पृष्ठभूमि यह योजना भारतीय संस्कृति की समग्र संकल्पना के अधीन भारत के अल्पसंख्यक समुदायों की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने की योजना है। भूमिका भारत सरकार विविधता में एकता में विश्वास रखती है जो भारतीय संस्कृति का मूल सिद्धांत है। भारत का संविधान भारत के समुदायों सहित सभी समुदायों को अपने धर्म एवं संस्कृति को मानने का समान अधिकार एवं अवसर प्रदान करता है। संविधान की भावना का अनुसरण करते हुए, भारत सरकार का यह दृढ़ विश्वास है कि अल्पसंख्यकों विशेषकर , अल्पमत अल्पसंख्यकों की समृद्ध विरासत एवं संस्कृति का सहकार करने तथा कैलीग्राफी एवं संबंधित शिल्पों को सहायता प्रदान करने की प्रबल आवश्यकता है। भारत में 6 (छहः) अधिसूचित अल्पसंख्यक हैं जिन्हें राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। वे हैं मुस्लिम, इसाई, सिक्ख, बौद्ध, पारसी और जैन। 2001 की जनगणना के आँकड़ों के अनुसार, बौद्धों और जैनों की आबादी कम अर्थात् एक करोड़ से कम है। पारसियों की संखया तो एक लाख से भी कम है, इसलिए उन्हें अल्पतम अल्पसंख्यक श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। भारत के अल्पसंख्यक समुदायों विशेषकर , पारसियों, इसाईयों, बौद्धों इत्यादि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बारे में लोगों में जानकारी की आम कमी है। समुदायों की संस्कृति एवं समृद्ध विरासत के बारे में पर्याप्त जानकारी से लोगों में बेहतर समझ विकसित होती है और सहिष्णुता एवं सामाजिक ताना-बाना मज़बूत होता है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को कार्य आबंटन के अनुसार कानून और व्यवस्था को छोड़कर अल्पसंख्यकों से संबंधित सभी मामलों की देख-रेख करने का अधिदेश प्राप्त है। अतएव्, सरकार की प्राथमिकता के अनुसार, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की मंशा भारत के अल्पसंख्यक समुदायों की समृद्ध संस्कृति और विरासत का संरक्षण करने के लिए “हमारी धरोहर” नामक एक नई योजना आरंभ करने की है। योजना का उद्देश्य भारतीय संस्कृति की समग्र संकल्पना के अंतर्गत अल्पसंख्यकों की समृद्ध विरासत का संरक्षण करना। आइकोनिक प्रदर्शनियों को क्यूरेट करना। साहित्य/दस्तावेजों का संरक्षण। कैलीग्राफी आदि को सहायता एवं संवर्धन। अनुसंधान एवं विकास। योजना के अंतर्गत शामिल क्रियाकलाप विरासत के संरक्षण के लिए चुनिंदा हस्तक्षेप और निम्न प्रकार की परियोजनाओं को कवर किया जा सकता है - आइकोनिक प्रदर्शनियों को क्यूरेट करना; कैलीग्राफी आदि के लिए सहायता एवं संवर्धन देना; साहित्य, दस्तावेज, पाण्डुलिपि आदि के संरक्षण; मौखिक परंपराओं/कला विधाओं का प्रलेखन; अल्पसंख्यक समुदायों की विरासत एवं इतिहास को प्रदर्शित करने एवं संरक्षण करने हेतु ‘एथनिक संग्रहालयों’ के लिए सहायता देना; विरासत संबंधित सेमीनारों/कार्यशालाओं इत्यादि का आयोजन; विरासत के सरंक्षण और विकास में अनुसंधान हेतु अध्येतावृत्ति; अल्पसंख्यकों की कला एवं संस्कृति के संवर्धन के उद्देश्य को प्रोत्साहन देने हेतु व्यक्तियों/संस्थानों को अन्य कोई सहायता। ज्ञान भागीदार अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय इस क्षेत्र के विशेष राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय ज्ञान भागीदारों की सहायता