबंधन के तौर-तरीके उच्च स्तर के होने चाहिए जो उसकी ईमानदारी और पारदर्शिता को प्रकट करें|</span></li> <li><span>संगठन को अपने निधिदाताओं के साथ वार्ताएं चलाते हुए यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोष सम्बन्धी समझौतों की शर्तें और क्रियाविधियों तथा रिपोर्टिंग की समय तालिका पारस्परिक रूप से स्वीकार्य हो|</span></li> <li><span>संगठन को केवल वे अनुदान और अनुबंध ही स्वीकार करने चाहिये उसकी दृष्टि और लक्ष्य के अनुरूप हों|</span></li> <li><span>संगठन को वित्तीय मानीटरिंग और रिपोर्टिंग के लिए पर्याप्त और समुचित क्रियाविधियों की व्यवस्था करनी चाहिए|</span></li> <li><span>कोष प्राप्त करने के सबंध में संगठन की एक स्पष्ट नीति होनी चाहिए जो उसकी संस्थागत प्रगति तथा टिकाऊपन को सुनिश्चित करे|</span></li> </ul> <p style="text-align: justify; "> </p> <p style="text-align: justify; "><strong> </strong></p> <p style="text-align: justify; "><strong> स्रोत: जेवियर समाज सेवा संस्थान, राँची|</strong></p>