से संस्कृति मंत्रालय के साथ सलाह-मशविरा करके इस योजना को क्रियान्वित करेगा। ज्ञान भागीदार निम्नानुसार हो सकते हैं- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई); राष्ट्रीय संग्रहालय, दिल्ली; भारत का राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली; राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (एनजीएमए); इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए); संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक , वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को); भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (आईएनटीएसीएच); विश्व स्मारक निधि। क्रियान्वयनकर्त्ता संगठन परियोजनाओं के लिए परियोजना क्रियान्वयनकर्त्ता एजेंसियां (पीआईए)- राज्य पुरातत्व विभाग आगा ख़ान हेरिटेज ट्रस्ट आदि जैसे प्रतिष्ठित संगठन; अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिष्ठित पंजीकृत संगठन, जो सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत कम से कम तीन वर्षों के लिए पंजीकृत हों, तथा विरासत के ऐसे संरक्षण संबंधी कार्यों का अनुभव रखते हों। अल्पसंख्यक समुदाय के पंजीकृत/मान्यता प्राप्त सांस्कृतिक संस्थान, जो सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत कम से कम तीन वर्षों के लिए पंजीकृत हों, तथा विरासत के ऐसे संरक्षण संबंधी कार्यों का अनुभव रखते हों। मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय/शोध संस्थान जिन्हें विरासत के ऐसे संरक्षण संबंधी कार्यों का अनुभव एवं सुविधा हो। केंद्र/राज्य सरकार के संस्थान जिन्हें विरासत के ऐसे संरक्षण संबंधी कार्यों का अनुभव एवं सुविधा हो। अध्येतावृत्तियां अध्येतावृत्तियां निम्नलिखित पात्रता मापदंड के अनुसार प्रदान की जाएगी - उम्मीदवार अधिसूचित अल्पसंख्यक होना चाहिए तथा किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से उस क्षेत्र में न्यूनतम 50% अंकों के साथ स्नातकोत्तर होना चाहिए जिसमें वह ऊपर उल्लिखित उद्देश्यों को पूरा करने के लिए अध्येतावृत्ति प्राप्त करना चाहता/चाहती है। उसे किसी विश्वविद्यालय/संस्थान में नियमित एम0फिल/पीएच0डी0 के लिए प्रवेश प्राप्त होना चाहिए। उसकी आयु 35 वर्षों से अधिक नहीं होना चाहिए। वार्षिक लक्ष्यों की 33% सीटें अल्पसंख्यक बालिकाओं/महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित की जाएंगीं योजना का क्रियान्वयन यह योजना राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के अंतर्गत अधिसूचित 6 (छहः) अल्पसंख्यक समुदायों (यथा मुस्लिम, ईसाई, सिक्ख, बौद्ध, पारसी तथा जैन) की समृद्ध विरासत का संरक्षण करने के लिए क्रियान्वित की जाएगी। योजना की शुरुआत समूचे देश में की जा सकती है। यह योजना 12वीं पंचवर्षीय योजना की शेष तीन वर्षों के दौरान 2014-15 से 2016-17 की अवधि के लिए क्रियान्वित की जाएगी। सहायता का स्वरूप और मात्रा यह एक 100% केंद्रीय क्षेत्र की योजना है और चुनिन्दा पीआईए के माध्यम से मंत्रालय द्वारा सीधे क्रियान्वित की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत सहायता अल्पसंख्यकों के समृद्ध विरासत के सभी रूपों के संरक्षण तथा प्रचार के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान देने और उनमें सुधार लाने के उद्देश्य से अवसंरचना विकास हेतु पूंजी लागत सहित आवर्ति अनुदानों और अनावर्ति अनुदानों के रूप में मुहैया करायी जाएगी। चूंकि विरासत के सुधार और संरक्षण में विशेष जरूरतों के आधार पर अनेक क्रियाकलाप शामिल होंगे, अतः मदों को चिन्हित करना और मद-वार लागत निर्धारित करना उपयुक्त नहीं होगा। लागत किए जा रहे कार्य के किस्म पर आधारित होगी। परियोजना अनुमोदन समिति (पीएसी) द्वारा संस्तुत परियोजनाएं सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित की जाएंगी।सचिव (अ0का0) परियोजना अनुमोदन समिति (पीएसी) की अनुशंसा को अनुमोदित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी होंगे। सहायता समृद्ध विरासत के लिए अध्येतावृत्ति, अनुसंधान और विकास कार्य तथा इसके संरक्षण और संवर्धन के साथ-साथ विरासत शिक्षा के क्षेत्र में परियोजनाओं, कार्यों को लोकप्रिय बनाने और प्रकाशन आदि के लिए भी मुहैया करायी जाएगी। अध्येतावृत्ति वरिष्ठ शोधकर्ताओं के लिए यूजीसी के विद्यमान वित्तीय मानकों के अनुसार प्रदान की जाएगी। निधियों की निर्मुक्ति परियोजना के अनुमोदन पर, निधियां 3 किस्तों में अर्थात 40-40-20 निर्मुक्त की जाएंगी। निर्मुक्ति हेतु निधियां पीआईए को उनके खाते में इलैक्ट्रॉनिक अन्तरण द्वारा चुनिन्दा पीआईए को सीधे संवितरित की जाएंगी। परियोजनाओं के संबंध में निधियों के निर्मुक्ति के किस्त का स्वरूप निम्नानुसार होगा - प्रथम किस्त - प्रथम किस्त (अर्थात् परियोजना लागत का 40%) परियोजना के अनुमोदन के पश्चात् तथा पक्षकारों के बीच समझौता ज्ञापन होने के बाद निर्मुक्ति की जाएगी। परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी निर्धारित प्रपत्र में एक बांड तथा बैंक ब्यौरे प्रस्तुत करेगी। दूसरी किस्त - परियोजना लागत के 40% की दूसरी किस्त निम्नलिखित के अनुपालन के अध्यधीन जारी की जाएगी - लेखा-परीक्षित उपयोग प्रमाण-पत्र से समर्थित प्रथम किस्त के 90% का लेखा परीक्षित उपयोग। प्राधिकृत एजेंसी द्वारा कार्य का स्थल पर निरीक्षण। लेखा परीक्षित रिपोर्टों का प्रस्तुतीकरण। किए गए कार्यों की तस्वीरों का प्रस्तुतीकरण। तीसरी किस्त - परियोजना लागत के 20% की तीसरी तथा अंतिम किस्त निम्नलिखित के अनुपालन के अध्यधीन जारी की जाएगी - तस्वीरों के साथ परियोजना पूर्ण होने की रिपोर्ट। प्रथम और दूसरी किस्तों में निर्मुक्त संपूर्ण निधियों हेतु लेखा परीक्षित उपयोग प्रमाण-पत्र। लेखा परीक्षक की रिपोर्ट के साथ लेखा परीक्षित लेखें। परियोजना में यथा अपेक्षित प्रदानगियां पूरी हों तथा आकस्मिक वास्तविक सत्यापन के माध्यम से प्राधिकृत एजेंसी द्वारा सत्यापित। 3 . अध्येतावृत्तियों के मामले में, निधियां निम्नानुसार भी जारी की जाएगी - विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार वरिष्ठ शोधकर्ता के लिए दरें लागू होंगी। अध्येतावृत्ति तीन वर्षों के लिए प्रदान की जाएगी। प्रथम और द्वितीय वर्षों के लिए अध्येतावृत्ति 25,000/- रु0 प्रतिमाह की दर से होगी और तीसरे वर्ष के लिए अनुसंधान कार्य की प्रगति के आधार पर यह 28,000/- रु0 प्रतिमाह की दर से होगी। अध्येतावृत्ति अधिकतम 3 वर्षों के लिए स्वीकार्य होगी। यदि शोध 3 वर्षों के भीतर पूर्ण नहीं होती है तो इसे मामले के गुण और शोध कार्य की प्रगति के आधार पर सक्षम अधिकारी के अनुमोदन से 28,000/- रु0 प्रतिमाह पर अधिकतम एक और वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। मंत्रालय द्वारा प्रत्यक्ष रूप से ई-अंतरण के माध्यम से छात्र के बैंक खाते में अर्धवार्षिक आधार (एक ही बार में 6 महीनों की अध्येतावृत्ति) पर निधियां अंतरित की जाएंगी। पहले वर्ष की पहली निधि पीएच.डी. में प्रवेश प्राप्त करने के 6 महीने के उपरांत बैंक खाते में अंतरित की जाएगी। तदनन्तर निधियां प्रत्येक 6 महीने के पश्चात् तद्नुसार अंतरित की जाएंगी। आवेदन की प्रक्रिया अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय संगठनों/संस्थानों से समाचार पत्रों तथा मंत्रालय की सरकारी वेबसाइट में विज्ञापन के माध्यम से चयन हेतु निर्धारित प्रपत्र में प्रस्ताव आमंत्रित करेगा। मंत्रालय उन विशेष ज्ञ संगठनों को, जो निर्धारित प्रपत्र में परियोजना प्रस्तुत करते हैं तथा संगत क्षेत्र में अपने कार्यानुभव हेतु विखयात है अथवा क्यूरेटिंग कार्य हेतु संस्कृति मंत्रालय के पैनल में शामिल हैं, परियोजनाए दे सकता है। इसी तरह, मंत्रालय संगत क्षेत्र में अध्येतावृत्ति प्रदान कर सकता है बशर्ते कि अभ्यर्थी इस दिशा- निर्देश के पैरा 5.2 में निर्धारित पात्रता मानदंड को पूरा करते हों। परियोजना प्रस्तावों की जांच प्रचालात्मक दिशा-निर्देशों के आधार, अनिवार्य मानदंड के लिए विहित पूर्व-निर्धारित बिन्दु-आधार प्रणाली पर की जाएगी तथा मंत्रालय की परियोजना अनुमोदन समिति (पीएसी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। तथापि, मंत्रालय के पास बिना कोई सूचना दिए किसी स्तर पर चयन को रद्द करने का अधिकार सुरक्षित है। मंत्रालय प्राधिकृत एजेंसी के माध्यम से संगठनों/संस्थानों के प्रमाण-पत्रों को सत्यापित कर सकता है। चुनिंदा पीआईए के प्रस्तावों पर सक्षम प्राधिकारी अर्थात् सचिव (अल्पसंख्यक कार्य) के अनुमोदन से विचार किया जाएगा। परियोजना मंजूरी समिति (पीएसी) परियोजना लागत सहित संगठनों द्वारा प्रस्तुत परियोजना की संयुक्त सचिव (संबंधित) की अध्यक्षता में एक परियोजना अनुमोदन समिति (पीएसी) द्वारा जांच तथा विचार किया जाएगा। पीएसी में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राष्ट्रीय संग्रहालय तथा राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय से सदस्य हो सकते हैं। पीएसी आवश्यकता के अनुसार विशेषज्ञ संस्थानों को सह-योजित कर सकती है। परियोजना मंजूरी समिति के पास परियोजना (परियोजनाओं) की जांच तथा अनुशंसा का अधिकार है। परियोजना की निगरानी प्रगति को सतत रूप में मापना निगरानी है, जब परियोजना चल रही हो, जिसमें प्रगति की जांच करना और मापना, स्थिति का विशलेषण करना और नई घटनाओं, अवसरों तथा मुद्दों पर प्रतिक्रिया करना शामिल है। मंत्रालय किसी अन्य एजेंसी अथवा ज्ञान भागिदार को समवर्ती निगरानी और औचक जांच करने के लिए प्राधिकृत कर सकता है। मंत्रालय के अधिकारी भी परियोजनाओं की निगरानी कर सकते हैं। इससे एकत्र की गई सूचना को निधियों को जारी करने तथा परियोजना प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए निर्णय करने की प्रक्रिया में रखा जाएगा। कुल लागत का 3% परामर्शन,अनुवीक्षण और मूल्यांकन सहित योजना के प्रशासन तथा प्रबंधन के लिए व्यावसायिक सेवाओं पर व्यय किया जाएगा। प्रशासन तथा प्रबंधन के लिए, आवश्यकता अनुसार संविदागत आउटर्सोस स्टॉफ के साथ एक परियोजना प्रबंधन एकक स्थापित किया जाएगा। संविदागत स्टॉफ को लगाने हेतु संगत जीएफआर का अनुसरण किया जाएगा। इस पर होने वाला व्यय योजना के प्रशासन और प्रबंधन हेतु निर्धारित 3% बजट से वहन किया जाएगा। लेखापरीक्षा मंत्रालय के पास परियोजना के लेखों की लेखा परीक्षा कराने का अधिकार सुरक्षित है,यदि इसे आवश्यक समझा जाता है, इसमें सीएजी द्वारा और मंत्रालय के प्रधान लेखा अधिकारी द्वारा अथवा स्वतंत्र एजेंसी द्वारा लेखा-परीक्षा शामिल है। पीआईए इस प्रयोजन के लिए सभी संगत अभिलेखों को मंत्रालय द्वारा अधिकृत एजेंसी के अनुरोध पर उपलब्ध कराएगा। वित्तीय लेखा-परीक्षा सांविधिक उपबंधों के अनुसार पीआईए के चार्टर्ड एकाउन्टेंट द्वारा की जानी है, और परियोजना के लेखों का अनुरक्षण सार्थक लेखा-परीक्षा को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से अलग से किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत लेखा परीक्षक की टिप्पणियों और वास्तविक प्रगति पर की गई कार्रवाई के साथ लेखा परीक्षा रिपोर्ट केंद्रीय निधि की दूसरी तथा अंतिम किस्त के जारी किए जाने के समय प्रस्तुत की जाएगी। नियम एवं शर्तें चयनित पीआईए को परिशिष्ट पर दिए गए अनुसार योजना के नियम व शर्तें मानना अनिवार्य होगा। योजना की समीक्षा यह योजना प्रतिष्ठित स्वतंत्र अभिकरण द्वारा मूल्यांकन एवं प्रभाव मूल्यांकन करने के उपरांत 12वीं योजना के अंतिम वर्ष में समीक्षा करने के अध्यधीन होगी। परिशिष्ट केंद्रीय क्षेत्र की योजना ''हमारी धरोहर'' योजना से संबंधित नियम एवं शर्तें योजना के अंतर्गत संस्वीकृत सहायता-अनुदान चयनित परियोजना कार्यान्वयन एजेंसियों/ संगठनों/संस्थानों/व्यक्तियों (इसके पश्चात् संगठन) द्वारा निम्नलिखित निबंधन एवं शर्तों के पूरा करने के अध्यधीन है - कि संगठन, जो योजना के अंतर्गत सहायता-अनुदान प्राप्त करने का इच्छुक है, योजना के अंतर्गत यथा विहित पात्रता मानदंड को पूरा करेगा; अनुदान का अधिकार के रूप में दावा नहीं किया जा सकता है, यह परियोजना के गुणावगुण आधार पर भारत सरकार के पूर्ण विवेक पर निर्भर करता है; कि संगठन प्रत्येक वित्तीय वर्ष के शुरुआत में इस आशय की लिखित रूप में पुष्टि करेगा कि इस दस्तावेज में समाविष्ट तथा इस योजना के कार्यान्वयन हेतु समय-समय पर यथा संशोधित शर्तें उसे स्वीकार्य हैं; कि संगठन भारत के राष्ट्र पति के पक्ष में 20 रु0 के गैर-न्यायिक स्टाम्प पेपर पर इस आशय का एक बाँड निष्पादित करेगा कि वह अनुदान और योजना से संबंधित उन निबंधन एवं शर्तों का पालन करेगा, जो समय-समय पर संशोधित की जाती हैं और यह कि उसके अनुपालन में असफल रहने के मामले में, वह सरकार को इस परियोजनार्थ संस्वीकृत कुल सहायता-अनुदान को उस पर लगने वाले ब्याज के साथ सरकार को लौटा देगा और कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई के लिए जिम्मेवार होगा; कि मंत्रालय परियोजना को चलाने के लिए संगठन द्वारा नियुक्त अस्थायी/नियमित कर्मचारियों को किसी किस्म के भुगतान के लिए जिम्मेवार नहीं होगा; कि संगठन इस अनुदान के संबंध में राष्ट्रीयकृत/अनुसूचित बैंक में अलग से एक खाता रखेगा। अनुदान प्राप्तकर्ता संस्थान को 10,000/- रु0 और उससे ऊपर की अंतर्ग्रस्त सभी प्राप्तियां और भुगतान चैक के माध्यम से ही किए जाएंगे। अनुदान प्राप्तकर्ता संस्थानों से परियोजना को जारी रखने के लिए अनुदान मांगने के समय संस्वीकृत परियोजना को चलाने के संबंध में किए गए सभी सौदों को दर्शाने वाली बैंक पास बुक की एक प्रति प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है। ये खाते मंत्रालय, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय, भारत सरकार, अथवा संबंधित राज्य सरकार के प्रतिनिधियों/अधिकारियों को किसी भी समय निरीक्षण के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे।संगठन या तो सीएजी के पैनल में शामिल लेखा परीक्षकों अथवा चार्टर्ड एकाउन्टेंट द्वारा लेखा परीक्षित सहायता-अनुदान लेखाओं को रखेगा और हर-हालत में प्रत्येक वर्ष के जून माह के अंतिम सप्ताह तक मंत्रालय को सा0वि0नि0 19(क) में उपयोग प्रमाण पत्र के साथ लेखा परीक्षित लेखाओं की प्रति भेजेगा - वर्ष के लिए मांगे गए सहायता-अनुदान की प्राप्ति और भुगतान लेखा; वर्ष के लिए मांगे गए सहायता-अनुदान की आय और व्यय के लेखे; मांगे गए सहायता-अनुदान से परिसंपत्तियों और दायित्वों को दर्शानेवाला तुलनपत्र; मद-वार ब्यौरा के साथ सामान्य वित्तीय नियमों के अनुसार निर्धारित प्रपत्र (सा0 वि0 नि0 - १९ क) में उपयोग-प्रमाण पत्र; वर्ष के लिए संपूर्ण रूप में संगठन के लेखा परीक्षित लेखे। संगठन मंत्रालय द्वारा यथानिर्धारित निष्पादन -सह-उपलब्धि रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसके लिए उसने सहायता-अनुदान प्राप्त किया है; कि सहायता-अनुदान की मदद से प्रदान की जाने वाली सुविधाएं पंथ, धर्म, रंग आदि का ध्यान दिए बिना सभी अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए उपलब्ध होंगी; संगठन सरकारी स्रोतों सहित किसी अन्य स्रोत से उसी प्रयोजन/परियोजना के लिए अनुदान-प्राप्त नहीं करेगा। यदि वह अन्य स्रोतों से भी उसी परियोजना के लिए अनुदान प्राप्त करता है, तो इसे प्राप्त करने के तुरंत पश्चात् समुचित संदर्भ के साथ अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय को सूचित करना होगा; संगठन, सहायता-अनुदान को पथांतरित नहीं करेगा अथवा उस परियोजना का निष्पादन किसी अन्य संगठन या संस्थान को नहीं सौंपेगा, जिसके लिए सहायता-अनुदान स्वीकृत किया गया है; कि यदि सरकार परियोजना की प्रगति से संतुद्गट नहीं है अथवा यह समझती है कि योजना के दिशा-निर्देशों स्वीकृति की निबंधन एवं शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है, तो उसके पास तत्काल प्रभाव से सहायता-अनुदान को समाप्त करने का अधिकार सुरक्षित है और वह पूर्व सूचना के साथ अथवा इसके बिना दंड सहित निधियां वसूल करने की अथवा ऐसी अन्य कार्रवाई कर सकती है, जो वह उचित समझे। इसके अलावा, मंत्रालय द्वारा किसी संगठन को एक बार काली सूची में डाल दिए जाने पर, उसे भविद्गय में अनुदान देने हेतु मंत्रालय द्वारा विचार नहीं किया जाएगा, चाहे उसे किसी समय काली सूची से हटा ही दिया गया हो; कि परियोजना के नवीकरण के समय अनुदान का कोई अव्ययित शेष मंत्रालय द्वारा बाद में अनुमेय अनुदान में समायोजित कर दिया जाएगा; इस सहायता-अनुदान से पूर्ण रूप से अथवा पर्याप्त रूप से प्राप्त किसी परिसंपत्ति का निपटान अथवा बाधित नहीं किया जाएगा और अथवा जिसके लिए इसकी मंजूरी दी गई है, उससे इतर किसी अन्य प्रयोजन के लिए इसका उपयोग नहीं किया जाएगा; संगठन इस सहायता-अनुदान से प्राप्त की गई पूर्ण अथवा आंशिक स्थायी और अर्धस्थायी परिसंपत्तियों का सा0 वि0 नि0 (19) में रजिस्टर का अनुरक्षण करेगा। यह रजिस्टर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक/भारत सरकार/राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्रों के कार्यालय के अधिकारियों के निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगा। इस अनुदान के संबंध में रजिस्टर का अलग से अनुरक्षण किया जाएगा और लेखा परीक्षित लेखाओं के साथ उसकी एक प्रति मंत्रालय को प्रस्तुत की जाएगी; वार्षिक अनुदान की दूसरी और अंतिम किस्त की निर्मुक्ति अनुदान प्राप्तकर्ता संस्थानों से मंत्रालय द्वारा निर्धारित अनुसार वर्ष के दौरान पहले जारी की गई किस्तों के समुचित उपयोग का संगत साक्ष्य मुहैया कराने की शर्त पर होगी; संगठनों को अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए अन्य मौजूदा सेवाओं के तालमेल हेतु जिला प्रशासन के साथ संपर्क करना चाहिए। इन्हें स्थानीय पंचायती राज संस्थाओं के साथ भी संपर्क कायम करना चाहिए और उनका सहयोग लेना चाहिए।सामुदायिक सहयोग प्राप्त करने के लिए इनके पास संस्थागत व्यवस्थाएं भी होनी चाहिए; सामान्य वित्तीय नियम 150(2) के उपबंध वहां लागू होंगे, जहां गैर-सरकारी संगठनों को निर्धारित राशि के लिए सहायता प्रदान की जा रही है; संगठन समुचित रूप से ऐसे बोर्डों पर प्रदर्शित करेगा, जिस पर परियोजना स्थल के बारे में दर्शाया जाए कि यह परियोजना अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में चलाई जा रही है; अनावर्ती मदों (यदि कोई हैं) की खरीद प्राधिकृत विक्रेताओं द्वारा प्रतिस्पर्धी कीमतो पर की जानी चाहिए और निरीक्षण के लिए बाउचर प्रस्तुत किए जाने चाहिए; कि संगठन लाभार्थियों से कोई शुल्क नहीं लेगा; नई परियोजनाओं के मामले में, संगठन परियोजना के प्रारंभ होने की तारीख में इस मंत्रालय और राज्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को सूचित करेगा और यह संगठन द्वारा उनके बैंक खाते में निधियों की प्राप्ति से 15 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए; कि संगठन इन अनुदानों से किसी धार्मिक/सांप्रदायिक/रूढ़िवादी/विभाजक विश्वासों अथवा सिद्धांतों की हिमायत नहीं करेगा अथवा बढ़ावा नहीं देगा; न्यायालय मामले की स्थिति में, संगठन तब तक किसी सहायता-अनुदान का हकदार नहीं होगा, जब तक मामला न्यायालय में लंबित है; मंत्रालय कार्यान्वयनकर्ता संगठन और तीसरे पक्ष के बीच किसी कानूनी/बौद्धिक/संविदागत विवादों के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। अनुदान स्वीकार करके, प्राप्तकर्ता इस शर्त को स्वीकार करता है; अनुदानों को जारी किए जाने के संबंध में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से संबंधित सभी विवादों के निपटान का अधिकार क्षेत्र दिल्ली न्यायालय होगा; संगठन को योजना के सभी उक्त निबंधन एवं शर्तों , दिशा-निर्देशों , सा.वि.नि. के उपबंधों और उनमें किसी पश्यवर्ती संशोधन/परिवर्तन का अनुपालन करना स्रोत: भारत सरकार का अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय